Cinema

फिल्म निर्देशक तनुजा चंद्रा. (फोटो साभार: फेसबुक/@MumbaiFilmFestival)

आज भी महिला प्रधान फिल्में बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है: तनुजा चंद्रा

साक्षात्कार: दुश्मन, संघर्ष, सुर: द मेलोडी ऑफ लाइफ और क़रीब-क़रीब सिंगल जैसी फिल्में बनाने वाली निर्देशक तनुजा चंद्रा से प्रशांत वर्मा की बातचीत.

ख़य्याम. (फोटो: पीटीआई)

ख़य्याम की धुनें कहानी का मुकम्मल किरदार हैं…

ख़य्याम ने जितनी फिल्मों के लिए काम किया उससे कहीं ज़्यादा फिल्मों को मना किया. एक-एक गाने के लिए वो अपनी दुनिया में यूं डूबे कि जब ‘रज़िया सुल्तान’ की धुन बनाई तो समकालीन इतिहास में तुर्कों को ढूंढा और और ‘उमराव जान’ के लिए उसकी दुनिया में जाकर अपने साज़ को आवाज़ दी.

फोटो साभार: फेसबुक/एजाज़ खान

जिस कश्मीरी बाल कलाकार को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, उसे ख़बर तक नहीं

हामिद फिल्म के निर्देशक ने बताया कि जम्मू कश्मीर में संचार के माध्यम बंद होने के चलते फिल्म के मुख्य कलाकार तल्हा अरशद रेशी से संपर्क नहीं हो सका है. रेशी को हामिद फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया गया है.

Girish karnad Photo Oxford Uni Press

गिरीश कर्नाड: पड़ोसी से मार्गदर्शक और मार्गदर्शक से सहकर्मी तक…

गिरीश कर्नाड हमारे बीच से उतनी ही शांतिपूर्ण गरिमा और ईमानदारी के साथ विदा हो गए, जिस तरह से उन्होंने अपना जीवन जिया.

दिनयार कॉन्ट्रैक्टर. (फोटो साभार:​ ट्विटर)

जाने-माने अभिनेता दिनयार कॉन्ट्रैक्टर का निधन

अक्षय कुमार की फिल्म ‘खिलाड़ी’ और शाहरुख खान की फिल्म ‘बादशाह’ के अलावा दिनयार कॉन्ट्रैक्टर फिल्म ‘चोरी-चोरी चुपके-चुपके’, ‘दरार’ और ‘36 चाइना टाउन’ में नज़र आ चुके थे. इस साल जनवरी में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था.

अभिनेता, लेखक और नाटककार मानव कौल. (फोटो: फेसबुक)

संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करता है, उसे दांव पर नहीं लगाया जा सकता: मानव कौल

वीडियो: अभिनेता, लेखक और नाटककार मानव कौल और ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’ फिल्म के निर्देशक सौमित्र रानाडे से प्रशांत वर्मा की बातचीत.

Lathepora: Security personnel carry out the rescue and relief works at the site of suicide bomb attack at Lathepora Awantipora in Pulwama district of south Kashmir, Thursday, February 14, 2019. At least 30 CRPF jawans were killed and dozens other injured when a CRPF convoy was attacked. (PTI Photo/S Irfan)  (PTI2_14_2019_000167B)

बॉलीवुड निर्माताओं में मची अभिनंदन, बालाकोट, पुलवामा जैसे फिल्म टाइटल रजिस्टर कराने की होड़

फिल्मों के नाम रजिस्टर करने वाली संस्था इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन में फरवरी के आख़िरी सप्ताह में बड़ी संख्या में पुलवामा आतंकी हमले, बालाकोट एयर स्ट्राइक और भारतीय वायुसेना के पायलट अभिनंदन से जुड़े टाइटल रजिस्टर कराने के आवेदन किए गए.

Manikarnika Film FB

मणिकर्णिका में आज के उग्र-राष्ट्रवाद का अक्स है

बॉलीवुड भले ही अवसरवादी और रीढ़विहीन नज़र आता हो लेकिन अलग-अलग नज़रिया रखने वाले इसके सदस्य अपने देश की मार्केटिंग और उससे पैसे बनाने के मामले में एक-दूसरे से कोई मतभेद रखते नहीं दिखते.

फिल्मकार मृणाल सेन (बीच में) और उनकी फिल्म ‘भुवन शोम’ और ‘कलकत्ता 71’ का पोस्टर.

