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दीपक गोस्वामी

(फोटो साभार: फेसबुक/ChouhanShivraj)

मध्य प्रदेश: शिवराज सिंह चौहान के लिए वापसी के बाद की राह आसान नहीं है

मध्य प्रदेश में भाजपा की सत्ता वापसी तो हो गई है, लेकिन शिवराज सिंह चौहान के लिए यह कार्यकाल उनके पिछले कार्यकालों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण रहेगा. विश्लेषकों के अनुसार, उन्हें पार्टी में आए बाग़ी विधायकों को साधने से लेकर उन मुद्दों से भी निपटना है, जिन पर वे कांग्रेस को घेरते आए हैं.

शिवराज सिंह चौहान के साथ कमलनाथ. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: क्या उपचुनावों में जीत कांग्रेस को फिर सत्ता में ला सकती है?

आगर-मालवा और जौरा के विधायकों के निधन के कारण विधानसभा की दो सीटें पहले से ही खाली थीं. अब कांग्रेस के बागी 22 विधायकों के इस्तीफ़े के बाद राज्य में 24 सीटों पर उपचुनाव होने हैं.

New Delhi: Former Congress leader Jyotiraditya Scindia greets as he arrives to join Bharatiya Janata Party (BJP), at party headquarters in New Delhi, Wednesday, March 11 , 2020. (PTI Photo/Arun Sharma) (PTI11-03-2020_000124B)

ज्योतिरादित्य सिंधिया के पाला बदलने से भाजपा-कांग्रेस और ख़ुद उन्हें क्या हासिल होगा?

कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजनीतिक भविष्य को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. एक सवाल ये भी है कि क्या भाजपा में भी उनका वही रुतबा क़ायम रह पाएगा, जो कांग्रेस में था?

मुख्यमंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ शिवराज सिंह चौहान. (फोटो: रॉयटर्स)

मध्य प्रदेश: राज्यसभा की तीन सीटों ने कैसे बदले राज्य में सत्ता के समीकरण

विभिन्न राज्यों में एक के बाद एक विधानसभा चुनाव हारने के बाद राज्यसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या घटने वाली है, जिसके चलते अहम विधेयक पास कराने में मोदी सरकार को समस्याएं आएंगी. यही वजह है कि भाजपा एक-एक सीट जीतने के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ रही है.

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वो दस कारण जिनके चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया ने छोड़ी कांग्रेस

सिंधिया लंबे समय से प्रदेश की राजनीति में अपनी अनदेखी के चलते नाराज चल रहे थे. यह नाराजगी कांग्रेस की सरकार बनने से पहले से थी.

New Delhi: Congress President Rahul Gandhi flanked by Madhya Pradesh Congress leaders Jyotiraditya Scindia (L) and Kamal Nath pose for photos after a meeting, in New Delhi, Thursday, Dec. 13, 2018. (PTI Photo)(PTI12_13_2018_000192B)

सिंधिया के इस्तीफे के बाद क्या मध्य प्रदेश में कांग्रेस अपनी सरकार बचा पाएगी?

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के 114 विधायकों में से सिंधिया के खेमे में करीब 30 प्रतिशत विधायक माने जाते हैं जिनकी संख्या 30 से 40 के बीच है. इसलिए कांग्रेस सरकार का गिरना तय माना जा रहा है.

शेफाली वर्मा. (फोटो साभार: ट्विटर/T20WorldCup)

शेफाली वर्मा: भारतीय महिला क्रिकेट की नई पहचान

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार भारतीय महिला क्रिकेट टीम आईसीसी टी-ट्वेंटी विश्वकप के फाइनल में है और इसका श्रेय 16 वर्षीय शेफाली वर्मा की बल्लेबाज़ी को जाता है. महज़ छह महीने पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आई शेफाली अपने शानदार प्रदर्शन के चलते दुनिया के उत्कृष्ट बल्लेबाज़ों की आईसीसी रैंकिंग में पहले स्थान पर पहुंच गई हैं.

21 फरवरी  के पहले मैच से पहले भारत और ऑस्ट्रेलिया की कप्तान और कोच. (फोटो साभार: ट्विटर/@T20WorldCup)

क्रिकेट प्रेमी भारत में महिला टी20 क्रिकेट विश्वकप की चर्चा क्यों नहीं हो रही है?

