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दीपक गोस्वामी

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री​ शिवराज सिंह चौहान. (फोटो: पीटीआई/टि्वटर)

कर्नाटक की सियासी उठापटक के बाद क्या अगला नंबर मध्य प्रदेश का है?

मध्य प्रदेश में जिस दिन से कांग्रेस की सरकार बनी, उस दिन से भाजपा इसे अल्पमत में बता रही है. कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने फिर कहा कि पार्टी हाईकमान का आदेश हो तो एक दिन में सरकार गिर जाएगी, लेकिन इसके बाद एक विधेयक को लेकर भाजपा के दो विधायकों के कांग्रेस के खेमे में खड़े नज़र आने से स्थितियां बदलती दिख रही हैं.

(फोटो साभार: आईसीसी)

क्या आईसीसी के अस्पष्ट नियम खेल के ख़िलाफ़ जा रहे हैं?

2019 में क्रिकेट के इतिहास में पहली बार बाउंड्री की गणना के आधार पर विश्वकप विजेता की घोषणा की गई, जिसके बाद से आईसीसी के नियमों की आलोचना हो रही है.

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युवराज सिंह: टीम में अपनी जगह बनाने के संघर्ष में ही पूरा करिअर बीत गया

विशेष रिपोर्ट: युवराज भले ही बड़े खिलाड़ी रहे लेकिन करिअर के शुरुआती दौर में उनका प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं था. विकल्पों के अभाव के चलते वे टीम में चुने जाते रहे. अगर कोई और दौर होता तो वे शायद करिअर के शुरुआती दौर में ही टीम से रुख़सत हो गए होते.

साल 2019 के क्रिकेट विश्वकप में शामिल सभी टीमों के कप्तान. (फोटो साभार: आईसीसी)

क्रिकेट वर्ल्डकप: जिस टूर्नामेंट में सिर्फ़ 10 देश शामिल हों, उसे विश्वकप कहना कितना सही है?

इंग्लैंड में खेले जा रहे 12वें विश्वकप में केवल दस देश खेल रहे हैं, जिनमें से पांच तो दक्षिण एशियाई देश हैं. इसलिए इस टूर्नामेंट के ‘विश्वकप’ कहलाए जाने पर प्रश्न उठाए जा रहे हैं

Bhopal: Congress State President Kamal Nath, party leaders Jyotiraditya Scindia, Digvijaya Singh and other leaders display victory sign after the party's win in state Assembly elections, at PCC headquarters, in Bhopal, Wednesday early morning, Dec. 12, 2018. (PTI Photo)(PTI12_12_2018_000055)

मध्य प्रदेश: कांग्रेस ने लोकसभा के इतिहास का सबसे बुरा प्रदर्शन क्यों किया?

15 साल बाद मध्य प्रदेश की सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाने वाली कांग्रेस लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 29 सीटों में से सिर्फ़ एक सीट पर ही जीत दर्ज कर सकी.

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व्यापमं पर भाजपा को घेरने वाली कांग्रेस ने घोटाले के एक संदिग्ध को उम्मीदवार क्यों बनाया?

एक ओर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनावी रैली में व्यापमं घोटाले की जांच कराने की बात करते हैं, तो दूसरी ओर पार्टी ने इंदौर लोकसभा सीट से उन पंकज संघवी को प्रत्याशी बनाया है जिन पर घोटाले में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं.

Chitrakoot: Congress President Rahul Gandhi with MPCC President Kamal Nath (2nd L), party MP Jyotiraditya Scindia (3rd R) and other leaders during a public meeting in Chitrakoot, Thursday, Sept 27, 2018. (AICC Photo via PTI) (PTI9_27_2018_000139B)

मध्य प्रदेश: क्या कांग्रेस मालवांचल में विधानसभा चुनाव में मिली सफलता दोहरा पाएगी?

मध्य प्रदेश के मालवांचल की आठ सीटों- देवास, धार, खंडवा, खरगोन, इंदौर, मंदसौर, रतलाम और उज्जैन पर 19 मई को मतदान है. 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने ये सभी सीटें जीतकर इतिहास रचा था, लेकिन विधानसभा चुनावों में पार्टी को इस क्षेत्र से ज़ोरदार झटका लगा था.

