Pollution

2019 में भारत में प्रदूषण के कारण दुनिया में सर्वाधिक 23.5 लाख से अधिक लोगों की मौत: लांसेट अध्ययन

‘द लांसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन में साल 2019 में भारत में सभी प्रकार के प्रदूषण के कारण 23.5 लाख से अधिक मौतें समय से पहले हुई हैं, जिसमें वायु प्रदूषण के कारण 16.7 लाख मौतें शामिल हैं. वैश्विक स्तर पर हर साल होने वाली 90 लाख मौतों के लिए सभी प्रकार का प्रदूषण ज़िम्मेदार है.

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar attends the foundation stone laying ceremony of 'Multipurpose Prakash Kendra and Udyan' at the campus of Guru Ka Bagh in Patna, Sunday, Sept 9, 2018. (PTI Photo)(PTI9_9_2018_000102B)

‘नमामि गंगे’ के तहत आवंटित राशि इस्तेमाल न करने पर कैग ने बिहार सरकार की आलोचना की 

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2019-20 की अवधि के दौरान प्रत्येक वर्ष केवल 16 से 50 प्रतिशत धन का उपयोग किया गया. जिसके चलते 684 करोड़ रुपये इस्तेमाल नहीं हो सके. फिर भी राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने पिछली किश्तों के उपयोग को सुनिश्चित किए बिना अगली किश्तों के लिए धन जारी कर दिया.

ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कटौती करना ज़रूरी, 2030 के बाद कोई लाभ नहीं होगा: आईपीसीसी रिपोर्ट

इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर अगले कुछ सालों में ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में कटौती को लेकर कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं किया गया तो 2030 के बाद जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए उठाया गया कोई भी क़दम वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा. ग्रीनहाउस गैस वातावरण में गर्मी को बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार होती हैं.

भारत ने सुरक्षा परिषद में जलवायु परिवर्तन पर चर्चा संबंधी प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोट किया

भारत ने इस क़दम का विरोध करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन पर चर्चा का उचित मंच ‘जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन’ यानी यूएनएफसीसीसी है, न कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद. भारत के अलावा वीटो का अधिकार रखने वाले रूस ने इस प्रस्ताव के विपक्ष में वोट किया, जबकि चीन ने मतदान में भाग नहीं लिया.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आपात स्थिति है

दिल्ली-एनसीआर में बढ़े वायु प्रदूषण को ‘आपात स्थिति’ बताते हुए शीर्ष अदालत ने प्रशासन से कहा कि वाहनों को रोकने या कुछ दिन का लॉकडाउन लगाने जैसे क़दम तत्काल उठाए जाएं. शनिवार सुबह दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में थी और एक्यूआई 473 था. नोएडा व गुड़गांव में एक्यूआई क्रमश: 587 और 557 रहा.

दिवाली के बाद दिल्ली की आबोहवा हुई ‘ज़हरीली’, आंखों में जलन की शिकायतें

दिल्ली की वायु गुणवत्ता बृहस्पतिवार रात को गंभीर श्रेणी में पहुंच गई, क्योंकि लोगों ने सरकार के प्रतिबंधों का घोर उल्लंघन करते हुए दिवाली पर जमकर पटाखे जलाए. शुक्रवार सुबह घने कोहरे की मोटी परत छाई रही, जिसके कारण कई हिस्सों में निवासियों को गले में जलन और आंखों में पानी आने की दिक्कतों से जूझना पड़ा.

मानव स्वास्थ्य के लिए वायु प्रदूषण सबसे बड़े पर्यावरण ख़तरों में एक है: डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2005 के बाद पहली बार अपने नए वायु गुणवत्ता दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा है कि हर साल वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से 70 लाख लोगों की अकाल मृत्यु होने और लाखों लोगों के स्वास्थ्य के प्रभावित होने का अनुमान है.

दिल्ली सरकार ने दिवाली के दौरान पटाखों के भंडारण, बिक्री और उपयोग पर लगाई रोक

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले साल व्यापारियों द्वारा पटाखों के भंडारण के बाद प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए देर से पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया, जिससे व्यापारियों को नुकसान हुआ था. सभी व्यापारियों से अपील है कि इस बार पूर्ण प्रतिबंध को देखते हुए किसी भी तरह का भंडारण न करें.

