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भारत में 50 साल में प्रचंड गर्मी से 17,000 से अधिक लोगों की मौत: अध्ययन

देश के शीर्ष मौसम वैज्ञानिकों द्वारा प्रकाशित शोध पत्र में कहा गया है कि लू अति प्रतिकूल मौसमी घटनाओं में से एक है. अध्ययन के मुताबिक, 1971-2019 में ऐसी ने 141,308 लोगों की जान ली है. इनमें से 17,362 लोगों की मौत लू की वजह से हुई है. लू से अधिकतर मौत आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में हुईं.

भारतीय विज्ञान संस्थान अन्य स्थानों पर स्थापित करने की कोई योजना नहीं: शिक्षा मंत्री

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी. उनसे सवाल किया गया था कि क्या एम्स, आईआईटी और एनआईटी की तर्ज पर भारतीय विज्ञान संस्थान को भी अधिक से अधिक स्थानों पर स्थापित करने की कोई योजना है?

उन्मादी भीड़ के ख़िलाफ़ खड़े अकेले व्यक्ति ने ही इतिहास की धारा मोड़ी है…

समाज या विज्ञान को देखें, तो बार-बार इस बात से रूबरू होंगे कि चीज़ें इसीलिए बदल सकीं कि चंद लोगों ने पहले से चली आ रही गति की दिशा को लेकर प्रश्न किए और नतीजन वे अक्सर अकेले ही इस लड़ाई को लड़ते हुए दिखाई दिए.

होम्योपैथी के ज़रिये कोविड-19 से बचाव का दावा राहत नहीं चिंता की बात है

देश में कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर में आयुष मंत्रालय द्वारा जारी एक परामर्श में आर्सेनिकम एल्बम 30 C नाम की होम्योपैथिक दवा को दिन में तीन बार लेने की सलाह दी गई थी. लेकिन शोध बताते हैं कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता कि होम्योपैथी कोविड या किसी भी अन्य मर्ज़ के ख़िलाफ़ कोई सुरक्षा प्रदान करती है.

पैट्रिक मैथ्यू, जो डार्विन से पहले प्राकृतिक चयन के सिद्धांत तक पहुंचे थे

चार्ल्स डार्विन ने 1859 में प्राकृतिक चयन पर अपनी किताब दुनिया के सामने पेश की थी, लेकिन उनसे कुछ साल पहले ही स्कॉटलैंड के पैट्रिक मैथ्यू इस सिद्धांत तक पहुंच चुके थे. इस बात को ख़ुद डार्विन ने भी माना था, पर इतिहास मैथ्यू को इसका उचित श्रेय नहीं दे सका.

कोरोना वायरस: ताकि लोकतंत्र की उम्मीदें कायम रहें…

इतिहास से अगर कुछ साबित होता है तो सिर्फ़ यही कि आधुनिक राज्य आम तौर पर हुकूमत करने के लिए और ख़ास तौर पर दमन करने के लिए जो तरीके अपनाता है, किस तरह उनकी जड़ें महामारियों से निपटने के उपायों तक भी जाती हैं.

नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने कहा, डगमगाती स्थिति में है भारतीय अर्थव्यवस्था

अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने कहा कि भारत में एक बहस चल रही है कि कौन सा आंकड़ा सही है और सरकार का खासतौर से यह मानना है कि वो सभी आंकड़े गलत हैं, जो असुविधाजनक हैं.

भारतीय-अमेरिकी अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी समेत तीन लोगों को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार

इन तीनों अर्थशास्त्रियों को वैश्विक गरीबी कम करने की दिशा में दिए किए गए उनके शोध के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया है. बनर्जी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है.

साल 2018, 2019 के लिए ओल्गा तोकार्चुक और पीटर हंडके को साहित्य का नोबेल

यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते साल 2018 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार नहीं दिया गया था. इन आरोपों की वजह से स्वीडिश अकादमी के बोर्ड के कुछ सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था. इसलिए साल 2018 का भी नोबेल पुरस्कार इस साल दिया गया है.

लीथियम आयन बैटरी पर काम करने के लिए तीन वैज्ञानिकों को रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार

तीनों वैज्ञानिकों जॉन गुडइनफ, एम. स्टेनली व्हिटिंघम और असाही कासेई को लीथियम आयन बैटरी का विकास करके स्मार्टफोन और पेट्रोल-डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन मुक्त समाज का रास्ता साफ करने के लिए साल 2019 का रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने का ऐलान किया गया.

तीन ब्रह्मांड वैज्ञानिकों ने भौतिकी का नोबेल पुरस्कार जीता

जेम्स पीबल्स, माइकल मेयर और डीडियर क्वेलोज को ब्रह्मांड के फैलाव और इसमें पृथ्वी के स्थान को समझने में योगदान के लिए साल 2019 के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है.

कोशिका अनुसंधान के लिए तीन वैज्ञानिकों को चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार

तीन वैज्ञानिकों विलियम जी. केलिन, पीटर जे. रेटक्लिफ और ग्रेग एल. सेमेंजा ने खोज कर बताया कि किस तरह से शरीर की कोशिकाएं ऑक्सीजन को महसूस करती हैं.

भारत 2021 तक अंतरिक्ष में मानव को भेजेगा: इसरो प्रमुख

इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि चंद्रयान-2 के ‘लैंडर’ विक्रम को चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ कराने की इसरो की योजना बेशक पूरी नहीं हो सकी हो लेकिन इसका ‘गगनयान’ मिशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

मीडिया बोल: चंद्रयान-2 पर खेलती सियासत और मीडिया

चांद पर उतरते समय चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ से इसरो का संपर्क टूट गया था. मीडिया बोल के इस अंक में इससे जुड़े मीडिया कवरेज पर वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश दिल्ली साइंस फोरम के वैज्ञानिक डी. रघुनंदन और खगोल वैज्ञानिक अमिताभ पांडेय से चर्चा कर रहे हैं.

चांद की सतह पर टकराने से झुका लैंडर विक्रम, लेकिन पूरी तरह सलामत: इसरो

इसरो ने कहा कि ‘चंद्रयान-2’ का लैंडर ‘विक्रम’ चांद की सतह पर साबुत अवस्था में है और यह टूटा नहीं है. हालांकि, ‘हार्ड लैंडिंग’ की वजह से यह झुक गया है तथा इससे पुन: संपर्क स्थापित करने की हरसंभव कोशिश की जा रही है.