Bhopal: Congress Madhya Pradesh President Kamal Nath and AICC General Secretary Digvijay Singh arrive to chair Madhya Pradesh Congress Coordination Committee meeting at PCC Headquarters, in Bhopal, on Thursday. (PTI Photo) (PTI5_24_2018_000029B)

मध्य प्रदेश: तीसरे चरण में जिन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं क्या कांग्रेस वहां अपना प्रदर्शन सुधार पाएगी

विशेष रिपोर्ट: मध्य प्रदेश में तीसरे चरण के लिए 8 सीटों पर होने वाले मतदान में चंबल क्षेत्र की चार (ग्वालियर, गुना, मुरैना, भिंड), मध्य क्षेत्र की तीन (भोपाल, विदिशा, राजगढ़) और बुंदेलखंड की एक (सागर) सीट शामिल हैं. गुना को छोड़कर बाकी की सात सीटों पर भाजपा का क़ब्ज़ा है.

भोपाल से भाजपा की उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर और कांग्रेस के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: भोपाल में हिंदुत्व का हवन, ज़रूरी मुद्दे स्वाहा

ग्राउंड रिपोर्ट: भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा ने मालेगांव बम धमाकों की आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ चुनाव मैदान में उतारा है.

Jabalpur: A shopkeeper poses with political parties' campaign materials ahead of Lok Sabha elections 2019, in Jabalpur, Wednesday, March 13, 2019. (PTI Photo) (PTI3_13_2019_000028B)

मध्य प्रदेश: क्यों आरक्षित सीटें प्रदेश में लोकसभा चुनावों के नतीजों के लिहाज़ से अहम हैं

मध्य प्रदेश की कुल 29 लोकसभा सीटों में से 10 अनसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित हैं. 2014 में भाजपा ने इन सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी. लेकिन इस बार उसकी हालत पतली है. इसलिए आरक्षित सीटों पर 75 फीसदी सांसदों के टिकट काट दिए हैं, जबकि अनारक्षित सीटों पर केवल 33 फीसदी ही टिकट काटे गए हैं.

केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश की मुरैना लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र सिंह तोमर. (फोटो साभार: फेसबुक)

मध्य प्रदेश: मोदी सरकार में मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को क्यों अपनी सीट बदलनी पड़ी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्रों में से एक केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मध्य प्रदेश की ग्वालियर लोकसभा सीट से सांसद हैं, लेकिन इस बार वे ग्वालियर के बजाय मुरैना संसदीय क्षेत्र से मैदान में हैं.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री​ शिवराज सिंह चौहान. (फोटो: पीटीआई/टि्वटर)

मध्य प्रदेश: दूसरे चरण के चुनाव में किसका पलड़ा भारी है?

मध्य प्रदेश के दूसरे चरण के चुनाव में बुंदेलखंड क्षेत्र की दमोह, खजुराहो और टीकमगढ़, विंध्य क्षेत्र की रीवा और सतना एवं मध्य क्षेत्र की बैतूल और होशंगाबाद लोकसभा सीटों पर चुनाव हैं.

प्रज्ञा सिंह ठाकुर और दिग्विजय सिंह. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: पहले चरण के मतदान में कौन किस पर भारी?

भोपाल में कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह और भाजपा उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर के बीच मुकाबला इतना हाई प्रोफाइल हो गया है कि राज्य की अन्य सीटों पर चुनावी चर्चा ग़ायब हो गई है, जबकि प्रदेश में पहले चरण के मतदान में राज्य की राजनीति के लिहाज़ से महत्वपूर्ण कई सीटें शामिल हैं.

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क्या भाजपा मध्य प्रदेश में फिर से 2014 का प्रदर्शन दोहराने की स्थिति में है?

राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा दोनों ही लोकसभा चुनावों में अच्छे प्रदर्शन के बढ़-चढ़कर दावे कर रहे हैं. कांग्रेस 20 से अधिक सीटों पर तो भाजपा सभी 29 सीटों पर जीत मिलने का दावा कर रही है, लेकिन दोनों के दावे हक़ीक़त से कोसों दूर हैं.

ग्वालियर में दलित समुदाय की ओर से 2 अप्रैल को बुलाए गए भारत बंद के दौरान मारे दीपक जाटव की बरसी पर जुटे परिजन व अन्य. (फोटो: दीपक गोस्वामी)

मध्य प्रदेश: ‘भारत बंद’ को एक साल बीत गए, सरकार बदल गई, लेकिन इंसाफ़ नहीं मिला

ग्राउंड रिपोर्ट: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पिछले साल 2 अप्रैल को ‘भारत बंद’ के दौरान हुए उपद्रव में राकेश टमोटिया और दीपक जाटव की गोली लगने से मौत हो गई थी.

Bhopal: Senior Congress leader Digvijay Singh interacts with the media, at PCC headquarters in Bhopal, Monday, Nov. 19, 2018. (PTI Photo) (PTI11_19_2018_000128B)

क्या भोपाल से चुनाव लड़ाकर दिग्विजय सिंह को बलि का बकरा बनाया जा रहा है?