दस साल पुराने डीजल वाहनों का पंजीकरण रद्द करने संबंधी आदेश में संशोधन नहीं: एनजीटी

हरियाणा के सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध स्कूलों के संघ हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस ने अपनी याचिका में एनजीटी के आदेशों में संशोधन करने का अनुरोध किया गया था. एनजीटी ने साल 2015  में दस साल पुराने डीजल वाहनों का पंजीकरण रद्द करने का निर्देश दिया था.

बढ़ते समुद्र, घटते ग्लेशियर; लगभग 100 प्रतिशत ग्लोबल वार्मिंग का कारण इंसान: यूएन जलवायु समिति

जलवायु परिवर्तन पर आई आईपीसीसी की हालिया रिपोर्ट बताती है कि अगर पृथ्वी के जलवायु को जल्द स्थिर कर दिया जाए, तब भी जलवायु परिवर्तन के कारण जो क्षति हो चुकी है, उसे सदियों तक भी ठीक नहीं किया जा सकेगा. आईपीसीसी इस बात की पुष्टि करता है कि 1950 के बाद से अधिकांश भूमि क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी, हीटवेव और भारी बारिश भी लगातार और तीव्र हो गई है. संयुक्त राष्ट्र ने इसे ‘मानवता के लिए कोड रेड’ क़रार दिया है.

उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों के कारण हो रहा है अत्यधिक वायु प्रदूषण: एनजीटी

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने उत्तर प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर चीनी मिलों के कारण अत्यधिक वायु प्रदूषण होने की वजह से पर्यावरण का अनियंत्रित क्षरण होने के मद्देनज़र उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इसके समाधान के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है.

स्वच्छ वातावरण नागरिकों का मूल अधिकार, सरकारें धन न होने का बहाना नहीं बना सकतीं: एनजीटी

एनजीटी ने कोटद्वार में खोह नदी के किनारे अवैध रूप से बनाए गए कचरा स्थल को लेकर उत्तराखंड सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वैधानिक नियमों के उल्लंघन के लिए राज्य के शहरी विकास सचिव सहित इसके वरिष्ठ अधिकारियों के ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई का मामला बनता है.

टाटा लिटफेस्ट में सेशन रद्द होने पर नॉम चोम्स्की और विजय प्रसाद ने पूछा- क्या ये सेंसरशिप है

भाषाविद और नामचीन लेखक नॉम चोम्स्की और पत्रकार विजय प्रसाद को शुक्रवार को ‘टाटा लिटरेचर लाइव फेस्टिवल’ में एक सेशन में चोम्स्की की नई किताब पर चर्चा करनी थी, जिसे ऐन समय पर आयोजकों द्वारा ‘अप्रत्याशित परिस्थितियों’ का हवाला देते हुए रद्द कर दिया गया था.

Amritsar: Smoke rises as a farmer burns paddy stubbles at a village on the outskirts of Amritsar, Friday, Oct 12, 2018. Farmers are burning paddy stubble despite a ban, before growing the next crop. (PTI Photo) (PTI10_12_2018_1000108B)

उत्तर प्रदेश: फतेहपुर में पराली जलाने के आरोप में दो दिन के भीतर 60 किसानों के ख़िलाफ़ केस दर्ज

पुलिस विभाग के आंकड़ों से अलग राजस्व विभाग की ओर से बताया गया है कि फतेहपुर ज़िले में कुल 28 किसानों के ख़िलाफ़ पराली जलाने पर कार्रवाई कर जुर्माना वसूला गया है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि लेखपालों की तहरीर पर मुकदमे दर्ज किए गए और एक पखवाड़े के भीतर 100 से ज़्यादा किसानों से जुर्माना वसूला जा चुका है.

बिहार: फ्लोराइड से बर्बाद होती पीढ़ियां चुनावी मुद्दा क्यों नहीं है

ग्राउंड रिपोर्ट: गया शहर से 8 किलोमीटर दूर चूड़ी पंचायत के चुड़ामननगर में कमोबेश हर परिवार में कम से कम एक व्यक्ति पानी से मिले फ्लोराइड के चलते शरीर में आई अक्षमता से प्रभावित है. बड़े-बड़े चुनावी वादों के बीच इस क्षेत्र के लोगों को साफ़ पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी मयस्सर नहीं है.