आईसीसी की एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 क्रिकेट की विभिन्न श्रेणियों को जोड़कर देखें तो 11 भारतीय महिला क्रिकेटर टॉप 10 रैंकिंग वाली हैं जबकि पुरुष क्रिकेटरों की संख्या महज 6 है. वर्तमान पुरुष क्रिकेटरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद देश में महिला क्रिकेट को न दर्शकों से समुचित तवज्जो मिलती है न ही मीडिया से.

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क्या वीडी शर्मा को मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाना नाराज़ सवर्णों को मनाने की कोशिश है?

भाजपा ने बीते दिनों खजुराहो से सांसद विष्णुदत्त शर्मा को प्रदेशाध्यक्ष बनाया है. मूल रूप से एबीवीपी से आने वाले शर्मा प्रदेश राजनीति में बेहद कम पहचान रखते हैं, ऐसे में राज्य में पार्टी के बड़े नामों को छोड़कर उन्हें चुनने के फ़ैसले पर सवाल उठ रहे हैं.

गेस्ट लेक्चरर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के शाहजहांनी पार्क में पिछले साल 10 दिसंबर से धरना दे रहे हैं.

मध्य प्रदेश: क्यों गेस्ट लेक्चरर डेढ़ महीने से कमलनाथ सरकार के ख़िलाफ़ धरने पर बैठे हैं?

विशेष रिपोर्ट: मध्य प्रदेश के कॉलेजों में पढ़ाने वाले गेस्ट लेक्चरर भोपाल के शाहजहांनी पार्क में कांग्रेस सरकार की ‘वादाख़िलाफ़ी’ के विरोध में 10 दिसंबर 2019 से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं.

Students shout slogans during a protest against the alleged rape and murder of a 27-year-old woman, in Kolkata, India, December 2, 2019. REUTERS/Rupak De Chowdhuri

देश में असुरक्षित महिलाएं और नेताओं के बिगड़े बोल

महिलाओं की सुरक्षा की चिंता और उनको हिंसा, बलात्कार आदि से बचाने को लेकर कड़े क़ानून बनाने का नेताओं का आश्वासन उनके दिए महिला-विरोधी बयानों के बरक्स बौना नज़र आता है.

कमलनाथ. (फोटो साभार: फेसबुक/कमलनाथ)

मध्य प्रदेश: क्या विधान परिषद बनाकर कांग्रेस अपने नेताओं का राजनीतिक पुनर्वास करना चाहती है?

मध्य प्रदेश सरकार राज्य में विधान परिषद बनाना चाहती है, जिसके लिए उसका तर्क है कि इससे चुनावी राजनीति से दूर रहने वाले विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को प्रतिनिधित्व मिलेगा. वहीं विपक्षी भाजपा सहित एक तबका इसे जनता के पैसे की फ़िज़ूलख़र्ची और पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को स्थापित करने का हथकंडा बता रहा है.

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: क्यों कांग्रेस नये प्रदेशाध्यक्ष के नाम पर फैसला नहीं ले पा रही है?

मुख्यमंत्री बनने के बाद कमलनाथ कई बार प्रदेशाध्यक्ष का पद छोड़ने की बात कह चुके हैं. लेकिन सरकार बनने के लगभग साल भर बाद भी पार्टी को नया प्रदेशाध्यक्ष नहीं मिला है.

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क्यों कुपोषण के ख़िलाफ़ लड़ रहे ग्रोथ मॉनिटर्स अपने परिवार का भरण-पोषण नहीं कर पा रहे हैं?

कुपोषण के लिए कुख्यात मध्य प्रदेश का श्योपुर राज्य का एकमात्र जिला है, जहां कुपोषण पर काबू पाने के लिए पुरुष ग्रोथ मॉनिटर्स नियुक्त किए गए हैं. लेकिन कुपोषित बच्चों के पोषण ज़िम्मेदारी संभाल रहे इन ग्रोथ मॉनिटर्स के लिए अपना भरण-पोषण ही मुश्किल हो रहा है.