35 सालों से न जीती गई भोपाल सीट पर दिग्विजय सिंह को उतारने के पीछे केंद्रीय नेतृत्व से अधिक मुख्यमंत्री कमलनाथ की मंशा बताई जा रही है. विश्लेषक मानते हैं कि दिग्विजय की हार या जीत से फायदा कमलनाथ का ही है. जीत दिग्विजय को दिल्ली पहुंचाएगी, जिससे राज्य की राजनीति में उनका हस्तक्षेप कम होगा और हार ज़ाहिर तौर पर उनका क़द कम कर देगी.

Bhopal: Madhya Pradesh Chief Minister Shivraj Singh Chouhan addresses a press conference, at BJP State headquarters in Bhopal, Wednesday, Dec. 12, 2018. BJP State President Rakesh Singh is also seen.(PTI Photo)(PTI12_12_2018_000200)

वो कौन से कारण हैं जिनकी वजह से मध्य प्रदेश में चूक गए चौहान

इस विधानसभा चुनाव में जितनी अधिक सीटें कांग्रेस ने पाई हैं, उतनी ही संख्या में भाजपा ने सीटें गंवाई हैं. पिछले चुनावों में कांग्रेस को 58 और भाजपा को 165 सीटें मिली थीं. इस बार कांग्रेस की सीटों में 56 की बढ़ोतरी हुई है. उसकी सीटें 114 हो गई हैं. वहीं, भाजपा की सीटें 56 कम होकर 109 रह गई हैं.

(फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव: 10 सीटों पर हार-जीत का अंतर 1,000 से भी कम रहा

इन 10 सीटों में से 7 कांग्रेस ने जीतीं और 3 भाजपा ने. बहुमत से 7 सीट दूर रही भाजपा अगर इन पर जीत दर्ज कर लेती तो तस्वीर कुछ और होती.

Bhopal: Congress State President Kamal Nath, party leaders Jyotiraditya Scindia, Digvijaya Singh and other leaders display victory sign after the party's win in state Assembly elections, at PCC headquarters, in Bhopal, Wednesday early morning, Dec. 12, 2018. (PTI Photo)(PTI12_12_2018_000055)

मध्य प्रदेश में सरकार बनाने को तैयार कांग्रेस के कई बड़े नेता चुनाव हार गए

230 सीटों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में 114 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी कांग्रेस के कई दिग्गजों को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा.

Bhopal: Madhya Pradesh Chief Minister Shivraj Singh Chouhan addresses a press conference at his residence before submitting his resignation to Governor Anandiben Patel, in Bhopal, Wednesday, Dec. 12, 2018. (PTI Photo)(PTI12_12_2018_000083)

मध्य प्रदेश: चुनाव मैदान में उतरे शिवराज के 27 में से 13 मंत्री हार गए

मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के मंत्रिमंडल में उन्हें मिलाकर कुल 32 मंत्री थे, जिनमें से 27 ने चुनाव लड़ा था. 14 मंत्री अपनी सीट बचाने में सफल रहे. इनमें से कई काफी जद्दोजहद के बाद जीत दर्ज कर सके.

बुदनी बस स्टैंड. (फोटो: दीपक गोस्वामी/द वायर)

बुदनी: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र का क्या है हाल?

मध्य प्रदेश की बुदनी सीट से तीन बार विधायक रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर यहीं से चुनाव मैदान में हैं. कांग्रेस ने उनके ख़िलाफ़ पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को उतारा है.

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‘शिवराज सरकार उन पुलिसवालों को बचा रही है, जिनकी गोली से किसानों की जान गई’

साक्षात्कार: मध्य प्रदेश में किसानों की बदहाली किसी से छिपी नहीं. बीते साल हुआ मंदसौर गोलीकांड इसका गवाह है. राज्य में किसान आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, बावजूद इसके प्रदेश में किसानों के मुद्दों पर राजनीतिक दलों ने कोई ख़ास बात नहीं की. किसानों और कृषि के मुद्दों पर राज्य में लंबे समय से काम कर रहे किसान नेता और राष्ट्रीय किसान मज़दूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा (कक्का जी) से दीपक गोस्वामी की बातचीत.

