Cinema

राजेश जैस.

‘स्कैम 92’ इस बात का उदाहरण है कि बिना गंदगी दिखाए भी वेब सीरीज़ बन सकती है: राजेश जैस

90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए धारावाहिक ‘शांति’ से चर्चा में आए अभिनेता राजेश जैस हाल ही में ‘स्कैम 92’, ‘पाताललोक’ और ‘पंचायत’ जैसी वेब सीरीज़ में नज़र आ चुके हैं. उनसे प्रशांत वर्मा की बातचीत.

सौमित्र चटर्जी. (फोटो साभार: ट्विटर/@AbidAli80781312)

अलविदा अपु… बंगाल के प्रख्यात अभिनेता सौमित्र चटर्जी का निधन

85 वर्षीय सौमित्र चटर्जी कोविड संक्रमित होने के बाद क़रीब एक महीने से कई बीमारियों के चलते अस्पताल में भर्ती थे. सत्यजीत रे की अपुर संसार से फिल्मी सफर शुरू करने वाले चटर्जी को पद्मभूषण समेत ढेरों राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था.

गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख़्तर. (फोटो: पीटीआई)

गीतकार जावेद अख़्तर ने अभिनेत्री कंगना रनौत के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई

गीतकार जावेद अख़्तर ने अदालत से शिकायत में कहा है कि कंगना रनौत ने उनके ख़िलाफ़ निराधार टिप्पणयां की हैं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है. उन्होंने अभिनेत्री के ख़िलाफ़ मानहानि संबंधी धाराओं में कार्रवाई करने का आग्रह किया है.

नूरजहां (जन्म: 21 सितंबर 1926- अवसान- 23 दिसंबर 2000) (फोटो साभार: The Citizens Archive of Pakistan)

नूरजहां: गाएगी दुनिया गीत मेरे…

मंटो नूरजहां को लेकर कहते थे, ‘मैं उसकी शक्ल-सूरत, अदाकारी का नहीं, आवाज़ का शैदाई था. इतनी साफ़-ओ-शफ़्फ़ाफ आवाज़, मुर्कियां इतनी वाज़िह, खरज इतना हमवार, पंचम इतना नोकीला! मैंने सोचा अगर ये चाहे तो घंटों एक सुर पर खड़ी रह सकती है, वैसे ही जैसे बाज़ीगर तने रस्से पर बग़ैर किसी लग्ज़िश के खड़े रहते हैं.’

कंगना रनौत. (फोटो साभार: फेसबुक/@TeamKanganaRanautOfficial)

कंगना रनौत को फेमिनिज़्म के बारे में अभी बहुत कुछ सीखने की ज़रूरत है

कंगना रनौत का एक साथी महिला कलाकार के काम को नकारते हुए उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास और घर गिराए जाने की तुलना बलात्कार से करना दिखाता है कि फेमिनिज़्म को लेकर उनकी समझ बहुत खोखली है.

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बॉलीवुड में हिंदी का चेहरा: आशुतोष राना

वीडियो: मध्य प्रदेश के गाडरवारा में जन्मे आशुतोष राना रामलीला के किरदारों से अपनी जगह बनाते हुए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के गलियारों तक पहुंचे और साल 1995 में टीवी धारावाहिक ‘स्वाभिमान’ से बतौर फिल्मी अभिनेता बने. इन्होंने हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मराठी फिल्में भी कीं. इसके अलावा कुछ किताबें लिखी हैं. उनसे द वायर की दामिनी यादव की बातचीत.

परेश रावल. (फोटो साभार: एएनआई)

भाजपा के पूर्व सांसद और अभिनेता परेश रावल राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अध्यक्ष नियुक्त

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) का अध्यक्ष पद साल 2017 से ख़ाली था. इस पद पर परेश रावल की​ नियुक्ति चार वर्षों के लिए की गई है.

जय प्रकाश रेड्डी. (फोटो साभार: ट्विटर)

तेलुगू रंगमंच और फिल्म अभिनेता जय प्रकाश रेड्डी का निधन

जय प्रकाश रेड्डी को तेलुगू फिल्मों में निभाए गए उनके हास्य और विलेन के किरदारों के लिए जाना जाता है. आंध्र प्रदेश के गुंटूर स्थित उनके घर पर हृदय गति रुकने की वजह से उनका निधन हुआ. वह 74 वर्ष के थे.

(फोटो: रॉयटर्स)

मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन, फिल्म निर्माताओं ने केंद्र से सिनेमाघरों को खोलने की मांग की

मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से कहा गया है कि सिनेमा उद्योग देश की संस्कृति का न सिर्फ अंतर्निहित हिस्सा है, बल्कि अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा भी है जिससे लाखों लोगों की आजीविका चलती है.

चाडविक बोसमैन. (फोटो: रॉयटर्स)

‘ब्लैक पैंथर’ का किरदार निभाने वाले अमेरिकी अभिनेता चाडविक बोसमैन का कैंसर से निधन

अमेरिका की फिल्म निर्माण कंपनी मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स की 2018 में आई फिल्म ‘ब्लैक पैंथर’ में अभिनेता चाडविक बोसमैन ने पहले अश्वेत सुपर हीरो का किरदार निभाया था, जिसने दुनिया भर में एक अरब डॉलर से ज़्यादा का कारोबार किया था.

कंगना रनौत. (फोटो साभार: फेसबुक/@TeamKanganaRanautOfficial)

अगर मॉडर्न इंडिया ने जातिवाद को नकार दिया है, तो ऊंचे पदों पर दलित क्यों नहीं हैं

बीते रविवार को अभिनेत्री कंगना रनौत ने ट्विटर पर भारत में जाति-व्यवस्था, आरक्षण और भेदभाव को लेकर टिप्पणियां की थीं.

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गांव का विकास हो और वहीं रोज़गार मिले तो आदमी शहर क्यों जाएगा: पंकज त्रिपाठी

वीडियो: नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म गुंजन सक्सेना में गुंजन के पिता का रोल निभाने वाले अभिनेता पंकज त्रिपाठी से नम्रता जोशी की बातचीत.

निशिकांत कामत. (फोटो साभार: ट्विटर)

‘दृश्यम’ और ‘मदारी’ जैसी फिल्मों के निर्देशक निशिकांत कामत का निधन

फिल्म निर्देशक और अभिनेता निशिकांत कामत को पिछले दो साल से लिवर सिरोसिस बीमारी थी. कामत ने साल 2005 में ‘डोंबिवली फास्ट’ से फिल्म निर्देशन का सफ़र शुरू किया था. इस फिल्म को मराठी भाषा में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है.

फिल्म गर्म हवा का एक दृश्य. (फोटो साभार: ट्विटर)

भारतीय फिल्मों में कभी अल्पसंख्यकों को सही तरह से दिखाया ही नहीं गया: एमएस सथ्यू

साक्षात्कार: भारतीय उपमहाद्वीप के बंटवारे का जो असर समाज पर पड़ा, उसकी पीड़ा सिनेमा के परदे पर भी नज़र आई. एमएस सथ्यू की ‘गर्म हवा’ विभाजन पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक है. इस फिल्म समेत सथ्यू से उनके विभिन्न अनुभवों पर द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ भाटिया की बातचीत.