नवंबर की शुरुआत से दिल्ली में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर है- सीपीसीबी की सीमा से तीन गुना और डब्ल्यूएचओ मानक से दस गुना ज़्यादा. वाहनों से निकलने वाला धुआं इसका मुख्य कारण है. दूसरी तरफ, दिल्ली के 39 प्रदूषण मॉनिटर्स में से किसी ने भी अक्टूबर माह में लगातार डेटा नहीं दिया है.
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने के बीच एम्स (दिल्ली) ने पब्लिक हेल्थ एडवाइजरी जारी कर नागरिकों को घर के अंदर रहने, एन 95 मास्क पहनने और एयर प्यूरीफायर लगाने की सलाह दी है. लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसे उपायों को अपनाना निम्न आय वर्ग और ग़रीब तबके के लिए मुमकिन हैं?
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) के नवीनतम आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि वायु प्रदूषण दिल्लीवासियों के लिए स्वास्थ्य का सबसे बड़ा ख़तरा बना हुआ है. अध्ययन में कहा गया है कि दिल्ली में हर सात में से एक मौत प्रदूषित हवा से जुड़ी है.
लांसेट की नई रिपोर्ट के मुताबिक़, 2022 में भारत में वायु प्रदूषण से 17.18 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जो 2010 की तुलना में 38 फीसदी अधिक है. रिपोर्ट बताती है कि लोगों की असमय मौतों से देश को 30 लाख करोड़ रुपये (जीडीपी का 9.5%) का आर्थिक नुक़सान हुआ.
मंगलवार को धुंध से घिरे दिल्ली में बेहद ख़राब वायु गुणवत्ता के बीच 1.28 करोड़ रुपये की लागत से क्लाउड सीडिंग परीक्षण के ज़रिए कृत्रिम वर्षा कराने का प्रयास विफल रहा. आम आदमी पार्टी ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब एजेंसियों ने पहले कह दिया था कि दिल्ली में क्लाउड सीडिंग नहीं की जा सकती, तो रेखा गुप्ता सरकार ने कृत्रिम बारिश के सर्कस पर दिल्लीवालों का पैसा क्यों बर्बाद किया?
मध्य प्रदेश में दीपावली के दौरान कार्बाइड गन से सैकड़ों लोगों की आंखों में चोटें आईं और कई ने दृष्टि ही गंवा दी. अब बताया गया है कि आईसीएमआर ने पहले ही चेतावनी दी थी कि कैल्शियम कार्बाइड से जुड़ी ऐसी गन गंभीर दृष्टि हानि का कारण बन सकती हैं. चेतावनियों के बावजूद प्रशासन ने बिक्री नहीं रोकी, जिससे कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई.
बीते 14 अक्टूबर को एफएसएसएआई ने ब्रांड नामों के साथ 'ओआरएस' के उपयोग की अनुमति देने वाले सभी पिछले आदेशों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की घोषणा की थी. अब दिल्ली हाईकोर्ट ने जॉनसन एंड जॉनसन की सहायक कंपनी जेएनटीएल कंज्यूमर हेल्थ की याचिका पर एफएसएसएआई के आदेशों पर अंतरिम रोक लगा दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 18-21 अक्टूबर तक सख़्त नियमों के साथ ग्रीन पटाखे फोड़ने की अनुमति दी है. हालांकि विशेषज्ञों ने चेताया कि इससे प्रदूषण पर नगण्य प्रभाव पड़ेगा. पिछले साल इसी कोर्ट ने पटाखों को वायु गुणवत्ता के लिए हानिकारक माना था, पराली जलाने पर वही कोर्ट अब भी सख़्त है. लेकिन ग्रीन पटाखों की अनुमति दी गई है.
हैदराबाद की बालरोग विशेषज्ञ सिवरंजनी संतोष की लंबी क़ानूनी लड़ाई के बाद एफएसएसएआई ने आदेश दिया है कि कोई भी फूड ब्रांड ‘ओआरएस’ शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकता, जब तक उत्पाद डब्लूएचओ के मानकों के अनुरूप न हों. भ्रामक लेबलिंग को रोकने और उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने की दिशा में यह बड़ा क़दम है.
नई दिल्ली में आयोजित भारतीय रूमेटोलॉजी एसोसिएशन के 40वें वार्षिक सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में रूमेटाइड आर्थराइटिस के मामलों की संख्या और गंभीरता, दोनों में बढ़त देखी गई है. जिन लोगों के परिवार में यह बीमारी किसी को नहीं रही, उनमें यह होना ख़तरे की घंटी है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुरुआत में मध्य प्रदेश खाद्य एवं औषधि प्रशासन की एक रिपोर्ट, जिसमें सीरप में डीईजी नहीं पाए जाने का दावा किया गया था, का हवाला देते हुए एथिलीन ग्लाइकॉल मिलावट के आरोपों से इनकार किया था. हालांकि, तमिलनाडु खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग से रिपोर्ट मिलने के बाद मंत्रालय ने सीरप में डीईजी की मौजूदगी की पुष्टि की है.
भारत में फिजियोथेरेपिस्ट अब अपने नाम के आगे 'डॉक्टर' नहीं लगा सकते, क्योंकि वे मेडिकल डॉक्टर के रूप में प्रशिक्षित नहीं हैं. स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने कहा है कि फिजियोथेरेपिस्ट्स द्वारा अपने नाम के आगे 'डॉ' लगाना भारतीय चिकित्सा उपाधि अधिनियम, 1916 का क़ानूनी उल्लंघन होगा.
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया है कि आईसीएमआर और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र द्वारा किए गए अध्ययनों में कोविड-19 टीकाकरण और देश में अचानक हुई मौतों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है.
पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला है कि दिल्ली को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत 42.69 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन इसका एक तिहाई से भी कम ख़र्च किया गया.
राष्ट्रीय राजधानी में भीषण गर्मी की चेतावनी जारी है. इस बीच केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि केंद्र सरकार देश भर में एयर कंडीशनर के तापमान को मानकीकृत करने के लिए नए नियम लाएगी, जिसमें एसी को 20 डिग्री सेल्सियस से कम या 28 डिग्री सेल्सियस से अधिक ठंडा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.