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शिवराज सिंह चौहान के दावों के उलट नर्मदा की सेहत और बिगड़ती जा रही है

ग्राउंड रिपोर्ट: मध्य प्रदेश के अमरकंटक से निकलने वाली नर्मदा नदी तब से ही चुनावी सुर्ख़ियों में है जब से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘नर्मदा सेवा यात्रा’ लेकर निकले थे. नर्मदा की सफाई, संरक्षण और नदी किनारे पौधारोपण व अवैध रेत खनन पर रोकथाम को लेकर उन्होंने अनगिनत घोषणाएं कीं, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही नज़र आती है.

उचित मुआवज़े की मांग को लेकर भोपाल गैस कांड के पीड़ित मुहिम चला रहे हैं कि जो मुआवज़ा देने का आश्वासन शपथ पत्र देगा वही हमारा वोट लेगा.

भोपाल गैस कांड और उसके लाखों पीड़ित मध्य प्रदेश में चुनावी मुद्दा क्यों नहीं हैं?

ग्राउंड रिपोर्ट: भोपाल में यूनियन कार्बाइड का कचरा भूजल के रास्ते शहर की ज़मीन में ज़हर घोल रहा है. लाखों लोगों की ज़िंदगी दांव पर लगी है लेकिन प्रदेश की राजनीति में मुख्य मुक़ाबले में रहने वाले दोनों दल- भाजपा और कांग्रेस ने गैस पीड़ितों को लेकर चुप्पी साध रखी है.

एक रैली के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया व अन्य (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: क्यों राहुल गांधी चुनाव में पैराशूट उम्मीदवार न उतारने के अपने वादे से पलट गए?

विशेष रिपोर्ट: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भोपाल में आयोजित कार्यकर्ता संवाद के दौरान कहा था कि विधानसभा चुनाव के ऐन समय पर दल बदलकर कांग्रेस में आने वाले नेताओं को पार्टी टिकट नहीं देगी लेकिन अब पार्टी ने दर्जनभर दलबदलुओं को अपना प्रत्याशी बनाया है.

मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव. (फोटो साभार: ट्विटर)

शिवराज ने मुंगेरीलाल के हसीन सपने दिखाकर मध्य प्रदेश पर 15 साल तक राज किया: अरुण यादव

साक्षात्कार: मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ख़िलाफ़ बुदनी सीट से चुनाव मैदान में उतारा है. मुख्यमंत्री से उनकी चुनावी भिड़ंत और प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति पर दीपक गोस्वामी की उनसे बातचीत.

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जिस भाजपा को लोगों ने त्याग और बलिदान से बनाया, उसमें विकृतियां आ गई हैं: सरताज सिंह

साक्षात्कार: मध्य प्रदेश में भाजपा के वरिष्ठ नेता सरताज सिंह ने पिछले दिनों पार्टी से अपना चार दशकों पुराना संबंध तोड़ लिया और कांग्रेस में शामिल हो गए. सरताज सिंह भाजपा से पांच बार सांसद रहे थे और दो बार विधायक. वे केंद्र और राज्य सरकारों में मंत्री भी रहे. कभी कोई चुनाव हारे नहीं. इस बार वे मध्य प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष सीतासरण शर्मा के सामने कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं. उनसे दीपक गोस्वामी की बातचीत.

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मध्य प्रदेश: परिवारवाद की आलोचना करने वाली भाजपा अपने गिरेबां में क्यों नहीं झांकती

विशेष रिपोर्ट: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जहां भाजपा ने क़रीब 20 प्रतिशत टिकट स्थापित नेताओं के परिजनों को बांटे हैं, वहीं कांग्रेस ने ऐसे 10 प्रतिशत उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव (फोटो: द वायर)

किसी भी स्थिति में कांग्रेस को जोगी का समर्थन नहीं लेना चाहिए: नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव

साक्षात्कार: दीपक गोस्वामी से बातचीत में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा, ‘अच्छा हुआ कि अजीत जोगी ने अलग रास्ता पकड़ लिया. हमें विभीषण से मुक्ति मिली, हम बहुत खुश हैं.’

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जोगी के जाने से छत्तीसगढ़ में कांग्रेस मज़बूत हुई, वे भाजपा के लिए काम करते थे: भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ में साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी, 15 साल के भाजपा शासन और राज्य की विभिन्न समस्याओं और चुनौतियों को लेकर प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भूपेश बघेल से दीपक गोस्वामी की बातचीत.

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, मुख्यमंत्री रमन सिंह और अजीत जोगी. (फोटो साभार: फेसबुक)

छत्तीसगढ़: पहले चरण में जिन 18 सीटों पर चुनाव है, वहां किसका पलड़ा भारी है?

विशेष रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ की उन 18 विधानसभा सीटों का गणित, जिन पर पहले चरण में 12 नवंबर को मतदान होने वाले हैं.

