नई दिल्ली: हिंसाग्रस्त मणिपुर की ताज़ा घटनाओं में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई है, लेकिन अब तक किसी भी मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.
पुलिस और अधिकारियों के अनुसार, ये हत्याएं अलग-अलग घटनाओं में हुईं, जिससे राज्य में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया है. जिन इलाकों में घटनाएं हुईं, वे पहले से ही संवेदनशील माने जाते हैं और लंबे समय से जातीय संघर्ष की चपेट में हैं.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि बिष्णुपुर-चुड़ाचांदपुर सड़क पिछले 12 दिनों से बंद है, जिससे बिष्णुपुर के ट्रोंगलाओबी में 7 अप्रैल को दो बच्चों की हत्या के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच में बाधा आ रही है.
हमलावरों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, इसलिए पिछले एक हफ्ते में स्थानीय लोग कई बार सड़कों पर उतरे हैं और हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए सुरक्षा बलों से भिड़ गए, जिसमें कई लोग घायल हो गए.
ज्ञात हो कि बिष्णुपुर ज़िला 7 अप्रैल से ही तनावपूर्ण बना हुआ है, जब कुकी लोगों द्वारा किए गए एक कथित बम हमले में दो मेईतेई बच्चों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाएं निलंबित कर दी थी.
इस बीच, काकचिंग में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव होने की खबर है. पुलिस ने आंसू गैस, स्मोक बम और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया.
अखबार के अनुसार, एक अन्य सरकारी अधिकारी ने बताया कि जांच एजेंसियों को अब तक इलाके से कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं मिला है, जिससे हमलावरों की पहचान हो सके. घर के पास एक बिना फटा हुआ उपकरण भी मिला, जिसमें जस्ती लोहे की पाइप, फैक्ट्री में बना रॉकेट जैसा सिरा और किनारों से लटकती तारें थीं.
मेईतेई नागरिक समाज समूहों ने आरोप लगाया है कि चुड़ाचांदपुर के कुकी-ज़ो उग्रवादी समूह इस हमले के पीछे हैं और उन्होंने केंद्रीय सुरक्षा बलों को हटाने की मांग भी की है.
अधिकारी ने कहा, ‘इंफाल की ओर से फेरजॉल और चुड़ाचांदपुर तक कोई नागरिक आपूर्ति नहीं पहुंच रही है क्योंकि सड़कें बंद हैं. आवश्यक सामान अब असम के सिलचर और मिज़ोरम के आइजोल से लाई जा रही हैं. अगर इस मामले में कुकी-ज़ो समूह इसमें शामिल हैं, तो सड़क बंद होने के कारण एनआईए की टीम चुड़ाचांदपुर जाकर जांच नहीं कर पा रही है.’
बीते 10 अप्रैल को उखरूल जिले के लितान क्षेत्र में कथित उग्रवादियों की बिना उकसावे की गोलीबारी में बीएसएफ का एक जवान मारा गया. उखरूल का नगा-बहुल लितान क्षेत्र 7 फरवरी से नगा और कुकी समुदायों के बीच हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुईं थीं, जिनमें दोनों पक्षों के 30 से अधिक घर जलकर नष्ट हो गए थे.
शनिवार (18 अप्रैल) को उखरुल में नेशनल हाईवे नंबर 202 पर संदिग्ध उग्रवादियों ने आम नागरिकों के वाहनों पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें दो तांगखुल नगा पुरुषों की मौत हो गई; इनमें एक रिटायर्ड सैनिक भी शामिल था.
अखबार ने एक सरकारी सूत्र के हवाले से बताया कि शनिवार को हुई हत्याओं की शुरुआती जांच से पता चला है कि इसमें एक ऑटोमैटिक हथियार का इस्तेमाल किया गया था – संभवतः एके सीरीज़ की राइफल – जिसका इस्तेमाल इस इलाके में सक्रिय कट्टरपंथी उग्रवादी समूह करते हैं.
इसके अलावा 7 अप्रैल को 7 अप्रैल को भी तीन अन्य लोग मारे गए थे, जब केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने एक भीड़ पर गोलीबारी की थी. यह भीड़ ट्रोंगलाओबी से 1.5 किलोमीटर दूर गेलमोल स्थित हथियार डिपो (आर्मरी) को लूटने की कोशिश कर रही थी. गेलमोल 2023 से मैतेई-बहुल बिष्णुपुर और कुकी-ज़ो-बहुल चुड़ाचांदपुर के बीच एक बफर ज़ोन रहा है.
ज्ञात हो कि मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं. यह हिंसा सबसे पहले मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई थी और अब लगभग सभी समूह इसमें शामिल हो गए हैं. मेईतेई समुदाय मुख्य रूप से इंफाल घाटी के मैदानी इलाकों में रहते हैं, जबकि कुकी पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते हैं. हिंसा शुरू होने के बाद मेईतेई और कुकी अपने-अपने क्षेत्रों में सिमट गए हैं.
