भारत ने 2028 में होने वाले 33वें वार्षिक जलवायु सम्मेलन (सीओपी33) की मेजबानी करने का अपना प्रस्ताव वापस ले लिया है. विशेषज्ञों ने इस फैसले को ‘रणनीतिक अवसर खोना’ और वैश्विक प्रयासों के लिए ‘झटका’ बताया है.
ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमले के बाद फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे माल की कीमतें महज पंद्रह दिनों में 200-300% तक बढ़ गई हैं. दवा निर्माता कंपनियां दवाओं के दाम बढ़ने की चेतावनी दे रही हैं, साथ ही हालात ऐसे ही बने रहने पर सप्लाई में कमी का संकेत भी दे रही हैं.
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कहा है कि 2021 में हुआ चमोली हिमस्खलन और 2024 में केरल के वायनाड में हुए भूस्खलन जैसी घटनाओं के साथ-साथ कई अन्य आपदाएं रोकी जा सकती थीं. एनडीएमए ने कहा है कि इन घटनाओं ने दीर्घकालिक जोखिम न्यूनीकरण योजना और सामुदायिक तैयारी के उपायों में मौजूद ख़ामियों को उजागर किया है.
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप पर केंद्र सरकार के विवादास्पद परियोजना को मंज़ूरी देते हुए कहा कि यह परियोजना 'रणनीतिक और रक्षा दृष्टि से भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण' है.
सरकार ने लोकसभा को बताया है कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने बीते पांच वित्तीय वर्षों- 2020-21 से 2024-25 के बीच विभिन्न सरकारी और हाई-प्रोफ़ाइल परिसरों में लगाने के लिए कुल 405 एयर प्यूरीफायर खरीदे. एयर प्यूरीफायर पर 2021-22 में 4,20,394 रुपये, 2022-23 में 4,69,300 रुपये, 2023-24 में 6,29,219 रुपये और 2024-25 में 10,24,500 रुपये ख़र्च किए गए.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर में ‘गर्भ संस्कार’ को बढ़ावा देने वाले एक कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां उन्होंने गर्भ संस्कार को भावी पीढ़ियों को सशक्त बनाने का साधन बताया और कहा कि राज्य सरकार इस प्रथा को संस्थागत रूप देने जा रही है.
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन का अनुमान है कि 2010 में 1.54 अरब (23 प्रतिशत) लोगों की तुलना में सदी के मध्य तक लगभग 3.8 अरब लोग, जो दुनिया की आबादी का लगभग 41 प्रतिशत है, ख़तरनाक गर्मी की स्थिति का सामना करेंगे. इस स्थिति में भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल होगा.
2018 के बाद इस साल दिसंबर में दिल्ली की हवा सबसे ख़राब रही. पीएम 2.5 का औसत स्तर 211 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया. तापमान थोड़ा अधिक होने के बावजूद प्रदूषण बढ़ा, जिससे साफ़ है कि केवल मौसम नहीं, अन्य कारण भी ज़िम्मेदार हैं.
1 से 19 दिसंबर तक चले दिल्ली की ख़राब वायु गुणवत्ता के बीच चले संसद के शीतकालीन सत्र में वायु प्रदूषण को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई. वहीं पर्यावरण मंत्रालय के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में कहा कि उच्च एक्यूआई स्तर और फेफड़ों की बीमारियों के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए कोई पुख़्ता आंकड़े मौजूद नहीं हैं. उनका यह दावा सही नहीं हैं.
सिंगापुर, ब्रिटेन और कनाडा ने उत्तर भारत में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की हैं. दिल्ली में वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी हुई है और शहर व आसपास के इलाकों में घना जहरीला स्मॉग छाया हुआ है. इस बीच, चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए बीजिंग द्वारा अपनाए गए उपायों की जानकारी साझा की है.
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि दिल्ली और उत्तर भारत के अधिकांश हिस्से इस समय भीषण वायु प्रदूषण से जूझ रहे हैं, वहीं देशभर के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और समितियों में स्वीकृत वैज्ञानिक एवं तकनीकी पदों में से लगभग 45% पद रिक्त पड़े हैं.
लोकसभा में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ई20 ईंधन को पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए सुरक्षित बताया, लेकिन विशेषज्ञों ने इंजन क्षति, माइलेज गिरावट, भूमि-जल संकट और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं. वहीं राजस्थान में निर्माणाधीन इथेनॉल संयंत्र के ख़िलाफ़ किसानों का ज़ोरदार विरोध जारी है.
देश के कई शहरों और विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के गंभीर हालात के बीच केंद्र सरकार ने संसद में कहा कि वायु प्रदूषण के कारण ही होने वाली मौतों या बीमारियों का सीधा संबंध स्थापित करने के लिए देश में कोई ठोस राष्ट्रीय आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. हालांकि, वायु प्रदूषण सांस संबंधी रोगों और संबंधित बीमारियों के लिए एक बड़ा कारण है.
नए भूकंपीय मानचित्र में पूरे उत्तराखंड राज्य को भूकंप संवेदनशीलता की सबसे ऊंची श्रेणी भूकंपीय ज़ोन 6 में रखा गया है. भूकंपीय ज़ोन 6 में रखे जाने का अर्थ है कि भविष्य में अगर कोई भूकंप आता है, तब राज्य के हर हिस्से में समान और व्यापक नुकसान होने की संभावना रहेगी.
इस साल खेतों में पराली जलाने की घटनाएं कम होने के बावजूद अक्टूबर और नवंबर में दिल्ली की वायु गुणवत्ता अब भी ख़राब है. दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के ताज़ा विश्लेषण के अनुसार, इसका प्रमुख कारण वाहनों से होने वाला प्रदूषण है.