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह. (फाइल फोटो: पीटीआई)

दस साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह इतने सन्नाटे में क्यों हैं?

विशेष रिपोर्ट: मध्य प्रदेश में कांग्रेस के आख़िरी मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह चुनाव प्रचार से पूरी तरह से ग़ायब हैं. क्या उन्हें हाशिये पर धकेला जा चुका है या फिर उन्हें पर्दे के पीछे रखना चुनावी रणनीति का हिस्सा है?

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी. (फोटो साभार: पीटीआई/फेसबुक)

मध्य प्रदेश: भाजपा और कांग्रेस की हिंदुत्ववादी सियासत के बीच विकास के मुद्दे कहीं गुम से गए हैं

ग्राउंड रिपोर्ट: भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही मध्य प्रदेश को हिंदुत्व की प्रयोगशाला में तब्दील कर दिया है. विस्थापन, आदिवासी अधिकार, कुपोषण, भुखमरी, खेती-किसानी जैसे मुद्दों पर कोई भी बात नहीं कर रहा है.

गुलाब सिंह किरार. (फोटो साभार: फेसबुक)

मध्य प्रदेश: व्यापमं घोटाले के आरोपी पूर्व मंत्री को राहुल गांधी ने दिलाई कांग्रेस की सदस्यता

व्यापमं घोटाले को लेकर सीबीआई द्वारा डॉ. गुलाब सिंह किरार और उनके बेटे ​के ख़िलाफ़ केस दर्ज किए जाने के बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था.

मध्य प्रदेश में जनता का सुझाव मांगने के लिए भाजपा की ओर से लगाए गए होर्डिंग. (फोटो: दीपक गोस्वामी/द वायर)

लोगों की राय से मध्य प्रदेश को समृद्ध बनाने की याद भाजपा को 15 साल बाद क्यों आई?

ग्राउंड रिपोर्ट: भाजपा की मध्य प्रदेश इकाई ने चुनावी माहौल में ‘समृद्ध मध्य प्रदेश’ अभियान की शुरुआत की है जिसके तहत प्रदेश की जनता से सरकार बनने पर शासन कैसे चलाया जाये, इस संबंध में सुझाव मांगे जा रहे हैं.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

हर दिन 92 बच्चों की मौत के बावजूद मध्य प्रदेश में कुपोषण चुनावी मुद्दा क्यों नहीं है?

ग्राउंड रिपोर्ट: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2016 से जनवरी 2018 के बीच राज्य में 57,000 बच्चों ने कुपोषण के कारण दम तोड़ दिया था. कुपोषण की वजह से ही श्योपुर ज़िले को भारत का इथोपिया कहा जाता है.

EDS PLS TAKE NOTE OF THIS PTI PICK OF THE DAY::::::::: Bengaluru: Congress leader Sonia Gandhi with Bahujan Samaj Party (BSP) leader Mayawati and Congress President Rahul Gandhi during the swearing-in ceremony of JD(S)-Congress coalition government in Bengaluru, on Wednesday. (PTI Photo/Shailendra Bhojak)(PTI5_23_2018_000183A)(PTI5_23_2018_000202B)

क्यों मध्य प्रदेश में बसपा के साथ गठबंधन न हो पाना कांग्रेस के लिए ​चिंताजनक नहीं है

विशेष रिपोर्ट: आंकड़े बताते हैं कि अगर बसपा के साथ गठबंधन हो भी जाता तो भी कांग्रेस को कोई ख़ास फायदा नहीं मिलता.

Rahul Gandhi Bhopal Visit Photo ANI-Featured

क्या मध्य प्रदेश में कमलनाथ की कांग्रेस शिवराज सरकार को सत्ता से बेदख़ल करने की स्थिति में है?

विशेष रिपोर्ट: मध्य प्रदेश में पिछले तीन विधानसभा चुनाव हारकर 15 सालों से वनवास भोग रही कांग्रेस इस बार सत्ता में वापसी करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है. लेकिन, सुर्ख़ियों में पार्टी की अंदरूनी उठापटक ही हावी है.

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क्या मध्य प्रदेश में कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व का फॉर्मूला आज़माने जा रही है?

मध्य प्रदेश में सरकार बनने पर कांग्रेस ने 23 हज़ार पंचायतों में गोशाला निर्माण की घोषणा की है. साथ ही नर्मदा परिक्रमा पथ निर्माण, राम गमन पथ निर्माण करने जैसी घोषणाएं इशारा करती हैं कि कांग्रेस मध्य प्रदेश में भी गुजरात चुनाव की तरह सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर है.