नई दिल्ली: नीट सहित राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में हुए पेपर लीक और अनियमितताओं के संबंध में शिक्षा पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने सरकार से श्वेत पत्र की मांग की है. उनका कहना है कि पत्र में पिछले आठ वर्षों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं और उन पर की गई कार्रवाई का विवरण दिया जाए.
द टेलीग्राफ की ख़बर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में दिग्विजय सिंह ने मांग की है कि इस श्वेत पत्र में पेपर लीक की संख्या, मामलों की स्थिति और दोषी ठहराए गए या बरी किए गए लोगों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए.
मालूम हो कि पिछले महीने एनटीए द्वारा आयोजित भारत की एकमात्र एकीकृत मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी के पेपर लीक की ख़बरों के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया था. यह परीक्षा अब 21 जून को दोबारा आयोजित होनी है.
इससे पहले 2024 में भी इस परीक्षा के पेपर लीक के आरोप सामने आए थे. तब सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि नीट परीक्षा की शुचिता प्रभावित हुई है, इसलिए एनटीए को जवाब देने की जरूरत है.
इससे पहले 2021 में अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (जेईई मेन) के पेपर लीक की जांच का काम केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) सौंपा गया था.
अपने पत्र में दिग्विजय सिंह ने लिखा, ‘ऐसे समय में जब नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्रों की मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ा है, उनके सामने बड़ा सवाल है कि आखिर पेपर लीक की जांच कैसे की जाती है, इस बारे में कोई साफ़ जानकारी नहीं है. अभी पेपर लीक से जुड़े मामलों और सीबीआई व दूसरी जांच एजेंसियों द्वारा उन पर की जा रही कार्रवाई का कोई एक साथ रखा गया सार्वजनिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है… ऐसे में आधिकारिक जानकारी के अभाव में कई रिपोर्टें और अफवाहें सामने आई हैं जिन्होंने उनकी जगह ले ली है.’
उन्होंने कहा, ‘मुझे बार-बार यह शिकायत मिली है कि हजारीबाग में हुए नीट-यूजी 2024 के पेपर लीक मामले का मुख्य आरोपी संजीव कुमार उर्फ मुखिया कथित तौर पर जमानत पर बाहर है. इसी तरह, सीबीआई ने कथित तौर पर एक क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है, जिसमें कहा गया है कि 2024 की यूजीसी-नीट परीक्षा में कोई अनियमितता नहीं हुई थी, जिसे राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने उस समय रद्द कर दिया था.’
सीबीआई की रिपोर्ट पर दिल्ली की एक अदालत द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जब दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई से अपनी क्लोजर रिपोर्ट के लिए लिखित स्पष्टीकरण मांगा, तो सीबीआई ने और समय मांगा. सीबीआई द्वारा स्पष्टीकरण देने में देरी से छात्रों के बीच भी नकारात्मक संदेश गया.
दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘भारत के छात्रों को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन की क्षमता और तत्परता में नए सिरे से विश्वास जगाने के लिए भारत सरकार एक श्वेत पत्र जारी करे, जिसमें पिछले आठ वर्षों में एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं में हुई पेपर लीक या अनियमितताओं की घटनाओं की सूची दर्ज हो. साथ ही एनटीए और जांच एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई (जिसमें यह भी शामिल हो कि किन लोगों को गिरफ्तार किया गया) का विवरण हो.’
उन्होंने मांग की कि इस श्वेत पेपर में हर जांच की स्थिति- यानी वह चल रही है या पूरी हो चुकी है, और क्या जांच एजेंसी ने चार्जशीट या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है- के साथ-साथ हर आरोपी की स्थिति रिपोर्ट भी शामिल की जाए.
दिग्विजय सिंह का कहना है कि लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रतियोगी परीक्षाओं पर निर्भर करता है. ऐसे में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही के बिना छात्रों का विश्वास बहाल नहीं किया जा सकता.
उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि श्वेत पत्र जारी होने से विद्यार्थियों को यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर गंभीर है. इससे युवाओं के मन में परीक्षा व्यवस्था के प्रति भरोसा मजबूत होगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में भी सकारात्मक पहल होगी.
वहीं, द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) के राज्यसभा सदस्य पी. विल्सन ने अख़बार को बताया कि पेपर लीक मामलों में अभी तक किसी भी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया गया है.
इस संबंध में 4 दिसंबर 2024 को राज्यसभा में उनके सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि सीबीआई ने नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले में 45 आरोपियों के खिलाफ़ पांच चार्जशीट दाखिल की हैं.
सरकार ने पेपर लीक की समस्या से निपटने के लिए फरवरी 2024 में संसद में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) बिल’ पास किया था, लेकिन इस कानून और इसके नियमों की अधिसूचना चार महीने बाद जारी की गई.
विल्सन ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर गंभीर होती, तो संसद में पास होने के तुरंत बाद ही इस कानून की अधिसूचना जारी कर देनी चाहिए थी.
