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वैशाली बसु शर्मा

मोदी सरकार के आठ साल बाद देश में बेरोज़गारी का हाल कुछ ख़ास बदला नहीं है

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के अनुसार, मई में भारत की बेरोज़गारी दर 7.1% रही. आंकड़े मूल रूप से दावा करते हैं कि सही प्रकार की नौकरियां न मिलने से निराश होकर कामकाजी उम्र के 90 करोड़ भारतीयों में से आधों, विशेष रूप से महिलाओं, ने रोज़गार की तलाश करना ही बंद कर दिया है.

श्रीलंका में वित्तीय संकट के भारत के लिए क्या निहितार्थ हैं

श्रीलंका में चल रहे आर्थिक और राजनीतिक संकट के भारत के लिए कई व्यावसायिक प्रभाव हैं. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत इस अवसर का उपयोग उसके साथ अपने राजनयिक संबंधों को संभालने के लिए कर सकता है, जो श्रीलंका की चीन के साथ नज़दीकी के चलते प्रभावित हुए हैं.

क्रिप्टोकरेंसी पर लगाए गए तीस प्रतिशत कर के क्या मायने हैं

केंद्र सरकार द्वारा वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से होने वाली आय पर 30 प्रतिशत कर को हितधारकों ने निवेशकों को हतोत्साहित करने वाला बताया है. इनका मानना है कि आने वाला दौर डिजिटलीकरण और टेक्नोलॉजी का है, ऐसे में अगर भारत ने इसके लिए अनुकूल माहौल तैयार नहीं किया तो यह कुछ प्रमुख व्यवसायों और निवेशकों को खो देगा.

यूक्रेन संकट के चलते क्या रूस, भारत और चीन के बीच त्रिपक्षीय साझेदारी संभव है

यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के दबाव के बीच एशिया के दो प्रतिद्वंद्वी देश- चीन और भारत अपने तमाम मतभेदों के बावजूद रूस को लेकर समान रवैया अख़्तियार किए हुए हैं.

बैंक निजीकरण और क्रिप्टो विनियमन विधेयक के संसद में पेश न होने की क्या वजह है

सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी विनियमन और बैंक निजीकरण पर प्रमुख वित्तीय क्षेत्र के विधेयकों को इसलिए भी स्थगित कर दिया है कि बाज़ार परिदृश्य को क़ानून लाने के लिए अनुकूल नहीं देखा जा रहा है. इसके अलावा कोरोना महामारी के आर्थिक प्रभाव और ओमीक्रॉन स्वरूप के बढ़ते ख़तरे भी महत्वपूर्ण कारक हैं जिन्होंने वित्तीय क्षेत्र के विधेयकों को स्थगित करने के सरकार के निर्णय को प्रभावित किया है.

26/11 के 13 साल बाद भी आतंकवादियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने में विफल पाकिस्तान

भारत ने इस बात के पर्याप्त प्रमाण दिए हैं कि 26/11 के मुंबई आतंकी हमले की साज़िश पाकिस्तान में रची गई थी. यह मामला पाकिस्तान में बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रहा है और भारत द्वारा आरोपित प्रमुख आतंकवादी ठोस सबूतों के बावजूद तेरह साल बाद भी आज़ाद घूम रहे हैं.

किस हाल में है नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आई ढेरों रिपोर्ट्स में एक समान बात यह है कि भारत में नरेंद्र मोदी के शासन में मानवाधिकार समूहों पर दबाव बढ़ा है, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को धमकाया गया है और मुसलमानों के प्रति घृणा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इस तरह के अभियान की प्रेरणा जो भी हो, मानवाधिकारों के इन उल्लंघनों के बारे में कुछ करने की ज़रूरत है.

अमेरिकी नेतृत्व की बहाली पर जो बाइडन का दांव

अपने पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप के अंतर्मुखी एकपक्षीय रवैये की जगह जो बाइडन का बहुपक्षीयता पर ज़ोर देना दिखाता है कि उनके नेतृत्व में अमेरिका सबको साथ लेकर दुनिया की अगुआई करना चाहता है. मानवाधिकार और क़ानून के शासन को लेकर प्रतिबद्धता के साथ ब्रांड अमेरिका की मरम्मत बाइडन की टीम की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक है.