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जेएनयू: प्रदर्शनों को लेकर विद्यार्थियों पर 15 हज़ार रुपये तक का जुर्माना लगाए जाने का आरोप

आरोप है कि छात्रों पर लगाया गया 10,000 से 15,000 रुपये तक का जुर्माना साल 2018 में हुए एक प्रदर्शन को लेकर है, जब अटेंडेंस अनिवार्य करने के ख़िलाफ़ विद्यार्थी सेमिनार कक्ष में जमा हो गए थे. जेएनयू के चीफ प्रॉक्टर रजनीश कुमार मिश्रा ने कहा कि जुर्माना लगाना कोई नई बात नहीं है. उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई की जाती है.

भारतीय कृषि आर्थिकी के विशेषज्ञ और प्रख्यात अर्थशास्त्री अभिजीत सेन का निधन

देश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रमुख विशेषज्ञों में से एक 72 वर्षीय अभिजीत सेन जेएनयू में अर्थशास्त्र पढ़ाया करते थे. सेन ने शिक्षण के अलावा कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर भी अपनी सेवाएं दीं. वे कृषि लागत और मूल्य आयोग के अध्यक्ष और योजना आयोग के सदस्य भी रहे. 

‘हमें आज़ादी तो मिल गई है पर पता नहीं कि उसका करना क्या है’

आज़ादी के 75 साल: हमारी हालत अब भी उस पक्षी जैसी है, जो लंबी क़ैद के बाद पिंजरे में से आज़ाद तो हो गया हो, पर उसे नहीं पता कि इस आज़ादी का करना क्या है. उसके पास पंख हैं पर ये सिर्फ उस सीमा में ही रहना चाहता है जो उसके लिए निर्धारित की गई है.

आज भी ‘ज़ह्हाक’ की सल्तनत में सवाल जुर्म हैं…

मोहम्मद हसन के नाटक ‘ज़ह्हाक’ में सत्ता के उस स्वरूप का खुला विरोध है जिसमें सेना, कलाकार, लेखक, पत्रकार, अदालतें और तमाम लोकतांत्रिक संस्थाएं सरकार की हिमायती हो जाया करती हैं. नाटक का सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुल्क की मौजूदा सत्ता में ‘ज़ह्हाक’ कौन है? क्या हमें आज भी जवाब मालूम है?

जेएनयू ने कई कैंटीन और ढाबा मालिकों को 30 जून तक परिसर ख़ाली करने का निर्देश दिया

दिल्ली जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में कई कैंटीन और ढाबों के मालिकों से लाखों रुपये की बकाया राशि का भुगतान करने और 30 जून तक विश्वविद्यालय परिसर को खाली करने का निर्देश दिया है. इसका विरोध करते हुए आइसा ने आरोप लगाया कि प्रशासन चाहता है कि ये कैंटीन मालिक परिसर ख़ाली कर दें, क्योंकि वे यहां बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाने की योजना बना रहे हैं.

हर विश्वविद्यालय में उन्मादी छात्र होते हैं, जेएनयू भी अलग नहीं है: कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित

जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने एक साक्षात्कार में कहा कि वे विश्वविद्यालय की राष्ट्रविरोधी छवि बदलना चाहती हैं. साथ ही, उन्होंने कहा कि हम करदाताओं के पैसे पर निर्भर हैं और बहुत सारे लोग चाहते हैं कि ‘जेएनयू बंद करो’, पिछले प्रशासन के दौरान घटीं दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के बाद बहुत ज्यादा घृणा है.

रामनवमी पर एबीवीपी ने हैदराबाद विश्वविद्यालय में कथित तौर पर राम मंदिर का निर्माण किया

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा विश्वविद्यालय परिसर के भीतर चट्टानों से निर्मित एक ढांचे में भगवा झंडे के साथ राम और हनुमान की तस्वीरें लगाई गई थीं, साथ ही कथित तौर पर अनुष्ठान भी किए गए थे. अन्य छात्र समूह इसे विश्वविद्यालय के भगवाकरण के प्रयास के तौर पर देख रहे हैं.

