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कोर्ट ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र को फटकारा, कहा- बड़ी मछलियों को पकड़ते नहीं, किसानों को तंग करते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने के लिए बैंक ऑफ महाराष्ट्र को फटकार लगाई और बैंक को किसानों के एकमुश्त निपटान (ओटीएस) प्रस्ताव को स्वीकार करने और उन्हें स्वीकृति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है.

सरकारी नीति के ख़िलाफ़ दिया गया कोई भाषण राजद्रोह नहीं हो सकता: जस्टिस नागेश्वर राव

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एल. नागेश्वर राव ने कहा कि सरकार का कर्तव्य सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय देश के सभी नागरिकों को सुनिश्चित करना है और शीर्ष अदालत नागरिकों को याद दिलाती है कि कोई भी क़ानून से ऊपर नहीं है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक अधिकारों के बारे में जब तक सार्वजनिक चर्चा नहीं होगी और जागरूकता नहीं आएगी, तब तक लोकतंत्र नहीं आएगा.

पूर्व सेना प्रमुखों, नौकरशाहों की राष्ट्रपति, पीएम से हेट स्पीच देने वालों पर कार्रवाई की मांग

हरिद्वार में 17-19 दिसंबर के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा आयोजित ‘धर्म संसद’ में कथित तौर पर मुसलमान एवं अल्पसंख्यकों को ख़िलाफ़ खुलकर नफ़रत भरे भाषण दिए गए, यहां तक कि उनके नरसंहार का आह्वान भी किया गया. इसके बाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी इसी तरह का आयोजन हुआ था.

धर्म संसद आयोजकों पर कोई भी कार्रवाई की जाए, चुनावी लाभ भाजपा को ही मिलेगा

यति नरसिंहानंद ने बताया है कि तथाकथित धर्म संसदें हर छह माह पर आयोजित की जाती रही हैं. तो फिर आगामी एक माह में तीन ‘धर्म संसदें’ आयोजित करने के पीछे क्या रहस्य है, वो भी दो बार उस उत्तर प्रदेश में, जहां विधानसभा चुनाव आसन्न हैं?

हरिद्वार ‘धर्म संसद’ के ख़िलाफ़ दिल्ली में प्रदर्शन; हिंदुत्ववादी नेताओं की गिरफ़्तारी की मांग

वीडियो: उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा एक ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया था, जिसमें कथित तौर पर मुसलमान एवं अल्पसंख्यकों को ख़िलाफ़ खुलकर नफ़रत भरे भाषण दिए गए, यहां तक कि उनके नरसंहार का आह्वान भी किया गया है.

मुस्लिमों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने के सिलसिले में दो और लोगों के ख़िलाफ़ केस

उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर के बीच आयोजित ‘धर्म संसद’ में  हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा मुसलमानों के ख़िलाफ़ कथित तौर पर नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने के सिलसिले में 23 दिसंबर को दर्ज प्राथमिकी में जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी को नामजद किया गया था. अब उसमें स्वामी धरमदास और साध्वी अन्नपूर्णा के नाम जोड़े गए हैं.

हरिद्वार धर्म संसद: नफ़रत के फैलते कारोबार के आगे पुलिस क्यों लाचार है

हरिद्वार में हुई तथाकथित धर्म संसद में कही गई अधिकांश बातें भारतीय क़ानूनों की धारा के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आती हैं, लेकिन अब तक इसे लेकर की गई उत्तराखंड पुलिस की कार्रवाई दिखाती है कि वह क़ानून या संविधान नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ पार्टी के लिए काम कर रही है.

