नई दिल्ली: डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म न्यूज़लॉन्ड्री के सह-संस्थापक अभिनंदन सेखरी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस अंतरिम आदेश पर चिंता जताई है, जिसमें प्लेटफॉर्म को टीवी टुडे नेटवर्क और उसके चैनलों (आज तक और इंडिया टुडे) से जुड़ी कुछ सामग्री हटाने का निर्देश दिया गया है.
द वायर हिंदी से बातचीत में सेखरी ने कहा कि यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गहरे असर डाल सकता है और इसके निहितार्थ सिर्फ न्यूज़लॉन्ड्री तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सभी पर पड़ेंगे. उन्होंने कहा कि ‘एक संस्था के रूप में मीडिया हर किसी पर रिपोर्ट और टिप्पणी करता है, चाहे वह न्यायपालिका हो, राजनेता हों, राजनीतिक दल हों, उद्योगपति हों, कंपनियां हों, फिल्मी सितारे हों या सिनेमा हो. लेकिन फिर भी पारंपरिक मीडिया, उसके मालिक और एंकर यह उम्मीद करते हैं कि वे इन सब से ऊपर हैं और उनकी आलोचना या टिप्पणी नहीं की जा सकती?’
उन्होंने यह भी कहा कि किसी कंटेंट की शैली, चाहे वह व्यंग्य, पैरोडी, हास्य या सीधी टिप्पणी हो, से सहमति या असहमति अलग बात है, लेकिन कानून के जरिए उस पर रोक लगाना एक खतरनाक मिसाल कायम करता है. सेखरी के मुताबिक, जब समाचार के नाम पर सांप्रदायिक संदेश या राजनीतिक और कॉरपोरेट प्रचार प्रसारित किया जाता है, तो उसे बिना सवाल किए नहीं छोड़ा जा सकता. ऐसे में सार्वजनिक विमर्श के लिए पर्याप्त जगह होना जरूरी है.
सेखरी ने यह भी कहा कि अगर यह मान लिया जाए कि खबरों की आलोचना या टिप्पणी नहीं की जा सकती, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा, खासतौर पर तब, जब कुछ मीडिया संस्थानों में प्रसारित सामग्री कई बार हेट-स्पीच की सीमा तक पहुंचती दिखती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सवाल उठाने की स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता और न्यूज़लॉन्ड्री इस फैसले के खिलाफ सभी कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा.
दरअसल, दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए पाया कि न्यूज़लॉन्ड्री द्वारा इस्तेमाल की गई कुछ टिप्पणियां प्रथम दृष्टया अपमानजनक हैं और यदि वे ऑनलाइन बनी रहती हैं तो टीवी टुडे की साख को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित टिप्पणियां बिना किसी स्वतंत्र मानक के और पक्षपातपूर्ण प्रतीत होती हैं, इसलिए वे कानूनी रूप से ‘डिस्पैरजमेंट’ (अपमानजनक टिप्पणी) की श्रेणी में आती हैं. अदालत ने यह भी माना कि यदि इन टिप्पणियों को नहीं हटाया गया तो इससे टीवी टुडे को गंभीर और अपूरणीय क्षति हो सकती है, जिसकी भरपाई केवल आर्थिक मुआवजे से संभव नहीं है.
इसी आधार पर अदालत ने टीवी टुडे की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए न्यूज़लॉन्ड्री को ‘shit’, ‘shit show’, ‘high on weed or opium’ और ‘your punctuation is as bad as your journalism’ जैसे कथनों को अपने प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया से हटाने का निर्देश दिया है.
यह मामला अक्टूबर 2021 में दायर उस मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें टीवी टुडे ने न्यूज़लॉन्ड्री पर कॉपीराइट उल्लंघन, मानहानि और अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप लगाए थे. हालांकि, न्यूज़लॉन्ड्री का कहना रहा है कि उसका कंटेंट आलोचना और व्यंग्य के दायरे में आता है, जिसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत संरक्षण प्राप्त है.
इससे पहले, 29 जुलाई 2022 को एकल पीठ ने टीवी टुडे को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था, जिसके खिलाफ दोनों पक्षों ने अपील दायर की थी. जहां टीवी टुडे ने अंतरिम राहत न दिए जाने के फैसले को चुनौती दी, वहीं न्यूज़लॉन्ड्री का कहना था कि अदालत द्वारा प्रथम दृष्टया मामला बनता हुआ मान लेना, उनके लिए नुकसानदेह हो सकता है.
