Jnu

गोरख पांडे: इस दुनिया को जितनी जल्दी संभव हो, बदल देना चाहिए…

पुण्यतिथि विशेष: गोरख पांडे कहते थे कि उनके लिए कविता और प्रेम ही दो ऐसी चीजें थीं, जहां व्यक्ति को मनुष्य होने का बोध होता है. भावनाओं को वे अस्तित्व की निकटतम अभिव्यक्ति मानते थे.

बीबीसी डॉक्यूमेंट्री: डीयू में धारा 144 लगने के बाद हंगामा, कई छात्रों को हिरासत में लिया गया

डीयू के साथ आंबेडकर विश्वविद्यालय में भी छात्र संगठनों ने गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी की भूमिका से संबंधित बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की घोषणा की थी. छात्रों का कहना है कि इसे रोकने के लिए पुलिस बुलवाई गई और बिजली काट दी गई. वहीं, महाराष्ट्र में टिस ने विद्यार्थियों को डॉक्यूमेंट्री दिखाने से मना किया है.

केंद्र के रोक के प्रयासों के बीच विभिन्न राज्यों में बीबीसी डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन जारी

गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी की भूमिका से संबंधित बीबीसी डॉक्यूमेंट्री का भारत में प्रसारण रोकने के लिए केंद्र सरकार हर संभव प्रयास कर रही है, बावजूद इसके गुरुवार को देश में कम से कम तीन जगह- तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस और कोलकाता एवं हैदराबाद में स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इसकी स्क्रीनिंग आयोजित की.

जामिया में बीबीसी डॉक्यूमेंट्री दिखाने की घोषणा के बाद 70 छात्रों को हिरासत में लिया गया: एसएफआई

दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया के गेट पर दंगा रोधी पुलिस तैनात की गई है. जानकारी के अनुसार, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने 70 से अधिक ऐसे छात्रों को हिरासत में लिया है, जबकि पुलिस ने सिर्फ चार छात्रों को हिरासत में लेने की बात कही है. इससे पहले जेएनयू में कथित बिजली कटौती और पथराव के बीच गुजरात दंगों में प्रधानमंत्री की भूमिका से संबंधित बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग हुई थी.

जेएनयू प्रशासन ने छात्रसंघ द्वारा बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन रद्द करने को कहा

बीबीसी की ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ डॉक्यूमेंट्री में बताया गया है कि ब्रिटेन सरकार द्वारा करवाई गई गुजरात दंगों की जांच में नरेंद्र मोदी को सीधे तौर पर हिंसा के लिए ज़िम्मेदार पाया गया था. सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर इसके लिंक ब्लॉक करने का आदेश दिए जाने के बाद कई विश्वविद्यालयों में इसकी स्क्रीनिंग की जा रही है.

झूठी बुनियाद पर इतिहास लिखने में माहिर है जेएनयू: कुलपति

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित ने जेएनयू के इतिहासकारों का ज़िक्र करते हुए कहा कि हम झूठी बुनियाद पर इतिहास नहीं लिख सकते, जो हम पिछले 75 साल से करते आ रहे हैं और मेरा विश्वविद्यालय इसमें बहुत अच्छा रहा है, लेकिन अब इसमें बदलाव दिखने लगा है.

दिल्ली: शोध जमा करने की समयसीमा बढ़ाने को लेकर जेएनयू छात्रों ने यूजीसी के बाहर प्रदर्शन किया

जेएनयू के अंतिम वर्ष के पीएचडी और एमफिल छात्रों को इस महीने के अंत तक शोध प्रबंध जमा करवाने को कहा गया है. छात्रों का कहना है कि कोविड महामारी के चलते बर्बाद हुए समय के एवज में पर्याप्त समय न मिलने के चलते वे इस समयसीमा में थीसिस नहीं दे सकेंगे और उन्हें समय विस्तार दिया जाना चाहिए.

हिंदी साहित्य के मशहूर आलोचक और लेखक मैनेजर पांडेय का निधन

मैनेजर पांडेय हिंदी में मार्क्सवादी आलोचना के प्रमुख हस्‍ताक्षरों में से एक रहे हैं. दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में प्रोफेसर रहने के अलावा उन्होंने बरेली कॉलेज और जोधपुर विश्वविद्यालय में भी प्राध्यापक रहे थे.

