पहलवान प्रदर्शन: हरियाणा भाजपा के जाट नेता ने कहा- मुद्दे को खींचा गया तो पार्टी को नुकसान होगा

पूर्व केंद्रीय मंत्री और हरियाणा भाजपा के एक प्रमुख जाट नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह ने ​कहा है कि भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ जांच तेज़ और निष्पक्ष होनी चाहिए. जांच के निष्कर्ष शिकायतकर्ताओं के लिए संतोषजनक होने चाहिए. उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि कार्रवाई बिना किसी पूर्वाग्रह के की गई है.

चौधरी बीरेंद्र सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक/Ch. Birender Singh)

पूर्व केंद्रीय मंत्री और हरियाणा भाजपा के एक प्रमुख जाट नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह ने ​कहा है कि भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ जांच तेज़ और निष्पक्ष होनी चाहिए. जांच के निष्कर्ष शिकायतकर्ताओं के लिए संतोषजनक होने चाहिए. उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि कार्रवाई बिना किसी पूर्वाग्रह के की गई है.


चौधरी बीरेंद्र सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक/Ch. Birender Singh)

चंडीगढ़: भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों और देश के शीर्ष पहलवानों द्वारा उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर निरंतर विरोध के बावजूद हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पार्टी के ज्यादातर जाट नेता खुलकर सामने नहीं आए हैं.

जाट समुदाय ने पहलवानों को बढ़ावा दिया है और अब समुदाय से आने वाले नेता पार्टी और खेल के बीच फंस गए हैं.

इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और हरियाणा भाजपा के एक प्रमुख जाट नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह ने बीते शनिवार (3 जून) को द वायर को बताया कि अगर इस मुद्दे को खींचा गया, तो पार्टी को राजनीतिक रूप से नुकसान हो सकता है.

उन्होंने कहा, ‘पार्टी को नुकसान होगा.’

हालांकि उन्होंने अपनी इस बात को विस्तार से नहीं बताया कि पार्टी को किस तरह नुकसान हो सकता है, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ जांच तेज और निष्पक्ष होनी चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘जांच के निष्कर्ष शिकायतकर्ताओं के लिए संतोषजनक होने चाहिए. उन्हें यह भी महसूस होना चाहिए कि कार्रवाई बिना किसी पूर्वाग्रह के की गई है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘भारत में लगभग आधी मतदाता महिलाएं हैं. अगर हम महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं तो हमें उस पर भी काम करना चाहिए.’

उनका बयान कुरुक्षेत्र में एक खाप महापंचायत (जाटों के विभिन्न समुदायों का जमावड़ा) के एक दिन बाद आया है, जिसमें बृजभूषण की गिरफ्तारी की मांग की गई थी और ऐसा करने के लिए सरकार को 9 जून तक का समय दिया गया था.

मालूम हो कि बीते दिनों तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पहलवानों की शिकायत पर बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर का एक कथित हिस्सा साझा करते हुए कहा है कि 2021 में एक पहलवान ने उनके द्वारा उत्पीड़न के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया था, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया.

इतना ही नहीं बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ बीते 28 अप्रैल को दिल्ली पुलिस द्वारा दायर की गई दो एफआईआर में बेहद संगीन आरोपों का जिक्र है.

एक रिपोर्ट में बताया है कि एफआईआर में सिंह के खिलाफ ‘पेशेवर सहायता के बदले’ सेक्सुअल मांग के कम से कम दो मामले; यौन उत्पीड़न की कम से कम 15 घटनाएं, जिनमें गलत तरह से छूने की करीब दस घटनाएं, छेड़छाड़- जिसमें खिलाड़ियों के स्तनों को हाथ लगाना, नाभि को छूना शामिल है; डराने-धमकाने के कई उदाहरण जिनमें पीछा करना भी शामिल है- का जिक्र किया गया है.

ये एफआईआर एक नाबालिग समेत सात महिला पहलवानों की शिकायत पर आईपीसी की संबंधित धाराओं में दर्ज की गई है.

