डीजीसीआई के परामर्श के बाद एबॉट इंडिया ने ‘डाइजीन सीरप’ के बैच वापस लिए

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने बीते माह चर्चित एंटासिड 'डाइजीन' सीरप के संबंध में शिकायत मिलने के बाद इसकी जांच की थी. इसने केमिस्ट और थोक विक्रेताओं से भी इसकी बिक्री बंद करने को कहा था.

नदियों और तटों जैसे खुले स्थानों में रहने वाले पक्षियों की संख्या में गिरावट: रिपोर्ट

स्टेट ऑफ इंडियन बर्ड्स (एसओआईबी) रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अध्ययन की गई 338 पक्षी प्रजातियों में से 60 प्रतिशत में दीर्घकालिक गिरावट देखी गई है. वहीं, वर्तमान वार्षिक प्रवृत्ति के लिए मूल्यांकन की गई 359 प्रजातियों में से 40 प्रतिशत में गिरावट दर्ज हुई है.

आईएमए ने जेनेरिक दवा लिखने के अनिवार्य नियम को वापस लेने की मांग की

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एनएमसी द्वारा प्रिस्क्रिप्शन में अनिवार्य रूप से जेनेरिक दवाएं लिखने के नियम को वापस लेने की मांग करते हुए कहा है कि देश में निर्मित 1% से भी कम जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता का परीक्षण किया जाता है. सरकार और डॉक्टर रोगी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं कर सकते.

फिर भारत निर्मित एक और दवा दूषित पाई गई, डब्ल्यूएचओ ने जारी की चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फिर एक भारतीय दवा 'कोल्ड आउट सिरप' के ख़िलाफ़ अलर्ट जारी किया है. अलर्ट में कहा गया है कि इराक को निर्यात की गई इस दवा में डायथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल स्वीकार्य स्तर से अधिक मिला है, जो कई स्वास्थ्य समस्याओं और मौत की वजह बन सकता है. 

गांबिया से आई पांचवीं रिपोर्ट में भी भारतीय दवा को बच्चों की मौत का ज़िम्मेदार बताया गया

वीडियो: भारतीय कंपनी मेडन फार्मा की दवाइयों से गांबिया में सत्तर बच्चों की मौत की पुष्टि करने वाली एक और रिपोर्ट सामने आई है. गांबिया सरकार लगातार मेडन फार्मा और निर्यातक अटलांटिक फार्मा के ख़िलाफ़ कार्रवाई की बात कह रही. वहीं, बीते दिनों भारतीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बच्चों की मृत्यु डायरिया से हुई थी.

कोविड के बाद युवाओं की अचानक मौत की वजह की पुष्टि करने वाला कोई सबूत नहीं: स्वास्थ्य मंत्रालय

हाल के महीनों में ऐसे स्वस्थ व्यक्तियों, जिन्हें कोविड-19 संक्रमण हुआ था, की हृदय संबंधी विकारों से अचानक मृत्यु में असामान्य वृद्धि की ख़बरें आई हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि इस बारे में तथ्यों का पता लगाने के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद तीन अध्ययन कर रहा है.

डब्ल्यूएचओ ने अफ्रीकी देश कैमरून में बेचे जाने वाले एक कफ सीरप को लेकर चेतावनी जारी की

डब्ल्यूएचओ ने अफ्रीकी देश कैमरून में बेचे जाने वाले एक कफ सीरप ‘नेचरकोल्ड सीरप’ को लेकर यह चेतावनी जारी की है. विश्लेषण से पता चला है कि इसमें डायएथिलीन ग्लाइकॉल नामक तत्व निर्धारित मात्रा से पाया गया है, जो मनुष्यों के लिए ज़हरीला साबित हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने ‘ज़हरीली’ होम्योपैथिक दवाओं के वितरण पर केंद्र और केरल सरकार से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि केरल सरकार द्वारा कोविड-19 के इलाज के लिए ‘आर्सेनिकम एल्बम 30सीएच’, जिसमें कैसरकारक आर्सेनिक होता है, को 38 लाख से 50 लाख स्कूली बच्चों के बीच वितरित करने का निर्णय लिया गया था. याचिका में कहा गया है कि ऐसी छह लाख दवाएं पहले ही वितरित की जा चुकी हैं.

मलेरिया से निपटने के लिए जेनेटिकली मोडिफाइड मच्छरों का प्रयोग कितना सही है?

कोविड-19 महामारी के बीच भारत के जैव प्रौद्योगिकी उद्योग में तेज़ी देखी गई. आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी में आज आनुवंशिक संशोधन भी शामिल है. जीएम कीड़ों को बढ़ावा देने की मुख्य प्रेरणा उन प्रजातियों की आबादी को नियंत्रित करना है, जो संक्रामक रोगजनकों को ट्रांसमिट करते हैं. हालांकि वैज्ञानिकों के एक वर्ग के अनुसार, यह जोखिम के बिना नहीं आता है.

पेय-खाद्य पदार्थों में प्रयुक्त स्वीटनर को ‘संभवत: कैंसरकारी’ घोषित करेगी डब्ल्यूएचओ संस्था

पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनी कोका-कोला के डाइट कोक से लेकर ‘मार्स रिंगली’ के एक्स्ट्रा च्यूइंग गम और कुछ स्नैपल कंपनी के कुछ पेय पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले स्वीटनर एस्पार्टेम को जुलाई में डब्ल्यूएचओ की कैंसर शाखा इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर द्वारा पहली बार ‘संभवत: मनुष्यों के लिए कैंसरकारी’ के रूप में सूचीबद्ध किया जाएगा.

डब्ल्यूएचओ द्वारा दूषित दवाइयों की जांच में भारत और इंडोनेशिया के ऐसे बीस उत्पाद सामने आए

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा की जा रही दूषित कफ सीरप की जांच में इससे पहले 15 कफ सीरप को लेकर चेतावनी जारी की गई थी, जिनमें से सात भारत में निर्मित थे.

वैज्ञानिक खोजें वेदों में थीं, बाद में पश्चिमी अवधारणा के रूप में इन्हें पेश किया गया: इसरो चीफ

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने कहा कि बीजगणित, समय की अवधारणा, ब्रह्मांड की संरचना, धातु विज्ञान और विमानन जैसी वैज्ञानिक अवधारणाएं सबसे पहले वेदों में पाई गई थीं. ये भारतीय खोजें अरब देशों के माध्यम से यूरोप पहुंचीं और फिर पश्चिमी अवधारणाओं के रूप में सामने आईं.

जीव विज्ञान पाठ्यक्रम से एवोल्यूशन को हटाना इस विषय को रटंत विद्या बनाने का रास्ता है

क्रमिक विकास (एवोल्यूशन) जीव विज्ञान की धुरी है और डार्विनवाद इसे समझने की बुनियाद. इन्हें स्कूल के पाठ्यक्रम से निकालना विज्ञान की कक्षा के इकोसिस्टम को बिगाड़ना है.

डार्विन और क्रमागत उन्नति को पढ़ना क्यों ज़रूरी है?

क्रमागत उन्नति का सिद्धांत या थ्योरी ऑफ एवोल्यूशन जीव विज्ञान को देखने का एक अनिवार्य लेंस है. इस विषय को समझने के लिए क्रमागत उन्नति को समझना बेहद ज़रूरी है.