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अपूर्वानंद

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‘मुसलमान औरतें सोच सकती हैं’

वीडियो: नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में नई दिल्ली के शाहीन बाग़ समेत देशभर में चल रहे प्रदर्शनों में महिलाओं की भागीदारी को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अपूर्वानंद का नज़रिया.

फोटो: रॉयटर्स

हिंसा अदालत को सोचने से रोक रही है, लेकिन हिंसा हो कैसे रही है?

हिंसा के सबसे ज्यादा, सबसे ताकतवर और कारगर हथियार किसके पास हैं? किसके पास एक संगठित शक्ति है जो हिंसा कर सकती है? उत्तर प्रदेश में किसने आम शहरियों के घर-घर घुसकर तबाही की? किसने कैमरे तोड़कर चेहरे ढंककर लोगों को मारा? गोलियां कहां से चलीं? अदालत से यह कौन पूछे और कैसे? जब उसके पास ये सवाल लेकर जाते हैं तो वह हिंसा से रूठ जाती है.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय. (फोटो: शोम बसु)

क्या जेएनयू आपका दुश्मन है?

वीडियो: बीते पांच जनवरी को देर शाम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हुई हिंसा के संबंध में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद का नज़रिया.

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नागरिकता कानून: मुसलमान का सवाल क्या सिर्फ़ उनका सवाल है?

वीडियो: नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं. इन विरोध प्रदर्शनों को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद का नज़रिया.

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हिंदू धर्म का अपहरण

वीडियो: राजनीतिक दलों द्वारा अपने फायदे के लिए धर्म की राजनीति को बढ़ावा देने के बारे में बता रहे हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद.

Photo taken during the trial of the persons accused of participation and complicity in Mahatma Gandhi’s assassination in a Special Court in Red Fort, Delhi. The trial began on May 27, 1948. V.D. Savarkar, wearing a black cap, is seated in the last row, while Nathuram Godse and Narayan Apte are up front. Credit: Photo Division, GOI

गोडसे ही नहीं, सावरकर पर भी बात होनी चाहिए

वीडियो: भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर के लोकसभा में नाथूराम गोडसे को एक बार फिर से देशभक्त कहने पर विवाद हुआ है. इस विवाद पर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद का नज़रिया.

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अयोध्या के फ़ैसले पर दोबारा विचार करे अदालत

वीडियो: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादित ज़मीन पर मुस्लिम पक्ष का दावा ख़ारिज करते हुए हिंदू पक्ष को ज़मीन देने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से हिंदुस्तान की राजनीति और समाज में क्या बदलाव आएगा, इस पर चर्चा कर रहे हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद.

प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

यह प्रार्थना पर नहीं बल्कि हिंदू समाज के दिलो-दिमाग के सिकुड़ने पर दुख मनाने का वक़्त है

विश्व हिंदू परिषद ने पीलीभीत के एक प्राथमिक विद्यालय के हेडमास्टर पर राष्ट्रगान की जगह इक़बाल की प्रार्थना गवाने का आरोप लगाया. उनसे शिकायत नहीं पर जिलाधीश से है. उन्होंने जिस प्रार्थना के लिए हेडमास्टर को दंडित किया, क्या उसके बारे में उन्हें कुछ मालूम नहीं? क्या अब हम ऐसे प्रशासकों की मेहरबानी पर हैं जो विश्व हिंदू परिषद का हुक्म बजाने के अलावा अपने दिल और दिमाग का इस्तेमाल भूल चुके हैं?

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राजोआना को फांसी से राहत और राजकीय क्षमा पर कुछ विचार

वीडियो: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआना को मिली फांसी की सज़ा उम्रक़ैद में बदल दी गई है. इस मुद्दे पर प्रो. अपूर्वानंद का नज़रिया.

Young girls dressed as Kumari sit in front of the idols of Hindu goddess Durga before being worshipped as part of a ritual during the Durga Puja festival celebrations at a pandal in Kolkata (Image: Reuters)

दुर्गा पूजा में राम की जयकार के क्या मायने हैं?

दुर्गा अब राष्ट्रवाद की गुलाम बना ली गई हैं. फिर उनसे वही काम लिया जा रहा है, जो कभी डरपोक-कपटी देवताओं ने उनकी आड़ में महिषासुर पर वार करके लिया था. अब दुर्गा की आड़ में आक्रमण मुसलमानों पर किया जा रहा है और हम, जो खुद को दुर्गा का भक्त कहते हैं, यह होने दे रहे हैं.

भगत सिंह (फोटो: द वायर)

भगत सिंह को गांधी या नेहरू का विकल्प बताना भगत सिंह के साथ अन्याय करना है

ऐसा लगता है कि भगत सिंह के प्रति श्रद्धा वास्तव में गांधी-नेहरू से घृणा का दूसरा नाम है. जिनके वैचारिक पूर्वज ख़ुद को बचाते हुए अपने अनुयाइयों को भगत सिंह से दूर रहने की सलाह देते हुए दिन गुज़ारते रहे, उन्होंने अपनी कायर हिंसा को उचित ठहराने के लिए आज भगत सिंह को एक ढाल बना लिया है.

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एनआरसी: भारत से किस-किसको बाहर करोगे?

वीडियो: असम में भारतीय नागरिकों की पहचान करने के लिए एनआरसी की अंतिम सूची प्रकाशित कर दी गई. राज्य के 19 लाख से अधिक लोग एनआरसी की अंतिम सूची से बाहर कर दिए गए हैं. इस मुद्दे पर प्रोफेसर अपूर्वानंद का नज़रिया.

Residents cross a street during restrictions in Srinagar. (Photo:Reuters)

आप कश्मीरियों को आंख दिखा सकते हैं, उनकी आंखों में देखकर बात करने का साहस नहीं रहा

जिन पर फैसले का असर होने वाला हो, उन्हें अंधेरे में रखकर लिया गया कोई भी निर्णय किसी भी तर्क से उनके हित में नहीं हो सकता. अपनी सैन्य शक्ति के बल पर अभिभावकत्व हासिल करना आपके दावे को किसी भी तरह जायज़ नहीं बना सकता.