एजाज़ अहमद: साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ रहे एक विचारक का जाना

स्मृति शेष: देश के सबसे प्रभावशाली मार्क्सवादी चिंतकों में से एक एजाज़ अहमद का बीते महीने निधन हो गया. अहमद को साहित्य और समाज, इतिहास, अर्थतंत्र और राजनीति के जटिल अंतर्संबंधों की अंतर्दृष्टिपूर्ण व्याख्या के लिए जाना जाता था.

द कश्मीर फाइल्स का सिर्फ एक ही सच है, और वो है मुस्लिमों से नफ़रत

लोग ये बहस कर सकते हैं कि फिल्म में दिखाई गई घटनाएं असल में हुई थीं और कुछ हद तक वे सही भी होंगे. लेकिन किसी भी घटना के बारे में पूरा सच, बिना कुछ भी घटाए, जोड़े और बिना कुछ भी बदले ही कहा जा सकता है. सच कहने के लिए न केवल संदर्भ चाहिए, बल्कि प्रसंग और परिस्थिति बताया जाना भी ज़रूरी है.

दिल्ली दंगा: जेएनयू के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद को ज़मानत देने से अदालत का इनकार

जेएनयू के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद को सितंबर 2020 में दिल्ली पुलिस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा की साज़िश रचने के आरोप में ग़ैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ़्तार किया था. फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में सीएए और एनआरसी के समर्थन और विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी.

जेएनयू: शोध पर्यवेक्षक को बदलने के विरोध में शोधार्थी दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ने इन शोधार्थियों से इस आधार पर अपना शोध पर्यवेक्षक बदलने को कहा कि उनका शोध पर्यवेक्षक तीन साल से भी कम समय में सेवानिवृत्त हो जाएगा. इन शोधकर्ताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि विश्वविद्यालय का यह फैसला अवैध, अनावश्यक और दुर्भावनापूर्ण है.

दिल्ली दंगा: अदालत ने उमर ख़ालिद की ज़मानत याचिका पर आदेश टाला

पुलिस ने दावा किया है कि सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों में शामिल उमर ख़ालिद एवं अन्य ने दिल्ली में दंगों का षड्यंत्र रचा, ताकि दुनिया में मोदी सरकार की छवि को खराब किया जा सके. यूएपीए के तहत अक्टूबर 2020 में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद को गिरफ़्तार किया था. 

जेएनयू के बारे में ग़लत धारणा को बदलना चाहती हूंः नवनियुक्त कुलपति

जेएनयू की पहली महिला कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने पिछले महीने एम. जगदीश कुमार के स्थान पर कुलपति का पदभार संभाला है. एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के बारे में नकारात्मक धारणा को बदलकर इसे बेहतर बनाना होगा. वास्तव में जेएनयू असहमति और विविधता का प्रतिनिधित्व करता है.

दिल्ली दंगे: उमर ख़ालिद की ज़मानत याचिका पर आदेश सुरक्षित, 14 मार्च को अदालत सुनाएगी फैसला

यूएपीए के तहत अक्टूबर 2020 में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद को गिरफ़्तार किया था. यूएपीए के साथ ही इस मामले में उनके ख़िलाफ़ दंगा करने और आपराधिक साजिश रचने के भी आरोप लगाए गए हैं. जून 2021 को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस संबंध में यूएपीए के तहत गिरफ़्तार जेएनयू की छात्रा नताशा नरवाल, देवांगना कलीता और इक़बाल आसिफ़ तन्हा को ज़मानत दे दी थी.

कोर्ट के आदेश के बावजूद उमर ख़ालिद को हथकड़ी लगाकर पेश किया, जेल प्रशासन को नोटिस

उमर ख़ालिद को दिल्ली दंगों संबंधित मामले में पेशी पर हथकड़ी लगाए जाने के ख़िलाफ़ उनके वकीलों की याचिका पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने एक आदेश में कहा कि दिल्ली पुलिस कमिश्नर किसी ज़िम्मेदार वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की निगरानी में जांच के बाद रिपोर्ट दायर कर बताएं कि क्या उमर को हथकड़ी में पेश किया गया, यदि हां तो किस आधार पर.