मृणाल सेन का सिनेमा संसार

मृणाल सेन का सिनेमा कलात्मक और बौद्धिक संवेदना का नायाब संयोजन था. वह चाहते थे कि सिनेमा उपेक्षितों के पास और सुदूर देहातों में पहुंचे. उन्हें ‘नए सिनेमा’ से यह उम्मीद थी. उनकी फिल्म देखने के बाद बहुत देर तक उसकी छवियां बेताल की तरह सिर पर नाचती रहती हैं.

एक नाटक के दौरान नसीरुद्दीन शाह (फोटो साभार: फेसबुक/Motley Theater)

भारत को नसीरुद्दीन शाह जैसे और लोगों की ज़रूरत है

जहां बॉलीवुड के अधिकतर अभिनेता सच से मुंह मोड़ने और चुप्पी ओढ़ने के लिए जाने जाते हैं, वहीं मुखरता नसीरुद्दीन शाह की पहचान रही है. उनका व्यक्तित्व उन्हें फिल्म इंडस्ट्री की उस भीड़ से अलग करता है, जिसके लिए शक्तिशाली की शरण में जाना, गिड़गिड़ाते हुए माफ़ी मांगना और कभी भी मन की बात न कहना एक रिवाज़-सा बन चुका है.

Faiyaz Adil IV.00_59_57_39.Still004 (1)

मुझे अपनी मिडिल क्लास मानसिकता से बाहर आने में 40 साल लग गए: आदिल हुसैन

वीडियो: ‘लाइफ ऑफ पाई’, ‘ज़ेड प्लस’, ‘इंग्लिश विंग्लिश’, ‘इश्क़िया’, ‘मुक्ति भवन’ और ‘ह्वॉट विल पीपल से’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके अभिनेता आदिल हुसैन के साथ फ़ैयाज़ अहमद वजीह की बातचीत.

Mohd Aziz Photo Pinterest

एक उदास और ख़ाली दौर में अज़ीज़ की आवाज़ सावन की तरह थी

मोहम्मद अज़ीज़ के कई गानों में अमीरी और ग़रीबी का अंतर दिखेगा. हम समझते हैं कि गायक को गाने संयोग से ही मिलते हैं फिर भी अज़ीज़ उनके गायक बन गए जिन्हें कहना नहीं आया, जिन्हें लोगों ने नहीं सुना.

फिल्म मंटो का पोस्टर. (फोटो साभार: फेसबुक/Manto Film)

नंदिता दास की ‘मंटो’ में मैं मंटो को तलाश करता रहा

मंटो फिल्म में मुझे जो मिला वो एक फिल्म निर्देशक की आधी-अधूरी ‘रिसर्च’ थी, वर्षों से सोशल मीडिया की खूंटी पर टंगे हुए मंटो के चीथड़े थे और इन सबसे कहीं ज़्यादा स्त्रीवाद बल्कि ‘फेमिनिज़्म’ का इश्तिहार था.

vinod dua

‘ज़बान वो ख़त्म होती है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी से न निकली हो’

वीडियो: उर्दू को अवाम तक पहुंचाने में देवनागरी और हिंदी की भूमिका, हिंदी में नुक़्ते के चलन और उर्दू के भविष्य पर विनोद दुआ से द वायर उर्दू के फ़ैयाज़ अहमद वजीह की बातचीत.

अभिनेता केके मेनन. (फोटो साभार: फेसबुक/केके मेनन)

सिनेमा हर वक़्त अच्छे काम को नहीं सराहता: केके मेनन

ब्लैक फ्राइडे, गुलाल और सरकार जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुके अभिनेता केके मेनन ने कहा कि आपके अभिनय को चाहे कितना भी सराहा जाए इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता. फिल्म में बड़े नाम न हो तो सिनेमा देखने कम लोग पहुंचते हैं.

फिल्म बाइस्कोपवाला का एक दृश्य. (फोटो साभार: यूट्यूब)

‘बाइस्कोपवाला के ज़रिये हमने टैगोर की काबुलीवाला की कहानी आज के दौर के हिसाब से कही है’

तकरीबन 150 विज्ञापन फिल्में बना चुके ऐड मेकर देब मेढ़ेकर से उनकी पहली फिल्म बाइस्कोपवाला को लेकर प्रशांत वर्मा की बातचीत.