जेएनयू: प्रदर्शनों को लेकर विद्यार्थियों पर 15 हज़ार रुपये तक का जुर्माना लगाए जाने का आरोप

आरोप है कि छात्रों पर लगाया गया 10,000 से 15,000 रुपये तक का जुर्माना साल 2018 में हुए एक प्रदर्शन को लेकर है, जब अटेंडेंस अनिवार्य करने के ख़िलाफ़ विद्यार्थी सेमिनार कक्ष में जमा हो गए थे. जेएनयू के चीफ प्रॉक्टर रजनीश कुमार मिश्रा ने कहा कि जुर्माना लगाना कोई नई बात नहीं है. उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई की जाती है.

भारतीय कृषि आर्थिकी के विशेषज्ञ और प्रख्यात अर्थशास्त्री अभिजीत सेन का निधन

देश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रमुख विशेषज्ञों में से एक 72 वर्षीय अभिजीत सेन जेएनयू में अर्थशास्त्र पढ़ाया करते थे. सेन ने शिक्षण के अलावा कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर भी अपनी सेवाएं दीं. वे कृषि लागत और मूल्य आयोग के अध्यक्ष और योजना आयोग के सदस्य भी रहे. 

‘हमें आज़ादी तो मिल गई है पर पता नहीं कि उसका करना क्या है’

आज़ादी के 75 साल: हमारी हालत अब भी उस पक्षी जैसी है, जो लंबी क़ैद के बाद पिंजरे में से आज़ाद तो हो गया हो, पर उसे नहीं पता कि इस आज़ादी का करना क्या है. उसके पास पंख हैं पर ये सिर्फ उस सीमा में ही रहना चाहता है जो उसके लिए निर्धारित की गई है.

आज भी ‘ज़ह्हाक’ की सल्तनत में सवाल जुर्म हैं…

मोहम्मद हसन के नाटक ‘ज़ह्हाक’ में सत्ता के उस स्वरूप का खुला विरोध है जिसमें सेना, कलाकार, लेखक, पत्रकार, अदालतें और तमाम लोकतांत्रिक संस्थाएं सरकार की हिमायती हो जाया करती हैं. नाटक का सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुल्क की मौजूदा सत्ता में ‘ज़ह्हाक’ कौन है? क्या हमें आज भी जवाब मालूम है?

जेएनयू ने कई कैंटीन और ढाबा मालिकों को 30 जून तक परिसर ख़ाली करने का निर्देश दिया

दिल्ली जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में कई कैंटीन और ढाबों के मालिकों से लाखों रुपये की बकाया राशि का भुगतान करने और 30 जून तक विश्वविद्यालय परिसर को खाली करने का निर्देश दिया है. इसका विरोध करते हुए आइसा ने आरोप लगाया कि प्रशासन चाहता है कि ये कैंटीन मालिक परिसर ख़ाली कर दें, क्योंकि वे यहां बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाने की योजना बना रहे हैं.

हर विश्वविद्यालय में उन्मादी छात्र होते हैं, जेएनयू भी अलग नहीं है: कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित

जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने एक साक्षात्कार में कहा कि वे विश्वविद्यालय की राष्ट्रविरोधी छवि बदलना चाहती हैं. साथ ही, उन्होंने कहा कि हम करदाताओं के पैसे पर निर्भर हैं और बहुत सारे लोग चाहते हैं कि ‘जेएनयू बंद करो’, पिछले प्रशासन के दौरान घटीं दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के बाद बहुत ज्यादा घृणा है.

रामनवमी पर एबीवीपी ने हैदराबाद विश्वविद्यालय में कथित तौर पर राम मंदिर का निर्माण किया

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा विश्वविद्यालय परिसर के भीतर चट्टानों से निर्मित एक ढांचे में भगवा झंडे के साथ राम और हनुमान की तस्वीरें लगाई गई थीं, साथ ही कथित तौर पर अनुष्ठान भी किए गए थे. अन्य छात्र समूह इसे विश्वविद्यालय के भगवाकरण के प्रयास के तौर पर देख रहे हैं.