प्रधानमंत्री के ‘देश के नाम संबोधन’ पर हमलावर विपक्ष, कहा- महिला आरक्षण का राजनीतिक लाभ लेना चाहती है भाजपा

शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'देश के नाम संबोधन' में विपक्ष को 'महिला विरोधी' बताने को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के ख़िलाफ़ नहीं है, बल्कि जिस तरीके से इसे जल्दबाज़ी में और अन्य प्रावधानों के साथ जोड़कर लाया गया, उसका विरोध है. वहीं, ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव ने भी पीएम मोदी को निशाना बनाते हुए उन्हें महिला विरोधी कहा है.

अखिलेश यादव. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार (19 अप्रैल) को एक प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के नाम संबोधन में विपक्ष को ‘महिला विरोधी’ बताए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महिला आरक्षण के मुद्दे को गंभीरता से लागू करने के बजाय इसे एक राजनीतिक नारे में बदलना चाहती है. इसका लाभ लेना चाहती है.

सपा प्रमुख ने साफ किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि जिस तरीके से इसे जल्दबाजी में और अन्य प्रावधानों के साथ जोड़कर लाया गया, उसका विरोध है.

उन्होंने आगे कहा, ‘हम चाहते हैं कि महिलाओं को सम्मान और उचित प्रतिनिधित्व मिले, लेकिन इसके लिए सही प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए.’

अखिलेश यादव ने जोर देकर कहा कि पहले देश में जातीय जनगणना कराई जानी चाहिए, क्योंकि उसके बाद ही आरक्षण की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी और समाज के सभी वर्गों को न्याय मिल सकेगा.

उन्होंने 17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक गिरने को ‘ऐतिहासिक दिन’ बताते हुए कहा कि सरकार को अब सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है.

अखिलेश यादव ने भाजपा की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी ‘सीएमपी फॉर्मूला’ पर काम कर रही है, जिसका मतलब है ‘मुद्दे बनाना (Create), लोगों को गुमराह करना (Mislead) और डर का माहौल बनाना (Fear) .

उन्होंने कहा कि भाजपाई सोचते हैं कि समाज में जो महिलाएं पुरानी सोच की हैं, उन्हें कम से कम अपने तरफ कर लें, क्योंकि जागरूक सोच वाली कोई नारी भाजपा को वोट देने वाली नहीं है.

उनके मुताबिक यह विधेयक ‘भाजपा की बदनीयत का काला दस्तावेज’ था, जिसे विपक्ष ने एकजुट होकर पारित नहीं होने दिया.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर जातीय जनगणना से बचना चाहती है, क्योंकि इससे देश में आरक्षण की मांग और मजबूत होगी.

अखिलेश यादव ने कहा कि ‘देश में सिर्फ आरक्षण ही नहीं, बल्कि संरक्षण की भी जरूरत है, ताकि सभी वर्गों के अधिकार सुरक्षित रह सकें.’

अखिलेश यादव के अनुसार, विपक्ष ने इस बिल के जरिए महिलाओं के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ ‘लक्ष्मण रेखा’ खींच दी है, जिसे भाजपा पार नहीं कर पाई.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिल के अंदर कई अन्य एजेंडे छुपाकर लाना चाहती थी, जिसका विपक्ष ने मजबूती से विरोध किया.

तेजस्वी यादव ने भाजपा को महिला विरोधी बताया 

वहीं, रविवार को इस संबंध में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भाजपा पर निशाना साधा और सोशल मीडिया मंच एक्स पर कुछ आंकड़ों का हवाला देते हुए भाजपा को महिला विरोधी बताया है.

तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘कट्टर महिला विरोधी और झूठे भाजपाई आंख खोल इस सच्चाई को स्वीकार करें और अपने तुलनात्मक आंकड़े जारी करें.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘लोकसभा चुनाव 2024 में राजद ने बिहार में सबसे अधिक प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिया. राजद के लोकसभा सांसदों में 25 प्रतिशत महिला हैं.’

तेजस्वी यादव ने कहा, ‘बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भी राजद ने ही सबसे अधिक महिलाओं को टिकट दिया था. बिहार विधानपरिषद में भी दलों में सबसे अधिक 21.4 प्रतिशत महिलाओं का प्रतिनिधित्व राजद में है.’

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया  कि नकली लोग महिला उत्थान की बात करते हैं.

ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गुमराह करने का आरोप लगाया

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गुमराह करने का आरोप लगाया है.

सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ईमानदारी से देश को संबोधित करने के बजाय उसे गुमराह करना चुना.

ममता बनर्जी ने एक्स पर लिखा, ‘तृणमूल कांग्रेस हमेशा से महिलाओं को राजनीति में ज़्यादा प्रतिनिधित्व देने की पक्षधर रही है. हमारे पास संसद और राज्य विधानसभा दोनों में सबसे ज़्यादा महिला प्रतिनिधि हैं. लोकसभा में हमारे 37.9% सदस्य महिलाएं हैं. राज्यसभा में हमने 46% महिला सदस्य नामित की हैं. महिलाओं के आरक्षण का विरोध करने का सवाल ही नहीं उठता और कभी उठा भी नहीं.’

ममता बनर्जी ने आगे लिखा, ‘हमारा असली विरोध परिसीमन से है, जिसे मोदी सरकार महिलाओं को ढाल बनाकर अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए आगे बढ़ाना चाहती थी. हमारा विरोध संविधान में बदलाव करने, देश को बांटने और सत्ता हथियाने की कोशिश से है, जिसमें परिसीमन से भाजपा शासित राज्यों को ज़्यादा प्रतिनिधित्व दिया जाए और बाकी राज्यों को नुकसान पहुंचे. यह संघीय लोकतंत्र पर हमला है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘प्रधानमंत्री जी, अगली बार जब आप देश को संबोधित करें तो संसद के फ़्लोर से करें, जहां आपको सवालों और जवाबदेही का सामना करना पड़े.’

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के नाम अपने संबोधन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक पास नहीं होने पर दुख जताया था.