दूसरी एफआईआर में बालिग महिलाओं की शिकायत में भी उन्हें दबोचने, गलत तरह से स्पर्श करने और उनसे जबरदस्ती शारीरिक नजदीकी बनाने की कोशिश की कई घटनाएं दर्ज हैं. कई महिलाओं ने कहा है कि प्रैक्टिस के दौरान सांस लेने का पैटर्न जांचने के बहाने बृजभूषण उनकी छाती और पेट को छूता था.

बहरहाल हरियाणा भाजपा के जाट नेता बीरेंद्र सिंह ने शनिवार को द प्रिंट को दिए एक बयान में कहा कि उन्होंने कर्नाटक विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर उन्हें बताया था कि पहलवानों का मुद्दा गंभीर है.

उन्होंने कहा कि करीब एक हफ्ते बाद उन्होंने नड्डा को उस मुद्दे की भी याद दिलाई, जिस पर उन्होंने चर्चा की थी।

उन्होंने कहा था, ‘मैंने नड्डा को स्पष्ट रूप से कहा कि अगर बृजभूषण शरण सिंह (जो यूपी के कुछ हिस्सों में पार्टी का राजपूत चेहरा हैं) के खिलाफ कार्रवाई करने के संबंध में पार्टी के मन में कुछ राजनीतिक गणना है, तो वे गलत हैं, उन्हें इसके लिए कीमत चुकानी होगी.’

बता दें कि बृजभूषण शरण सिंह ने आरोपों से इनकार करते रहे हैं और बीते 31 मई को कहा था कि अगर उनके खिलाफ एक भी आरोप साबित हुआ तो वह ‘खुद को फांसी पर लटका लेंगे’. इस बीच भाजपा सांसद के समर्थन में संतों ने पॉक्सो कानून को हल्का करने के लिए संशोधन की भी मांग की थी.

इस बीच बीते 30 मई को महीने भर से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे पहलवानों ने सरकार के रवैये से क्षुब्ध होकर अपने पदक गंगा में प्रवाहित करने की बात कही थी. वे इसी दिन हरिद्वार के हर की पौड़ी घाट भी पहुंचे थे, हालांकि किसान नेताओं द्वारा उन्हें कठोर कदम न उठाने के लिए मनाने के बाद पहलवानों ने अपने पदक गंगा में सिराने का फैसला बदल दिया.

पहलवानों ने पुलिस और भाजपा सरकार पर सिंह के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है, हालांकि उनके खिलाफ दो एफआईआर में से एक पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज की गई है, जो आमतौर पर तेज और कड़ी कार्रवाई की बात कहती है.

उनका आरोप है कि बृजभूषण शरण सिंह के पीछे उनकी पार्टी खड़ी है और यह बीते 28 मई को स्पष्ट हो गया, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में भाग लिया था.

वहीं दूसरी ओर 28 मई को ही साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट और अन्य पहलवानों को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था, जब उन्होंने जंतर मंतर रोड पर अपने धरने के 35वें दिन नए संसद भवन तक मार्च करने का प्रयास किया था. उन पर सुरक्षा बलों के साथ झड़प के बाद दंगा करने का आरोप लगाया गया था.

मालूम हो कि बीते जनवरी महीने में पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया था.

कई हफ्तों के विरोध के बाद बीते 23 जनवरी को मामले की जांच के लिए केंद्रीय खेल मंत्रालय के आश्वासन और ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज मैरी कॉम की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति का गठन के बाद पहलवानों ने अपना धरना खत्म कर दिया था.

इस दौरान बृजभूषण को महासंघ के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारियों से अलग कर दिया गया था.

हालांकि कोई कार्रवाई न होने के बाद बीते 23 अप्रैल को बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक समेत अन्य पहलवानों ने अपना प्रदर्शन दोबारा शुरू कर दिया.

सात दिनों के विरोध के बाद बीते 28 अप्रैल को सिंह के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई है. इनमें से एक यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत और दूसरी महिला के शील भंग का प्रयास से संबंधित है.

इससे पहले दिल्ली पुलिस द्वारा एफआईआर न दर्ज करने का आरोप लगाते हुए खिलाड़ी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, जिसने 25 अप्रैल को उनकी याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था.

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