अपनी मां के साथ डेढ़ साल का लोकेश. (फोटो: दीपक गोस्वामी)

क्यों कुपोषण से प्रभावित श्योपुर में बच्चों को पोषण केंद्रों में ले जाने से कतरा रहे हैं परिजन?

ग्राउंड रिपोर्ट: ‘भारत का इथोपिया’ कहे जाने वाले मध्य प्रदेश के श्योपुर में एक ओर मासूम कुपोषण से दम तोड़ रहे हैं तो दूसरी ओर उन्हें पोषण और इलाज उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए पोषण पुनर्वास केंद्र ख़ाली पड़े हैं. केंद्रों पर बच्चों को पहुंचाने की ज़िम्मेदारी निभा रहे ग्रोथ मॉनिटर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि ग्रामीण इन केंद्रों में आना ही नहीं चाहते.

भूपेश बघेल, कमलनाथ और अशोक गहलोत. (फोटो: पीटीआई/फेसबुक)

क्या मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकारें चुनावों का सामना करने से डर रही हैं?

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने ‘मध्य प्रदेश नगर पालिका विधि संशोधन अध्यादेश, 2019’ को मंज़ूरी दी, जिसके तहत अब नगरीय निकायों के महापौर व अध्यक्षों का चुनाव जनता नहीं करेगी. इसी कदम का अनुसरण राजस्थान और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकारों ने भी किया है.

Jabalpur: A shopkeeper poses with political parties' campaign materials ahead of Lok Sabha elections 2019, in Jabalpur, Wednesday, March 13, 2019. (PTI Photo) (PTI3_13_2019_000028B)

मध्य प्रदेश: क्यों झाबुआ उपचुनाव कांग्रेस और भाजपा के लिए साख से ज़्यादा सत्ता का सवाल है?

महाराष्ट्र और हरियाणा के साथ ही मध्य प्रदेश की झाबुआ विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव होने हैं. बहुमत के अभाव में गठबंधन की सरकार चला रही कांग्रेस और तख़्तापलट का सपना देख रही भाजपा, दोनों के लिए अपने यह सीट जीतना ज़रूरी बन गया है.

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: क्यों कांग्रेस के नेता अपनी ही सरकार की मिट्टी पलीद करने में लगे हुए हैं

राज्य की कमलनाथ सरकार के मंत्री-विधायक एक-दूसरे पर अवैध खनन, अवैध शराब और रिश्वत लेने जैसे संगीन आरोप लगा रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर आरोप है कि वे सरकार को पर्दे के पीछे से चला रहे हैं, वहीं नये प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लेकर भी खींचतान की स्थिति बनी हुई है.

नवंबर 2018 में घोषणापत्र जारी करती मध्य प्रदेश कांग्रेस. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: क्या कांग्रेस के लिए उसका ‘वचन-पत्र’ अब गले की हड्डी बन गया है?

एक ओर कमलनाथ सरकार विधानसभा चुनावों से पहले जारी किए अपने ‘वचन-पत्र’ को ही सरकार चलाने का रोडमैप और वचनों के पूरे होने के दावे कर रही है, तो दूसरी ओर उन वचनों से सरोकार रखने वाले वर्ग अब सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने लगे हैं.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री​ शिवराज सिंह चौहान. (फोटो: पीटीआई/टि्वटर)

कर्नाटक की सियासी उठापटक के बाद क्या अगला नंबर मध्य प्रदेश का है?

मध्य प्रदेश में जिस दिन से कांग्रेस की सरकार बनी, उस दिन से भाजपा इसे अल्पमत में बता रही है. कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने फिर कहा कि पार्टी हाईकमान का आदेश हो तो एक दिन में सरकार गिर जाएगी, लेकिन इसके बाद एक विधेयक को लेकर भाजपा के दो विधायकों के कांग्रेस के खेमे में खड़े नज़र आने से स्थितियां बदलती दिख रही हैं.

(फोटो साभार: आईसीसी)

क्या आईसीसी के अस्पष्ट नियम खेल के ख़िलाफ़ जा रहे हैं?

2019 में क्रिकेट के इतिहास में पहली बार बाउंड्री की गणना के आधार पर विश्वकप विजेता की घोषणा की गई, जिसके बाद से आईसीसी के नियमों की आलोचना हो रही है.

