नीट-यूजी: पेपर लीक के बाद एक और अभ्यर्थी की कथित आत्महत्या, राहुल गांधी बोले- बर्बाद हो चुकी व्यवस्था ज़िम्मेदार

पेपर लीक के आरोपों के बीच नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द किए जाने के बाद कम से कम पांच अभ्यर्थियों ने आत्महत्या की है. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को सुरक्षित रखने में नाकामी की क़ीमत भारत की पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार (4 जून) को एक नीट अभ्यर्थी की कथित आत्महत्या के मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को सुरक्षित रखने में नाकामी की कीमत भारत की पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है.

राहुल गांधी की यह टिप्पणी उन ख़बरों के बाद आई, जिनमें कहा गया है कि मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली नीट अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी ने नागपुर में कथित रूप से आत्महत्या कर ली.

बताया गया कि नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की खबरों के बाद वह अवसाद में चली गई थीं.

ख़बरों में सामने आया है कि उनके परिजन को उनकी मौत के बाद एक नोटबुक में चिट्ठी लिखी मिली, जिसमें उन्होंने अपने माता-पिता को संबोधित करते हुए लिखा था कि उनकी ‘दोबारा नीट देने की हिम्मत नहीं’ है.

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, ‘आकांक्षा डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती थी. उसके पिता किसान हैं. बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड पर तीन लाख रुपये का ऋण लिया. इतना ही नहीं, उन्होंने नागपुर में स्वयं रसोइए की नौकरी भी की, ताकि उनकी बेटी वहां कोचिंग कर सके.’

उन्होंने आगे कहा, ‘एक पिता ने अपनी ओर से हरसंभव प्रयास किया. फिर नीट का पेपर लीक हो गया. परीक्षा रद्द कर दी गई. इसी अनिश्चितता के बीच आकांक्षा हमेशा के लिए हमें छोड़कर चली गई.’

गांधी ने इस मौत को ‘भ्रष्ट और टूटी हुई व्यवस्था का दुखद नतीजा’ बताते हुए आरोप लगाया कि परीक्षा विवाद के बाद न तो कोई सार्थक जवाबदेही तय की गई और न ही कोई वास्तविक सुधार किया गया.

उन्होंने कहा, ‘और धर्मेंद्र प्रधान जी? आज भी कुर्सी पर हैं. फिर वही कमेटी. वही ट्रांसफर. वही जांच. न सुधार, न न्याय.’

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आगे कहा, ‘मोदी जी, सत्ता स्थायी नहीं होती, आती-जाती रहती है. लेकिन पिछले 12 वर्षों में आपने शिक्षा व्यवस्था को जिस हद तक बर्बाद किया है, उसकी कीमत आज भारत के युवा चुका रहे हैं.’

ज्ञात हो कि नीट-यूजी परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोपों के बाद एनटीए जांच और आलोचना के घेरे में है. एनटीए द्वारा तीन मई को आयोजित की गई नीट 2026 की परीक्षा पेपर लीक के दावों के बाद रद्द कर दी गई थी, जिसके बाद अब यह परीक्षा दोबारा 21 जून को निर्धारित की गई है.

मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है. सीबीआई ने पेपर लीक के सिलसिले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

झारखंड में भी ऐसे ही एक मामले में एक 16 साल की लड़की ने ख़ुदकुशी कर ली. उनके परिजनों का कहना है कि वे नीट विवाद की वजह से बहुत ज़्यादा डिप्रेशन में थी.

उसके परिवार के मुताबिक, 10वीं क्लास पूरी करने के बाद उन्होंने नीट की तैयारी के लिए दिल्ली में एक कोचिंग जॉइन की थी, जहां से कोर्स पूरा करने के बाद वह घर लौटीं और परीक्षा दी. परिवार ने का कहना है कि छात्रा को इस साल इम्तिहान पास करने का भरोसा था.

इस वर्ष नीट से जुड़ी आत्महत्या का पांचवां मामला

आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत को नीट विवाद के बाद सामने आया पांचवां कथित छात्र आत्महत्या का मामला बताया जा रहा है.

समाचारों के अनुसार, आकांक्षा के पिता, जो एक किसान हैं, ने उनकी पढ़ाई के लिए तीन लाख रुपये का ऋण लिया था और नागपुर में रसोइए का काम करके कोचिंग का खर्च उठाया था.

अख़बारों के अनुसार, उनके परिवार का कहना है कि आकांक्षा पेपर रद्द होने के बाद अवसाद में चली गई थी, लेकिन उसकी मौत की वजह यह होगी, इस बात का एहसास उन्हें पहले नहीं हुआ.

