दक्षिणपंथी समूह करणी सेना और अन्य संबंधित क्षत्रिय संगठनों से जुड़े हज़ारों लोग 12 अप्रैल को आगरा के बाहरी इलाके में तलवारें, भाले और लाठियां लेकर समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन के ख़िलाफ़ एकत्र हुए थे. अखिलेश यादव ने करणी सेना के इस प्रदर्शन का भाजपा से जुड़े होने का आरोप लगाया है.
सीतापुर पुलिस ने एक पुजारी को दैनिक जागरण के पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की हत्या का साज़िशकर्ता बताया है. बाजपेयी के परिवार को पुलिस की थ्योरी पर यक़ीन नहीं है. उनका आरोप है कि हत्या के पीछे गहरी साज़िश थी, जो ज़िले में ज़मीन और धान की खरीद में भ्रष्टाचार की हालिया कवरेज से जुड़ी है.
कानपुर पुलिस द्वारा एक कथित ‘मुठभेड़’ में दो लोगों के पैरों में गोली मारने के लगभग पांच साल बाद स्थानीय अदालत ने पाया कि जो हथियार पुलिस ने उनके पास से बरामद करने का दावा किया था, वह पुलिस मालखाने से ही लिया गया था. कोर्ट को पुलिस की गवाही में कई विरोधाभास मिले, सीसीटीवी फुटेज भी पेश नहीं किया गया.
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने मेरठ कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. सीमा पवार को परीक्षा कार्यों से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया है. एबीवीपी ने उनके द्वारा तैयार एक प्रश्नपत्र में आरएसएस को लेकर पूछे गए सवालों पर आपत्ति जताई थी और उन्हें 'राष्ट्र-विरोधी मानसिकता' वाला बताया था.
उत्तर प्रदेश के झांसी में रमज़ान के दौरान एक 40 वर्षीय मुस्लिम महिला को नाबालिग हिंदू लड़की के ‘धर्मांतरण’ के आरोप में गिरफ्तार किया गया. लेकिन महिला का कहना है कि पड़ोसी हिंदू परिवार ने उससे लिया कर्ज़ चुकाने से बचने के लिए ‘फर्जी कहानी’ गढ़ी है.
सपा के वरिष्ठ दलित नेता और सांसद रामजी लाल सुमन ने हाल ही में संसद में राजपूत शासक राणा सांगा का उल्लेख करते हुए कहा था कि लोधी शासक इब्राहिम लोदी के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए सांगा ने ही बाबर को भारत बुलाया था. इससे नाराज़ करणी सेना के नेतृत्व में एक भीड़ ने आगरा में उनके घर पर हमला कर दिया.
पुलिस ने 23 मार्च को संभल की शाही जामा मस्जिद की प्रबंध समिति के अध्यक्ष ज़फर अली को नवंबर 2024 में हुई हिंसा की कथित साज़िश से जुड़े केस में गिरफ़्तार किया है. अली के भाई का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें न्यायिक आयोग के सामने बयान देने से रोकने के लिए गिरफ़्तार किया है.
संभल में सालाना नेजा मेले पर प्रतिबंध लगाते समय पुलिस का आधिकारिक रुख़ आरएसएस और उसके सहयोगियों के लंबे समय से चले आ रहे विचारों के अनुरूप था. संघ सालार मसूद की कहानी को वर्तमान राजनीति से जोड़ने और उन्हें खलनायक के रूप में पेश करने की कोशिश करता रहा है.
1981 में यूपी के दिहुली में महिलाओं और बच्चों समेत चौबीस दलित लोगों की निर्मम हत्या के मामले में मैनपुरी की एक अदालत ने तीन दोषियों को मौत की सज़ा सुनाते हुए कहा कि ये हत्याएं जाटवों के ख़िलाफ़ ठाकुरों द्वारा 'गहरी जड़ जमाए जातिगत पूर्वाग्रह के परिणामस्वरूप' की गई थीं.
एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि संभल की शाही जामा मस्जिद को सफ़ेदी की ज़रूरत नहीं है. हालांकि, अब हाईकोर्ट में उसने इस बात का जवाब नहीं दिया कि वह मस्जिद के बाहरी हिस्से की सफेदी के इनकार क्यों कर रहा है, जबकि तस्वीरों से साफ पता चलता है कि इसे रंग-रोगन की ज़रूरत है.
योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उन्होंने महाकुंभ में मौनी अमावस्या के स्नान से पहले 29 जनवरी की सुबह हुई भगदड़ को इसलिए उजागर नहीं होने दिया, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि इससे दहशत की स्थिति पैदा हो. इससे पहले उनकी सरकार पर भगदड़ में हताहतों की संख्या दबाने का आरोप लगा है.
एएसआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में कहा कि संभल की शाही जामा मस्जिद पूरी तरह से 'अच्छी स्थिति' में है, इसमें रंगरोगन की ज़रूरत नहीं है. हालांकि तस्वीरें बताती हैं कि इमारत के बाहरी हिस्से का पेंट उखड़ा हुआ है और अंदर कुछ जगहों पर मरम्मत की ज़रूरत हैं.
महाकुंभ के दौरान द वायर ने दो पुलिस थानों- दारागंज और कुंभ मेला कोतवाली में दर्ज 315 से अधिक एफआईआर के अध्ययन में पाया कि ज़्यादातर अपराध चोरी और छीना-झपटी से संबंधित हैं. पीड़ितों में आम भक्तों से लेकर साधु, वीआईपी और स्थानीय निवासियों के साथ देश-विदेश से आए पर्यटक शामिल हैं.
बुलंदशहर में एक दलित व्यक्ति को उसकी बारात के दौरान ठाकुरों ने घोड़े से उतार दिया, जिन्होंने कथित तौर पर बारातियों के साथ भी मारपीट की. वहीं मथुरा में दो दलित बहनों की शादी में यादव समुदाय के एक समूह ने कथित तौर पर बारातियों पर हमला किया, और बाद में शादी कैंसल कर दी गई.
समाजवादी पार्टी का आरोप है कि मिल्कीपुर उपचुनाव से पहले पुलिस अयोध्या में उसके प्रमुख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ झूठे केस दर्ज कर रही है. द वायर ने इनमें से सात मामलों को जांचा और पाया कि ये सभी केस हमले और धमकी के लगभग समान आरोपों पर आधारित हैं.