Sunil Dutt You Tube

सुनील दत्त: एक फिल्मी सितारे से कहीं बड़ी थी उनकी शख़्सियत

जब मुंबई में दंगे भड़के, तब सुनील दत्त ने अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलते हुए संसद से इस्तीफ़ा दे दिया. उनका मानना था कि कांग्रेस ने हालात को सही से नहीं संभाला है और एक सांसद की हैसियत से वे कुछ नहीं कर पा रहे हैं.

(फोटो साभार: ​फॉक्स स्टार स्टूडियो)

फिल्म उद्योग में ‘एलियन’ की तरह हूं: डैनी

रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी ‘काबुलीवाला’ पर आधारित फिल्म ‘बाइस्कोपवाला’ में अभिनेता डैनी डेनजोंग्पा मुख्य किरदार निभा रहे हैं. फिल्म 25 मई को रिलीज़ हो रही है.

अभिनेता संजय मिश्रा. (फोटो सौजन्य: लाउडस्पीकर मीडिया)

मुझे अंडररेटेड एक्टर कहा गया, ओवररेटेड होता तो आउटडेटेड हो चुका होता: संजय मिश्रा

गोलमाल, धमाल, आॅल द बेस्ट, वन टू थ्री, फंस गए रे ओबामा में यादगार किरदार निभाने के बाद आंखों देखी, मसान, कड़वी हवा और अंग्रेज़ी में कहते हैं जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले अभिनेता संजय मिश्रा से प्रशांत वर्मा की बातचीत.

PTI5_3_2018_000193B

हम अनैतिक नहीं हैं क्योंकि हमसे पहले सब अनैतिक हो चुके हैं

पूरब और पश्चिम के गाने को कर्नाटक के संदर्भ में समझते हुए दिखता है कि प्रणय निवेदन हेतु मनोज कुमार के हाथों में एक फाइल है, जिसमें विधायकों के दस्तख़त की कल्पना सहज ही की जा सकती है.

सत्यजीत रे. (फोटो साभार: क्रियेटिव कॉमन्स)

सत्यजीत रे: जिन्होंने परदे पर हीरो नहीं, बल्कि आम आदमी को रचा 

सत्यजीत रे ने देश की वास्तविक तस्वीर और कड़वे सच को बिना किसी लाग-लपेट के ज्यों का त्यों अपनी फिल्मों में दर्शाया. 1943 में बंगाल में पड़े अकाल को उन्होंने ‘पाथेर पांचाली’ दिखाया तो वहीं ‘अशनि संकेत’ में अकाल की राजनीति और ‘घरे बाइरे’ में हिंदुत्ववादी राष्ट्रवाद पर चोट की.

Dada-Sahab-Falke-Bollywood-Googly

दादा साहब फाल्के: सिनेमा की शुरुआत करने वाले की पहचान सिर्फ़ एक अवॉर्ड तक सीमित

जयंती विशेष: 1944 में उनकी एक गुमनाम शख़्स की तरह मौत हो गई जबकि तब तक उनका शुरू किया हुआ कारवां काफी आगे निकल चुका था. फिल्मी दुनिया की बदौलत कुछ शख़्सियतों ने अपना बड़ा नाम और पैसा कमा लिया था. घुंडीराज गोविंद फाल्के को हम आम तौर […]

फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्रा. (फोटो साभार: ट्विटर/@bollywoodsamba)

मेरी फिल्म ‘दासदेव’ पर शरत बाबू का कम, शेक्सपीयर का असर ज़्यादा है: सुधीर मिश्रा

साक्षात्कार: ‘ये वो मंज़िल तो नहीं’, ‘धारावी’, ‘इस रात की सुबह नहीं’, ‘हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी’ जैसी फिल्में बनाने वाले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त निर्देशक सुधीर मिश्रा से प्रशांत वर्मा की बातचीत.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

फिल्म देखने वालों को थियेटर से ही खाने की सामग्री क्यों ख़रीदनी चाहिए: बॉम्बे हाईकोर्ट

महाराष्ट्र के सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्सों में बाहर का खाना ले जाने की मनाही के नियम को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है.

Hrishikesh Mukherji

हृषिकेश मुखर्जी: जिसने सिनेमा के साथ दर्शकों की भी नब्ज़ पढ़ ली थी

हृषिकेश सिनेमा के रास्ते पर आम परिवारों की कहानी की उंगली थामे निकले थे. ये समझाने कि हंसी या आंसुओं को अमीर-गरीब के खांचे में नहीं बांटा जा सकता.

