झारखंड सरकार ने अहम परीक्षा के नतीजे रद्द किए, देवेंद्र महतो का अनशन खत्म; प्रदर्शनकारी सीबीआई जांच की मांग पर अड़े

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार शाम को घोषणा की कि उनकी सरकार कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा के नतीजे रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करेगी. सरकार टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं के परिणाम भी रद्द करेगी. इसके अलावा 2014 से अब तक हुई सभी परीक्षाओं में गड़बडियों की जांच भी की जाएगी.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 17 अगस्त को रांची में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के नतीजों को रद्द करने के अपने कैबिनेट के फ़ैसले की घोषणा की. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: झारखंड में परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं को सरकार की ओर से एक और बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार (18 अगस्त) को घोषणा की कि उनकी सरकार कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा के नतीजे रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करेगी. यह परीक्षा लंबे समय से विवादों में घिरी हुई है.

सोमवार शाम राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए सोरेन ने कहा कि सरकार टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं के परिणाम भी रद्द करेगी. साथ ही, पुलिस से कहा जाएगा कि वह 2014 से अब तक हुई सभी परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच करे.

आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक देवेंद्र नाथ महतो, जो रांची के सदर अस्पताल में भर्ती हैं, ने मंत्रियों और विधायकों से मुलाकात के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया.

सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल के नतीजे रद्द करने के फैसले का प्रदर्शनकारियों ने स्वागत किया, लेकिन कई प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक सीबीआई जांच का आदेश नहीं दिया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा.

सोरेन की घोषणा के बाद जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच के छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा, ‘दोस्तों, हमारी सभी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं. उन्होंने अभी केवल (परीक्षा) रद्द करने का फैसला किया है. सीबीआई जांच की मांग अभी बाकी है… जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षाओं को भी अभी रद्द किया जाना बाकी है.’

झारखंड में युवा परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. इनमें अप्रैल में हुई 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा और जेएसएससी-सीजीएल शामिल हैं. जेएसएससी-सीजीएल जनवरी 2024 में आयोजित होने के बाद से ही विवादों में रही है. प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद आठ महीने बाद यह परीक्षा दोबारा आयोजित की गई थी, लेकिन इसके बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ.

जुलाई के आखिर में शुरू हुए युवाओं के बड़े पैमाने के विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला पिछले सोमवार को रांची में राज्य विधानसभा तक मार्च के रूप में सामने आया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया. इसके एक दिन पहले ही राज्य सरकार ने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के नतीजों को रद्द कर दिया था.

हालांकि, अब झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल के परिणाम भी रद्द करने का फैसला किया है, लेकिन पहले उसने इस मामले में राज्य हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के शामिल होने का हवाला देते हुए ऐसा करने से इनकार किया था.

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में शामिल हुए और सरकारी पदों पर नियुक्ति पा चुके अभ्यर्थियों ने सरकार के परीक्षा परिणाम रद्द करने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है. युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार ने सोमवार रात कहा कि ऐसे लोग राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र हैं.

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में सोरेन ने कहा कि टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं के परिणाम रद्द माने जाएंगे. उन्होंने दावा किया कि परीक्षा में अनियमितताओं की पुलिस जांच के दौरान ‘कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं.’ हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तार से बताने से इनकार किया और कहा कि ‘मामला जांच के अधीन है.’

लखनऊ स्थित टीडीपीएल ने इस साल अप्रैल में 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की थी. खबरों के मुताबिक, जेएसएससी ने पिछले साल मई में ही इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया था. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में भी कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था.

पुलिस की जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों में जेपीएससी के अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खैंगटे भी शामिल हैं. उन्हें 10 अगस्त को गिरफ्तार किया गया, जबकि उन्होंने इससे पहले 22 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

झारखंड में हो रहे ये प्रदर्शन उन युवा आंदोलनों के बाद हो रहे हैं, जिनका केंद्र दिल्ली में रहा है लेकिन जिनका असर देशभर में देखने को मिला. इन प्रदर्शनों का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी ने किया था. आंदोलन में मुख्य रूप से इस साल मई में दोबारा हुए नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक को लेकर विरोध किया गया था. इन प्रदर्शनों के दबाव के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था.

2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के बाद यह पहला मौका था जब जन दबाव के चलते मोदी मंत्रिमंडल के किसी मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा.