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दीपक गोस्वामी

क्या भारतीय महिला क्रिकेट के आगे बढ़ने की राह में बीसीसीआई ही सबसे बड़ा रोड़ा है

विशेष रिपोर्ट: महिला क्रिकेट की कम लोकप्रियता के लिए हमेशा व्यूअरशिप यानी उसे कम देखे जाने को ज़िम्मेदार बताया जाता है. इसके बावजूद भारतीय महिला क्रिकेट टीम के पहली बार हो रहे डे-नाइट टेस्ट मैच के दिनों में ही बीसीसीआई ने आईपीएल मैच रखे हैं. आंकड़े दिखाते हैं कि बीसीसीआई में महिला क्रिकेट का विलय होने के बाद से टीम को न सिर्फ खेलने के कम मौके मिले, बल्कि उनके मैच भी ऐसे दिन हुए जब पुरुष टीम भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रही थी.

भोपाल गैस पीड़ित विधवाओं को पेंशन देने की घोषणा हक़ीक़त में कब बदलेगी?

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दिसंबर 1984 में हुई गैस त्रासदी ने तमाम महिलाओं से उनके पति को छीनकर उन्हें बेसहारा बना दिया था. उनकी आर्थिक मदद के लिए पेंशन योजना शुरू की गई थी, जिस पर दिसंबर 2019 से राज्य सरकार ने रोक लगा दी है. इसे दोबारा शुरू करने की घोषणा तो लगातार की जा रही हैं, लेकिन कोरोना काल में बुरी तरह से प्रभावित ये विधवा महिलाएं अब तक इससे महरूम हैं.

मध्य प्रदेश: वन विभाग की अधिकारी को क्या रेत खनन माफिया पर नकेल कसने की सज़ा मिली है

विशेष रिपोर्ट: मुरैना ज़िले के राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में बतौर अधीक्षक तैनात श्रद्धा पांढरे ने अप्रैल में पदभार संभालने के बाद से ही क्षेत्र के रेत खनन माफिया के ख़िलाफ़ लगातार कार्रवाई की. इस दौरान उन पर ग्यारह हमले भी हुए. अब तीन महीनों के कार्यकाल के बाद ही ‘रूटीन कार्रवाई’ बताते हुए उनका तबादला कर दिया गया.

मध्य प्रदेश: चार साल के कार्यकाल में आठ तबादले पा चुके आईएएस अफ़सर को लेकर बवाल क्यों मचा है

मध्य प्रदेश कैडर के 2014 बैच के आईएएस अधिकारी लोकेश जांगिड़ अप्रैल 2021 में बड़वानी के अपर कलेक्टर नियुक्त हुए थे, जिसके 42 दिनों के भीतर ही उनका तबादला हो गया. राज्य के आईएएस संघ के एक ऑनलाइन ग्रुप चैट के आधार पर कहा जा रहा है कि तबादले की असली वजह कलेक्टर के भ्रष्टाचार पर जांगिड़ का आपत्ति जताना था. मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी का भी नाम आया है.

मध्य प्रदेश: पर्यावरण दिवस पर वन बचा रहे शिवराज बक्सवाहा के जंगलों की बर्बादी पर मौन क्यों हैं

बुंदेलखंड क्षेत्र में हीरा खनन के लिए छतरपुर ज़िले के बक्सवाहा जंगल के एक बड़े हिस्से में लगे दो लाख से अधिक पेड़ काटे जाने की योजना है, जिसका व्यापक स्तर पर विरोध हो रहा है. विडंबना यह है कि बीते दिनों पर्यावरण बचाने की कसमें खाने वाले सत्ता और विपक्ष के अधिकांश नेता इसे लेकर चुप्पी साधे हुए हैं.

मध्य प्रदेश: क्या सरकारी अव्यवस्थाओं के चलते कोविड से अधिक जानलेवा साबित हो रहा है ब्लैक फंगस

देशभर में कोरोना संक्रमितों या इससे उबर चुके लोगों में ब्लैक फंगस संक्रमण देखा जा रहा है, पर मध्य प्रदेश में स्थिति बेहद ख़राब है. लगातार कई शहरों में बढ़ते मामलों और मौत की ख़बरों के बीच दवा और इंजेक्शन का अभाव तो बना ही है, वहीं सरकार को अब तक राज्य में आए ऐसे कुल मामलों की जानकारी तक नहीं है.

छत्तीसगढ़: क्या नक्सलवाद से जुड़ी सरकारी योजनाएं एक छलावा बनकर रह गई हैं

विशेष रिपोर्ट: साल 2004 में छत्तीसगढ़ की तत्कालीन रमन सिंह सरकार ने ‘नक्सल पीड़ित पुनर्वास योजना’ शुरू करते हुए नक्सल पीड़ित व्यक्तियों/परिवारों व आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और पुनर्वास की बात कही थी. योजना के पात्र व्यक्तियों का कहना है कि इसकी ज़मीनी हक़ीक़त कागज़ों पर हुए वादों से बिल्कुल अलग है.

‘सालों के संघर्ष के बाद भर्ती परीक्षा हो, जिसमें फ़र्ज़ीवाड़ा हो जाए तो बेरोज़गार युवा क्या करेगा’

विशेष रिपोर्ट: मध्य प्रदेश में बीते महीने कृषि विभाग के पदाधिकारियों के 863 पदों पर भर्ती की परीक्षा हुई थी. परिणाम आने के बाद टॉपर्स छात्रों के एक ही कॉलेज-क्षेत्र-समुदाय से होने से लेकर एक जैसे प्राप्तांक और ग़लतियों संबंधी कई सवाल उठे, जिसे लेकर ग्वालियर एग्रीकल्चर कॉलेज के छात्र इसे दूसरा व्यापमं घोटाला कहते हुए क़रीब महीने भर से आंदोलनरत हैं.

‘विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस गांव के पानी को दूषित बताती थी, पर सत्ता में आते ही मुकर गई’

विशेष रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद ज़िले के सुपेबेड़ा गांव के लोगों के अनुसार बीते डेढ़ दशक में भूजल प्रदूषण के कारण सवा सौ से अधिक लोग गुर्दे की बीमारी के चलते जान गंवा चुके हैं. ग्रामीणों के मुताबिक़ कांग्रेस ने सरकार बनने पर शुद्ध पानी, मुआवज़े और इलाज का वादा किया था पर दो साल बीत जाने के बाद भी ऐसा नहीं हुआ.

क्यों शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश को उग्र हिंदुत्व की राह पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं

विशेष रिपोर्ट: मध्य प्रदेश में बीते कुछ महीनों में नए धर्मांतरण क़ानून, कई शहरों में सांप्रदायिक तनाव, कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी की गिरफ़्तारी समेत कई घटनाएं शिवराज सरकार का बदला हुआ रूप दिखा रही हैं.

मध्य प्रदेश: ‘ज़हरीली शराब से 24 मौतों के बाद सरकार जागी, पहले कार्रवाई करती तो कोई मरता नहीं’

ग्राउंड रिपोर्ट: मुरैना ज़िले के मानपुर, छैरा समेत आसपास के कुछ गांवों में बीते हफ़्ते ज़हरीली शराब से 24 लोगों की मौत हो गई. इसके बाद ज़िले के ही तीन अन्य गांवों में पांच और लोगों की जान गई. ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में फल-फूल रहे अवैध शराब के धंधे के बारे में कई शिकायतें कीं, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया.

‘अस्पताल की गाड़ी मोहल्ले में ऐलान कर रही थी कि टीका लगवा लो पैसे मिलेंगे, सो हम चले गए’

विशेष रिपोर्ट: भोपाल के पीपुल्स अस्पताल पर आरोप है कि उसने गैस त्रासदी के पीड़ितों समेत कई लोगों पर बिना जानकारी दिए कोरोना की वैक्सीन के ट्रायल किए, जिसके बाद तबियत बिगड़ने पर उनका निशुल्क इलाज भी नहीं किया गया. अस्पताल और स्वास्थ्य मंत्री ने ऐसा होने से इनकार किया है.

बिहार: क्या एआईएमआईएम को ‘वोटकटवा’ कहने के दावे में कोई दम है?

विशेष रिपोर्ट: बिहार चुनावों में असद्दुदीन ओवैसी की एआईएमआईएम के पांच सीटें जीतने के बाद से सत्ता पाने से वंचित रह गए महागठबंधन के घटक दलों के नेता लगातार ओवैसी पर निशाना साधते हुए उन्हें भाजपा की ‘बी’ टीम क़रार दे रहे हैं. हालांकि आंकड़े जो तस्वीर दिखा रहे हैं, वो इन नेताओं के दावों से उलट है.

मध्य प्रदेश उपचुनाव में भाजपा की जीत सिंधिया के राजनीतिक भविष्य को क्या दिशा देगी

28 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव भाजपा सरकार को बचाने की दृष्टि से ही अहम नहीं था बल्कि अपने कई समर्थकों सहित कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया का राजनीतिक भविष्य भी दांव पर था. उपचुनाव में उनके कुल 19 में से 13 समर्थक जीत हासिल करने में सफल रहे हैं.

बिहार चुनाव: नीतीश कुमार के मन में क्या है

विशेष रिपोर्ट: नीतीश कुमार इस समय अपने राजनीतिक जीवन के एक कठिन चुनाव का सामना कर रहे हैं. एक तरफ तेजस्वी यादव आक्रामक तरीके से उन पर निशाना साध रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिस एनडीए गठबंधन का वे हिस्सा हैं, वहां भी उनके लिए सब कुछ ठीक नहीं है.