उनके पिता ने कहा, ‘मेरी बेटी पढ़ाई में बहुत अच्छी थी और हमेशा डॉक्टर बनने का सपना देखती थी. हमारे पास कम पैसे थे लेकिन उसकी पढ़ाई के लिए लोन लिया. परीक्षा के बाद वो खुश थी और उसे सलेक्ट होने का भरोसा था. मगर जब पेपर लीक और रद्द होने की खबर आई, वह टूट गई. मेरी 20 साल की मेहनत बेकार चली गई क्योंकि सरकार ठीक से इम्तिहान नहीं करा पाई.’

उन्होंने आगे कहा कि नवीं कक्षा में पढ़ने वाले अपने छोटे बेटे को वो पढ़ाई छोड़ने के लिए कह देंगे. ‘सिस्टम की नाकामी से उसे सदमा देने के से बेहतर यही होगा कि वो खेती कर ले.’

इससे पहले सामने आए मामलों में राजस्थान के झुंझुनूं जिले के 22 वर्षीय अभ्यर्थी प्रदीप मेघवाल का मामला शामिल है. वे सीकर में नीट की तैयारी कर रहे थे. परिवार के अनुसार, उन्हें लगभग 650 अंक आने की उम्मीद थी और परीक्षा रद्द होने से वे बेहद आहत थे.

एक अन्य मामला उत्तर प्रदेश के ऋतिक मिश्रा का है. बताया जा रहा है कि उन्होंने दो बार नीट परीक्षा दी थी और इस वर्ष सफलता की उम्मीद लगाए हुए थे, लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद प्रवेश प्रक्रिया को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता से वे परेशान हो गए थे.

दिल्ली के आदर्श नगर में एक 20 वर्षीय युवती अंशिका ने नीट परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या कर ली. उनके परिवार के अनुसार, उसने 2022 और 2023 में भी नीट की परीक्षा दी थी.

इसी तरह 14 मई को गोवा के कर्टोरिम का रहने वाले 17 वर्षीय एक छात्र नीट परीक्षा रद्द होने के बाद अपने घर पर आत्महत्या कर ली.

दो सप्ताह पहले कर्नाटक कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर ऐसे चार मामलों को उजागर करते हुए कहा था कि कथित पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से पैदा हुई अनिश्चितता के कारण नीट अभ्यर्थी आत्महत्या कर रहे हैं.

पार्टी ने राजस्थान के झुंझुनूं के एक छात्र, उत्तर प्रदेश के ऋतिक मिश्रा, गोवा में रह रहे बेंगलुरु के 17 वर्षीय अभ्यर्थी तथा दिल्ली की एक युवती का उल्लेख किया था.

कांग्रेस ने एक्स पर लिखा था, ‘हर सुर्खी के पीछे एक ऐसा परिवार है जो हमेशा के लिए टूट गया है. जिन माता-पिताओं ने अपने बच्चों की शिक्षा के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया, वे अब असहनीय दुख के साथ जी रहे हैं.’

पार्टी ने इस स्थिति को ‘भारत की शिक्षा व्यवस्था पर से विश्वास के टूट जाने’ का संकेत बताया.

बढ़ते छात्र आत्महत्या के केस

इंडिया टुडे द्वारा मीडिया रिपोर्टों के विश्लेषण के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में देशभर में नीट से जुड़े कम से कम 93 छात्र आत्महत्या के मामले सामने आए हैं. इनमें सर्वाधिक मामले वर्ष 2025 में दर्ज किए गए, जब कम से कम 32 ऐसी मौतों की सूचना मिली थी. वहीं 2026 में अब तक कम से कम 14 मामलों का दस्तावेजीकरण किया जा चुका है.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में दर्ज कुल आत्महत्याओं में 8.48 प्रतिशत हिस्सेदारी छात्रों की है. पिछले एक दशक में इसमें स्पष्ट वृद्धि दर्ज की गई है.

7 मई को जारी ‘एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के शिक्षण परिसरों में 14,488 छात्रों ने आत्महत्या की. यह संख्या भारत में दर्ज कुल 1,70,746 आत्महत्याओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

2014 के आंकड़ों से तुलना करने पर पता चलता है कि उस वर्ष 8,068 छात्र आत्महत्याएं हुई थीं, जो कुल आत्महत्याओं का 6.1 प्रतिशत थीं. पिछले आंकड़े बताते हैं कि औसतन हर साल कम-से-कम 13,000 छात्रों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. 2021 में यह संख्या 13,089 थी, 2022 में 13,044 और 2023 में 13,892 रही.

(अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं– दोस्त या परिजन– जो मानसिक रूप से परेशान हैं और आत्महत्या का जोखिम है, तो कृपया उनसे संपर्क करें. सुसाइड प्रिवेंशन इंडिया फाउंडेशन के पास उन फोन नंबरों की एक सूची है जिन पर कॉल करके वे गोपनीयता से बात कर सकते हैं. टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा संचालित परामर्श सेवा, आईकॉल ने देश भर के चिकित्सकों/थेरेपिस्ट की एक क्राउडसोर्स्ड सूची तैयार की है. आप उन्हें नज़दीकी अस्पताल भी ले जा सकते हैं.)