Author Archives

दीपक गोस्वामी

संतराम सनोडिया. (फोटो: Special Arrangement)

मध्य प्रदेश: फसल के दाम न मिलने पर किसान ने की थी आत्महत्या, मुआवज़े के लिए भटक रहा है परिवार

मध्य प्रदेश के सिवनी ज़िले के एक किसान ने अक्टूबर 2018 में फसल के दाम न मिलने के चलते आत्महत्या कर ली थी. इसके बाद प्रशासन ने उनके परिवार को 10 लाख रुपये की सहायता राशि दिए जाने की घोषणा की थी, जिसे पाने के लिए उनका परिवार बीते दो सालों से संघर्ष कर रहा है.

एमपीएसडी के बाहर प्रदर्शन करते छात्र. (सभी फोटो: Special Arrangement)

‘हम अभिनय के छात्र हैं और बिना प्रैक्टिकल किए हमारी पढ़ाई पूरी नहीं हो सकती’

भोपाल में मध्य प्रदेश स्कूल ऑफ ड्रामा के एक वर्षीय अभिनय प्रशिक्षण कोर्स के 2019-20 सत्र के विद्यार्थी बीते दो सप्ताह से अधिक समय से प्रबंधन के ख़िलाफ़ आंदोलनरत हैं. उनका कहना है कि कोरोना के चलते उनके बैच को प्रमोशन देकर नया सत्र शुरू किया जा रहा है जबकि उनका प्रशिक्षण अभी तक पूरा नहीं हुआ है.

महेंद्र सिंह धोनी. (फोटो साभार: फेसबुक/@MSDhoni)

महेंद्र सिंह धोनी: पल दो पल का क़िस्सा नहीं, मक़बूल दास्तान

जनवरी 2017 में जबसे महेंद्र सिंह धोनी ने भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी छोड़ी, तबसे करिअर के अंतिम ढाई सालों में उन्हें तारीफ़ से ज़्यादा आलोचना मिली. टीम के हर कमज़ोर प्रदर्शन के बाद उनके संन्यास के कयास लगने शुरू हो जाते, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इन सालों में भी उनकी चमक फ़ीकी नहीं पड़ी थी.

ग्वालियर शहर में लगे होर्डिंग. (फोटो: दीपक गोस्वामी)

क्या कोरोना संक्रमण से बचने के लिए लगाए नियम आम जनता और भाजपा के लिए अलग-अलग हैं

पार्टी बदलने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के पहली बार ग्वालियर पहुंचने पर भाजपा तीन दिवसीय ‘सदस्यता ग्रहण समारोह’ आयोजित कर रही है, जिसमें ग्वालियर-चंबल अंचल के सभी ज़िलों के हज़ारों कार्यकर्ता शामिल होने वाले हैं. कोरोना संक्रमण के प्रसार के मामले में ग्वालियर प्रदेश में तीसरे स्थान पर है.

Corona Modi BJP Leaders

क्या कोरोना के ख़िलाफ़ सरकार की लड़ाई में भाजपा नेता ही सबसे बड़ी बाधा हैं?

बीते चार महीनों में जहां एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार अपने भाषणों में कोरोना वायरस को लेकर वैज्ञानिक रवैया रखने की बात करते नज़र आए, वहीं उन्हीं की पार्टी के नेता और मंत्री इस महामारी को लेकर सर्वाधिक ऊटपटांग बयान, अवैज्ञानिक और हास्यास्पद तर्क देते रहे हैं.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया (फोटो साभार: फेसबुक/@JMScindia)

मध्य प्रदेश: कांग्रेस के टूटते विधायक और सिंधिया के दबाव से मुक्त होने की भाजपा की छटपटाहट

मार्च से अब तक कुल 25 कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल हुए हैं. दो हफ़्ते से भी कम समय में कांग्रेस के तीन और विधायक पार्टी और विधायकी छोड़ भाजपा में आ चुके हैं. भाजपा का दावा है कि अभी और कई कांग्रेसी विधायक पार्टी छोड़कर आएंगे.

(फोटो: दीपक गोस्वामी)

क्रिकेट सम्राट: क्रिकेट के चाहने वालों ने मानो पुराना साथी खो दिया…

क्रिकेट संबंधी हर छोटी-बड़ी जानकारी और आंकड़े सहेजने वाली ‘क्रिकेट सम्राट’ पत्रिका अब से नहीं छपेगी. क़रीब 42 बरसों तक देश में क्रिकेट के चाहने वालों के लिए किसी पसंदीदा उपन्यास-सी प्रिय रही पत्रिका का प्रकाशन लॉकडाउन के चलते हुए घाटे के कारण बंद कर दिया गया है.

Bhopal: Madhya Pradesh Governor Anandiben Patel and Chief Minister Shivraj Chouhan pose for a group photo with the newly inducted ministers of the State Cabinet, after the swearing-in ceremony at Raj Bhawan in Bhopal, Thursday, July 2, 2020. (PTI Photo) (PTI02-07-2020 000089B)

मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार शिवराज सरकार की मुश्किलों का अंत है या शुरुआत?

मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार बनने के तीन महीने बाद हुए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भाजपा के कई नेता अपनी नाराज़गी जता चुके हैं. जानकारों का कहना है कि यह फ़ैसला उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. नतीजों के बाद की परिस्थितियों में मंत्रिमंडल में फिर से फेरबदल होगा.

(फोटो साभार: फेसबुक/ChouhanShivraj)

मध्य प्रदेश: क्या भाजपा का बिना मंत्रिमंडल विस्तार किए सरकार चलाना असंवैधानिक है?

संविधान का अनुच्छेद 164 (1 ए) मुख्यमंत्री समेत कम से कम 12 मंत्रियों के मंत्रिमंडल की बात करता है, लेकिन बीते दो महीनों से शिवराज सिंह चौहान केवल पांच मंत्रियों के साथ सरकार चला रहे हैं. कहा जा रहा है कि उन्हें डर है कि मंत्रिमंडल विस्तार करने पर मंत्री न बन सकने से असंतुष्ट विधायक आगामी राज्यसभा चुनाव में कहीं क्रॉस-वोटिंग न कर दें.

(फोटो: Special Arrangement)

‘वे आत्मनिर्भर भारत बनाना चाहते हैं, पर विदेश से मक्का मंगाकर आत्मनिर्भरता पर आघात कर रहे हैं’

मध्य प्रदेश के सिवनी में किसानों ने आयात के चलते मक्का की फसल की वाजिब क़ीमत न मिलने पर एक ऑनलाइन आंदोलन छेड़ा है, जिसे किसान सत्याग्रह का नाम दिया गया है. कोरोना संक्रमण के दौर में ये लोग पीड़ित किसानों की मांगों और परेशानियों को ऑनलाइन साझा करते हुए अपने लिए समर्थन जुटा रहे हैं.

A team of doctors wearing protective suits check slum dwellers during a house-to-house health survey at Vallabh Nagar during the nationwide lockdown imposed in wake of the coronavirus pandemic in Bhopal Monday April 20 2020. (Photo | PTI)

‘भोपाल में कोरोना से हुई 36 मौतों में से 32 गैस पीड़ित हैं’

गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाले भोपाल ग्रुप ऑफ इंफॉर्मेशन एंड एक्शन और संभावना ट्रस्ट ने भोपाल में अब तक हुई कुल मौतों में से 36 की जानकारी निकाली है, जिसमें सामने आया है कि इनमें से बत्तीस गैस पीड़ित हैं. संगठनों का दावा है कि गैस जनित दुष्प्रभावों के चलते कोरोना का पीड़ितों पर गंभीर असर हो रहा है. इसके बावजूद सरकार इनके लिए आवश्यक क़दम उठाने में कोताही बरत रही है.

(फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: क्या मालवा-निमाड़ अंचल में पैर पसारते कोरोना संक्रमण के लिए इंदौर जिम्मेदार है?

इंदौर और उज्जैन दोनों ही मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ अंचल में बसे हुए हैं. छह अंचलों में विभाजित मध्य प्रदेश में मालवा-निमाड़ ही कोरोना संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है.

Indore: A medic checks the temperature of a stranded student from Kota upon her arrival, during the nationwide lockdown to curb the spread of coronavirus, in Indore, Thursday, April 23, 2020. (PTI Photo)(PTI23-04-2020_000220B)

मध्य प्रदेश में इंदौर के कोरोना का केंद्र बनकर उभरने की वजह क्या है?

कोरोना संक्रमितों की संख्या के लिहाज़ से महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली के बाद चौथा नंबर मध्य प्रदेश का है, जहां तीन चौथाई मामले केवल दो ज़िलों- इंदौर और भोपाल में सामने आए हैं. इसमें भी लगभग 60 फीसदी मामले अकेले इंदौर में मिले हैं.

(फोटो साभार: फेसबुक/ChouhanShivraj)

मध्य प्रदेश: शिवराज सिंह चौहान के लिए वापसी के बाद की राह आसान नहीं है

मध्य प्रदेश में भाजपा की सत्ता वापसी तो हो गई है, लेकिन शिवराज सिंह चौहान के लिए यह कार्यकाल उनके पिछले कार्यकालों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण रहेगा. विश्लेषकों के अनुसार, उन्हें पार्टी में आए बाग़ी विधायकों को साधने से लेकर उन मुद्दों से भी निपटना है, जिन पर वे कांग्रेस को घेरते आए हैं.

शिवराज सिंह चौहान के साथ कमलनाथ. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: क्या उपचुनावों में जीत कांग्रेस को फिर सत्ता में ला सकती है?

आगर-मालवा और जौरा के विधायकों के निधन के कारण विधानसभा की दो सीटें पहले से ही खाली थीं. अब कांग्रेस के बागी 22 विधायकों के इस्तीफ़े के बाद राज्य में 24 सीटों पर उपचुनाव होने हैं.