नई दिल्ली: द वायर की सुकन्या शांता को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) के मामलों की सुनवाई के दौरान दोषी ठहराए जाने वाले लोगों की असामान्य रूप से ज़्यादा संख्या पर की गई श्रृंखला के लिए ‘द मीडिया फाउंडेशन’ के ‘विश्व नाथ-दिल्ली प्रेस अवॉर्ड फॉर फियरलेस जर्नलिज़्म 2025’ का विजेता घोषित किया गया है.
एनआईए द्वारा 100% दोषसिद्धि दर का दावा किए जाने के एक साल बाद शांता द्वारा कई महीनों तक की गई पड़ताल में यह सामने आया कि लंबे समय तक हिरासत में रखना, लगभग अपने-आप ही ज़मानत से इनकार कर देना और जांचकर्ताओं का दबाव, दर्जनों आरोपियों- जिनमें ज़्यादातर मुसलमान थे- को उनकी सुनवाई शुरू होने से पहले ही अपना गुनाह कबूल करने के लिए मजबूर कर रहा था.
‘पुलित्ज़र सेंटर फॉर क्राइसिस रिपोर्टिंग’ ने ‘द फोर्स्ड गिल्ट प्रोजेक्ट’ नाम की इस श्रृंखला में सहयोग किया था.
यह सीरीज़ यहां पढ़ सकते हैं.
निडर पत्रकारिता यानी ‘फियरलेस जर्नलिज़्म’ श्रेणी में ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ के शिवनारायण राजपुरोहित के काम का विशेष उल्लेख किया गया. स्वतंत्र पत्रकार निधि सुरेश को ‘कमला मानकेकर अवॉर्ड फॉर जर्नलिज़्म ऑन जेंडर 2025’ से सम्मानित किया गया. एकता सोनवणे (क्वीयरबीट) और तेजस वैद्य (बीबीसी गुजराती) का भी विशेष उल्लेख किया गया.