जांच अधिकारी घटिया जांच को छुपाने के लिए आदिवासियों को हिरासत में ले लेते हैं: जस्टिस चंद्रचूड़

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने राजधानी दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि जनजातियों को गै़र-अधिसूचित किए जाने के लगभग 73 वर्षों बाद भी आदिवासी उत्पीड़न और क्रूरता के शिकार होते हैं. भले ही एक भेदभावपूर्ण क़ानून को न्यायालय असंवैधानिक ठहरा दे या संसद निरस्त कर दे, लेकिन भेदभावपूर्ण व्यवहार फ़ौरन नहीं बदलता है. 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीएए-एनआरसी के छह प्रदर्शनकारियों के हिरासत आदेश को ख़ारिज किया

मामला उत्तर प्रदेश के मऊ ज़िले का है, जहां प्रशासन ने 16 दिसंबर 2019 को कथित रूप से एक हिंसक प्रदर्शन में शामिल होने के कारण छह लोगों के ख़िलाफ़ एनएसए के तहत हिरासत आदेश जारी किया था. कोर्ट ने इसे ग़ैरक़ानूनी क़रार दिया है.

प्राथमिकी रद्द करने के लिए हाईकोर्ट ‘मसौदा चार्जशीट’ पर भरोसा नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में यह टिप्पणी गुजरात हाईकोर्ट के उस निर्णय के विरुद्ध दायर अपील पर की, जिसमें उसने राजकोट में एक भूखंड के ख़रीदारों से धन ऐंठने के आरोप में कई लोगों के ख़िलाफ़ दायर प्राथमिकी रद्द कर दी थी. कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने ऐसा करते हुए अपनी शक्तियों की ‘सीमाओं का उल्लंघन’ किया.

क़ानूनी पेशा मुनाफ़े में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि समाज की सेवा के लिए है: सीजेआई एनवी रमना

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने ‘क़ानूनी सेवा दिवस’ के मौक़े पर राष्ट्रीय क़ानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि क़ानून में शिक्षित छात्र समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की आवाज़ बनने के लिए सशक्त हैं. 

हमारा संविधान: अनुच्छेद 22; निवारक हिरासत और गिरफ़्तारी

वीडियो: क्या आप जानते हैं कि जब पुलिस आपको गिरफ़्तार करती है तो उसे 24 घंटे के भीतर आपको निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है? क्या आपको अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने का अधिकार है और क्या यह संवैधानिक अधिकार है? वकील अवनि बंसल निवारक हिरासत (Preventive Arrest) और गिरफ़्तारी को लेकर संविधान के अनुच्छेद 22 के बारे में जानकारी दे रही हैं.

इस समय न्यायपालिका विश्वसनीयता के संकट से जूझ रही है: जस्टिस ओका

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में हाल में नियुक्त किए गए जस्टिस अभय एस. ओका  ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि क़ानूनी पेशे के सदस्यों को न्यायपालिका में देश के नागरिकों का भरोसा बहाल करने की दिशा में काम करना चाहिए. देश में इस समय न्यायाधीशों और जनसंख्या का अनुपात प्रति 10 लाख लोगों के लिए 17 या 18 न्यायाधीश हैं. न्यायाधीशों की कमी की समस्या से निपटा जाना चाहिए और इस अनुपात में सुधार किया जाना चाहिए.

उत्तर प्रदेश: बाबरी मस्जिद पर टिप्पणी करने पर दर्ज रासुका को हाईकोर्ट ने ख़ारिज किया

यह मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी निवासी मोहम्मद फ़ैयाज़ मंसूरी से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने अगस्त 2020 को फेसबुक पर बाबरी मस्जिद को लेकर एक पोस्ट लिखा था, जिसके बाद उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के तहत मामला दर्ज किया गया था.

गोहत्या में एनएसए के तहत गिरफ़्तार तीन लोगों को रिहा करने का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया

ये मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले का है, जहां पिछले साल जुलाई में कथित गोहत्या के आरोप में इरफ़ान, रहमतुल्लाह और परवेज़ को गिरफ़्तार किया गया था. ये पहला मौका नहीं है जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (एनएसए) के इस्तेमाल पर सवाल उठाया है, जो राज्य को बिना औपचारिक आरोप या सुनवाई के गिरफ़्तारी का अधिकार देता है.