नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार (19 अप्रैल) को एक प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के नाम संबोधन में विपक्ष को ‘महिला विरोधी’ बताए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महिला आरक्षण के मुद्दे को गंभीरता से लागू करने के बजाय इसे एक राजनीतिक नारे में बदलना चाहती है. इसका लाभ लेना चाहती है.
सपा प्रमुख ने साफ किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि जिस तरीके से इसे जल्दबाजी में और अन्य प्रावधानों के साथ जोड़कर लाया गया, उसका विरोध है.
उन्होंने आगे कहा, ‘हम चाहते हैं कि महिलाओं को सम्मान और उचित प्रतिनिधित्व मिले, लेकिन इसके लिए सही प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए.’
अखिलेश यादव ने जोर देकर कहा कि पहले देश में जातीय जनगणना कराई जानी चाहिए, क्योंकि उसके बाद ही आरक्षण की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी और समाज के सभी वर्गों को न्याय मिल सकेगा.
उन्होंने 17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक गिरने को ‘ऐतिहासिक दिन’ बताते हुए कहा कि सरकार को अब सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है.
“पूरे देश के बुद्धिजीवी जानते हैं कि महिला आरक्षण के खिलाफ विपक्ष नहीं है, जिस समय नारी शक्ति बिल आया था तो सबने समर्थन किया था। अब वो बिल एक्ट भी बन गया है।”
• माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी pic.twitter.com/TbLMBHfnvJ
— Samajwadi Party (@samajwadiparty) April 19, 2026
अखिलेश यादव ने भाजपा की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी ‘सीएमपी फॉर्मूला’ पर काम कर रही है, जिसका मतलब है ‘मुद्दे बनाना (Create), लोगों को गुमराह करना (Mislead) और डर का माहौल बनाना (Fear) .
उन्होंने कहा कि भाजपाई सोचते हैं कि समाज में जो महिलाएं पुरानी सोच की हैं, उन्हें कम से कम अपने तरफ कर लें, क्योंकि जागरूक सोच वाली कोई नारी भाजपा को वोट देने वाली नहीं है.
उनके मुताबिक यह विधेयक ‘भाजपा की बदनीयत का काला दस्तावेज’ था, जिसे विपक्ष ने एकजुट होकर पारित नहीं होने दिया.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर जातीय जनगणना से बचना चाहती है, क्योंकि इससे देश में आरक्षण की मांग और मजबूत होगी.
अखिलेश यादव ने कहा कि ‘देश में सिर्फ आरक्षण ही नहीं, बल्कि संरक्षण की भी जरूरत है, ताकि सभी वर्गों के अधिकार सुरक्षित रह सकें.’
अखिलेश यादव के अनुसार, विपक्ष ने इस बिल के जरिए महिलाओं के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ ‘लक्ष्मण रेखा’ खींच दी है, जिसे भाजपा पार नहीं कर पाई.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिल के अंदर कई अन्य एजेंडे छुपाकर लाना चाहती थी, जिसका विपक्ष ने मजबूती से विरोध किया.
तेजस्वी यादव ने भाजपा को महिला विरोधी बताया
वहीं, रविवार को इस संबंध में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भाजपा पर निशाना साधा और सोशल मीडिया मंच एक्स पर कुछ आंकड़ों का हवाला देते हुए भाजपा को महिला विरोधी बताया है.
तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘कट्टर महिला विरोधी और झूठे भाजपाई आंख खोल इस सच्चाई को स्वीकार करें और अपने तुलनात्मक आंकड़े जारी करें.’
उन्होंने आगे लिखा, ‘लोकसभा चुनाव 2024 में राजद ने बिहार में सबसे अधिक प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिया. राजद के लोकसभा सांसदों में 25 प्रतिशत महिला हैं.’
कट्टर महिला विरोधी, पाखंडी, ढोंगी और झूठे भाजपाई आँख खोल इस सच्चाई को स्वीकार करें तथा अपने तुलनात्मक आँकड़े जारी करे।
👉 लोकसभा चुनाव-𝟐𝟎𝟐𝟒 में 𝐑𝐉𝐃 ने बिहार में सबसे अधिक 𝟐𝟗% महिलाओं को टिकट दिया, 𝐑𝐉𝐃 के 𝟐𝟓% लोकसभा सांसद महिला है।
👉 बिहार विधानसभा चुनाव-𝟐𝟎𝟐𝟓… pic.twitter.com/ZJrqE1xPGl
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) April 19, 2026
तेजस्वी यादव ने कहा, ‘बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भी राजद ने ही सबसे अधिक महिलाओं को टिकट दिया था. बिहार विधानपरिषद में भी दलों में सबसे अधिक 21.4 प्रतिशत महिलाओं का प्रतिनिधित्व राजद में है.’
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि नकली लोग महिला उत्थान की बात करते हैं.
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गुमराह करने का आरोप लगाया
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गुमराह करने का आरोप लगाया है.
सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ईमानदारी से देश को संबोधित करने के बजाय उसे गुमराह करना चुना.
It is deeply unfortunate that the Prime Minister chose to mislead the nation rather than address it honestly.
Let me put this on record. Trinamool Congress has always championed higher political representation for women. We have the highest proportion of female elected…
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) April 19, 2026
ममता बनर्जी ने एक्स पर लिखा, ‘तृणमूल कांग्रेस हमेशा से महिलाओं को राजनीति में ज़्यादा प्रतिनिधित्व देने की पक्षधर रही है. हमारे पास संसद और राज्य विधानसभा दोनों में सबसे ज़्यादा महिला प्रतिनिधि हैं. लोकसभा में हमारे 37.9% सदस्य महिलाएं हैं. राज्यसभा में हमने 46% महिला सदस्य नामित की हैं. महिलाओं के आरक्षण का विरोध करने का सवाल ही नहीं उठता और कभी उठा भी नहीं.’
ममता बनर्जी ने आगे लिखा, ‘हमारा असली विरोध परिसीमन से है, जिसे मोदी सरकार महिलाओं को ढाल बनाकर अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए आगे बढ़ाना चाहती थी. हमारा विरोध संविधान में बदलाव करने, देश को बांटने और सत्ता हथियाने की कोशिश से है, जिसमें परिसीमन से भाजपा शासित राज्यों को ज़्यादा प्रतिनिधित्व दिया जाए और बाकी राज्यों को नुकसान पहुंचे. यह संघीय लोकतंत्र पर हमला है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘प्रधानमंत्री जी, अगली बार जब आप देश को संबोधित करें तो संसद के फ़्लोर से करें, जहां आपको सवालों और जवाबदेही का सामना करना पड़े.’
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के नाम अपने संबोधन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक पास नहीं होने पर दुख जताया था.
