USA

ऑस्ट्रेलिया: कंज़र्वेटिव गठबंधन 9 साल बाद सत्ता से बाहर, लेबर पार्टी के अल्बानीस होंगे पीएम

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन चुनाव में हार स्वीकार कर चुके हैं, जिसके बाद लेबर पार्टी के एंथनी अल्बानीस का प्रधानमंत्री बनना तय है. हालांकि कुछ मतों की गिनती अब भी जारी है. लेबर पार्टी ने 2007 के बाद पहली चुनावी जीत हासिल की है.

श्रीलंका में वित्तीय संकट के भारत के लिए क्या निहितार्थ हैं

श्रीलंका में चल रहे आर्थिक और राजनीतिक संकट के भारत के लिए कई व्यावसायिक प्रभाव हैं. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत इस अवसर का उपयोग उसके साथ अपने राजनयिक संबंधों को संभालने के लिए कर सकता है, जो श्रीलंका की चीन के साथ नज़दीकी के चलते प्रभावित हुए हैं.

भारत ने रूस के साथ संबंध बनाए, क्योंकि अमेरिका पहले ऐसा नहीं कर सका: एंटनी ब्लिंकन

अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि भारत ने अपनी ज़रूरतों के चलते रूस के साथ साझेदारी की थी, क्योंकि अमेरिका ऐसा करने की स्थिति में नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय नेतृत्व के साथ सीधे जुड़ने के लिए काफी प्रयास किए हैं.

बिलावल भुट्टो-ज़रदारी बने पाकिस्तान के नए विदेश मंत्री

2018 में पहली बार निर्वाचित होकर नेशनल एसेंबली पहुंचने वाले पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत बेनज़ीर अली भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो-ज़रदारी को पहली बार सरकार में विदेश मंत्री जैसा बेहद महत्वपूर्ण पद सौंपा गया है.

भारत के भुगतान संतुलन की स्थिति को लेकर निश्चिंत होकर बैठ जाना सही नहीं होगा

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अच्छा-ख़ासा है, लेकिन बीते कुछ सप्ताह से इसमें धीरे-धीरे गिरावट आती जा रही है. 9 अप्रैल को ख़त्म हुए हफ्ते में भारत के रिज़र्व बैंक के मुद्रा भंडार में 11 अरब अमेरिकी डॉलर की कमी आई और यह गिरकर 606 अरब डॉलर का रह गया.

क्या दुनियाभर में मंदी के साथ महंगाई का खौफ़नाक दौर बस आने को है

वैश्विक अर्थव्यवस्था में होने वाली किसी भी हलचल की सूरत में भारत को ख़राब स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना पड़ेगा क्योंकि अब यह व्यापार, निवेश और वित्त में कहीं अधिक वैश्वीकृत हो चुका है. आज यहां यूएस फेडरल रिज़र्व की कार्रवाइयां भारतीय रिज़र्व बैंक की तुलना में अधिक असर डालती हैं.

रूस-यूक्रेन संघर्ष: तेल के बढ़ते दाम और रुपये की गिरावट के बीच सरकार के पास क्या उपाय हैं?

भारत को ख़ुद को ऊर्जा बाज़ार में लंबे व्यवधान और मुद्रा की कमज़ोरी का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि इनका आर्थिक विकास, आजीविका और रोज़गार पर गंभीर असर होगा.

वैश्विक मुद्रास्फीति, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नई नीतियां अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकती हैं

अमेरिका में लगातार बनी रहने वाली उच्च मुद्रास्फीति भारत जैसे विकासशील देशों के आर्थिक प्रबंधन में बड़े व्यवधान का कारण बन सकती है.

26/11 के 13 साल बाद भी आतंकवादियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने में विफल पाकिस्तान

भारत ने इस बात के पर्याप्त प्रमाण दिए हैं कि 26/11 के मुंबई आतंकी हमले की साज़िश पाकिस्तान में रची गई थी. यह मामला पाकिस्तान में बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रहा है और भारत द्वारा आरोपित प्रमुख आतंकवादी ठोस सबूतों के बावजूद तेरह साल बाद भी आज़ाद घूम रहे हैं.

भारतीय क्रिकेट टीम के ‘घुटने के बल खड़े होने’ में असल में कितना प्रतिरोध छिपा है

भारतीय क्रिकेट टीम के एकमात्र मुस्लिम खिलाड़ी के समर्थन में साथी खिलाड़ियों के वक्तव्यों की एक सीमा थी, वे उन्हें इस प्रसंग को भूल जाने और अगले मैच में अपनी कला का जौहर दिखाने के लिए ललकार रहे थे, पर किसी ने भी इस पर मुंह नहीं खोला कि पूरे मुल्क में एक समुदाय के ख़िलाफ़ किस तरह ज़हर फैलाया जा रहा है, जिसके निशाने पर अब कोई भी आ सकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

मार्टिना नवरातिलोवा की चुटकी देश के ‘नायकों’ की अंतरराष्ट्रीय ‘प्रतिष्ठा’ की बानगी है

गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘तानाशाह’ होने के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि देश में उनसे ज़्यादा लोकतांत्रिक नेता हुआ ही नहीं है, जिस पर अमेरिका की प्रख्यात टेनिस खिलाड़ी मार्टिना नवरातिलोवा ने चुटकी ली थी. 

किस हाल में है नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आई ढेरों रिपोर्ट्स में एक समान बात यह है कि भारत में नरेंद्र मोदी के शासन में मानवाधिकार समूहों पर दबाव बढ़ा है, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को धमकाया गया है और मुसलमानों के प्रति घृणा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इस तरह के अभियान की प्रेरणा जो भी हो, मानवाधिकारों के इन उल्लंघनों के बारे में कुछ करने की ज़रूरत है.

अमेरिकी नेतृत्व की बहाली पर जो बाइडन का दांव

अपने पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप के अंतर्मुखी एकपक्षीय रवैये की जगह जो बाइडन का बहुपक्षीयता पर ज़ोर देना दिखाता है कि उनके नेतृत्व में अमेरिका सबको साथ लेकर दुनिया की अगुआई करना चाहता है. मानवाधिकार और क़ानून के शासन को लेकर प्रतिबद्धता के साथ ब्रांड अमेरिका की मरम्मत बाइडन की टीम की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक है.

शोक में साथ होना हमें एक करता है…

जब हम उन लोगों के लिए और उनके साथ शोक मनाते हैं जो हमारे धर्म, भाषा और रंग के नहीं होते, तब हम उनकी कमज़ोरी और दुख के साथ ख़ुद को जोड़ते हैं. शोक संवेदना से सहभागिता का जन्म होता है. जब हम किसी के साथ शोक प्रकट करते हैं तो उनके जीवन की ज़िम्मेदारी लेते हैं. यह खोखला काम नहीं हो सकता.

क्या इज़राइली यहूदीवाद और भारतीय हिंदुत्व में कोई अंतर नहीं रह गया है

शुरुआत में भारत ने नव-उपनिवेशवाद और इज़राइल द्वारा फ़िलिस्तीनी ज़मीन के अतिक्रमण की मुखर तौर पर निंदा की, लेकिन यह विरोध धीरे-धीरे कम हो गया. भारत का रुख कमज़ोर हुआ क्योंकि इज़राइल के साथ आर्थिक और सैन्य संबंध जुड़ गए. अब ये रिश्ते हिंदुत्व व यहूदीवाद की लगभग समान विचारधारा पर फल-फूल रहे हैं.