Collage_Pahlaj

‘हमारा देश इतना महान है कि हैदर जैसी भारत-विरोधी फिल्म को भी राष्ट्रीय पुरस्कार मिल जाता है’

साक्षात्कार: सेंसर बोर्ड अध्यक्ष के रूप में पहलाज निहलानी का ढाई साल का कार्यकाल कई तरह के विवादों में रहा. उनसे बातचीत.

gurudutt featured

गुरुदत्त एक अनसुलझा क्रॉसवर्ड है, जिसमें कोई न कोई शब्द पूरा होने से रह ही जाता है

जन्मदिन विशेष: गुरुदत्त फिल्म इंडस्ट्री का एक ऐसा सूरज थे, जो बहुत कम वक़्त के लिए अपनी रौशनी लुटाकर बुझ गया पर सिल्वर स्क्रीन को कुछ यूं छू कर गया कि सब सुनहरा हो गया.

smita patil copy

हिंदुस्तानी सिनेमा में महिला स्वर

सिनेमा निर्माण के इतने दशकों के बाद भी हिंदुस्तानी सिनेमा में महिला निर्देशकों की संख्या को उंगलियों पर गिना जा सकता है. सिनेमाई दुनिया में भी घोर लैंगिक असमानता है.

Tubelight1

जो जंग की बात करे उसे बंदूक देकर मोर्चे पर भेज दो, जंग ख़त्म हो जाएगी: सलमान

युद्ध पर आधारित अपनी आने वाली फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ की प्रेस वार्ता के दौरान सलमान ने कहा जंग में कोई अपना बेटा खोता है तो कोई अपना पिता.

Reema-Lagoo

अभिनेत्री रीमा लागू का निधन

फिल्मों में मां के रूप में निभाए गए उनके किरदारों के लिए जाना जाता है. फिल्म मैंने प्यार किया में सलमान ख़ान और वास्तव में संजय दत्त की मां का किरदार निभा चुकी थीं.

Shiela Cinema 1

रीगल के बाद 56 साल पुराने शीला सिनेमा का भी पर्दा गिरा

फिल्म बाहुबली: द कनक्लूज़न के प्रदर्शन का अधिकार नहीं मिलने के बाद पहले से वित्तीय संकट झेल रहा पुरानी दिल्ली का ऐतिहासिक शीला सिनेमा ने भी अपना पर्दा गिरा दिया.

Vinod Khanna

विनोद खन्ना: मुहब्बत अदावत वफ़ा बेरुखी, किराये के घर थे बदलते रहे

विनोद खन्ना के हिस्से में ज़्यादातर इल्ज़ाम ही आए पर जो ज़िंदगी उन्होंने गुज़ारी, फिल्मी दुनिया की चकाचौंध के बीच उसे चुन पाना बेहद मुश्किल होता है.

Dangal Movie 1

अक्षय को राष्ट्रीय पुरस्कार देने वाले जूरी अध्यक्ष बोले, दंगल सामाजिक मुद्दे पर बात नहीं करती

जूरी अध्यक्ष प्रियदर्शन ने कहा कि जब रमेश सिप्पी ने अमिताभ बच्चन को पुरस्कार दिया था तब किसी ने सवाल नहीं उठाया तो आज मुझ पर सवाल क्यों?

The Wire Hindi Logo

फिल्म इंडस्ट्री ने धमकी और ब्लैकमेलिंग के आगे झुकने की आदत बना ली है

आज ये फिल्मों और किताबों के बारे में है, कल ये पत्रकारिता या किसी और बारे में होगा. आज़ादी में हो रही इस दख़लअंदाज़ी के ख़िलाफ़ खड़ा होना अब ज़रूरी हो गया है.

merrut

क्या आपको पता है कि मेरठ में एक फिल्म इंडस्ट्री भी है?

राजधानी दिल्ली से लगे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर की अपनी फिल्म इंडस्ट्री है जिसे यहां के लोगों ने ‘मॉलीवुड’ नाम दिया हुआ है.

ससुरा बड़ा पइसावाला का पोस्टर. (फोटो साभार: फेसबुक)

भोजपुरी फिल्म फेस्टिवल : अपने ही जाल में उलझा भोजपुरी सिनेमा

बदलते दौर के भौतिक चमक-दमक को तो भोजपुरी सिनेमा खूब दिखाता है, पर सामाजिक -सांस्कृतिक मूल्यों की जड़ता से नहीं भिड़ता. वह एक बड़े विभ्रम का शिकार है.