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युवराज सिंह: टीम में अपनी जगह बनाने के संघर्ष में ही पूरा करिअर बीत गया

विशेष रिपोर्ट: युवराज भले ही बड़े खिलाड़ी रहे लेकिन करिअर के शुरुआती दौर में उनका प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं था. विकल्पों के अभाव के चलते वे टीम में चुने जाते रहे. अगर कोई और दौर होता तो वे शायद करिअर के शुरुआती दौर में ही टीम से रुख़सत हो गए होते.

साल 2019 के क्रिकेट विश्वकप में शामिल सभी टीमों के कप्तान. (फोटो साभार: आईसीसी)

क्रिकेट वर्ल्डकप: जिस टूर्नामेंट में सिर्फ़ 10 देश शामिल हों, उसे विश्वकप कहना कितना सही है?

इंग्लैंड में खेले जा रहे 12वें विश्वकप में केवल दस देश खेल रहे हैं, जिनमें से पांच तो दक्षिण एशियाई देश हैं. इसलिए इस टूर्नामेंट के ‘विश्वकप’ कहलाए जाने पर प्रश्न उठाए जा रहे हैं

Bhopal: Congress State President Kamal Nath, party leaders Jyotiraditya Scindia, Digvijaya Singh and other leaders display victory sign after the party's win in state Assembly elections, at PCC headquarters, in Bhopal, Wednesday early morning, Dec. 12, 2018. (PTI Photo)(PTI12_12_2018_000055)

मध्य प्रदेश: कांग्रेस ने लोकसभा के इतिहास का सबसे बुरा प्रदर्शन क्यों किया?

15 साल बाद मध्य प्रदेश की सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाने वाली कांग्रेस लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 29 सीटों में से सिर्फ़ एक सीट पर ही जीत दर्ज कर सकी.

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व्यापमं पर भाजपा को घेरने वाली कांग्रेस ने घोटाले के एक संदिग्ध को उम्मीदवार क्यों बनाया?

एक ओर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनावी रैली में व्यापमं घोटाले की जांच कराने की बात करते हैं, तो दूसरी ओर पार्टी ने इंदौर लोकसभा सीट से उन पंकज संघवी को प्रत्याशी बनाया है जिन पर घोटाले में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं.

Chitrakoot: Congress President Rahul Gandhi with MPCC President Kamal Nath (2nd L), party MP Jyotiraditya Scindia (3rd R) and other leaders during a public meeting in Chitrakoot, Thursday, Sept 27, 2018. (AICC Photo via PTI) (PTI9_27_2018_000139B)

मध्य प्रदेश: क्या कांग्रेस मालवांचल में विधानसभा चुनाव में मिली सफलता दोहरा पाएगी?

मध्य प्रदेश के मालवांचल की आठ सीटों- देवास, धार, खंडवा, खरगोन, इंदौर, मंदसौर, रतलाम और उज्जैन पर 19 मई को मतदान है. 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने ये सभी सीटें जीतकर इतिहास रचा था, लेकिन विधानसभा चुनावों में पार्टी को इस क्षेत्र से ज़ोरदार झटका लगा था.

Bhopal: Congress Madhya Pradesh President Kamal Nath and AICC General Secretary Digvijay Singh arrive to chair Madhya Pradesh Congress Coordination Committee meeting at PCC Headquarters, in Bhopal, on Thursday. (PTI Photo) (PTI5_24_2018_000029B)

मध्य प्रदेश: तीसरे चरण में जिन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं क्या कांग्रेस वहां अपना प्रदर्शन सुधार पाएगी

विशेष रिपोर्ट: मध्य प्रदेश में तीसरे चरण के लिए 8 सीटों पर होने वाले मतदान में चंबल क्षेत्र की चार (ग्वालियर, गुना, मुरैना, भिंड), मध्य क्षेत्र की तीन (भोपाल, विदिशा, राजगढ़) और बुंदेलखंड की एक (सागर) सीट शामिल हैं. गुना को छोड़कर बाकी की सात सीटों पर भाजपा का क़ब्ज़ा है.

भोपाल से भाजपा की उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर और कांग्रेस के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: भोपाल में हिंदुत्व का हवन, ज़रूरी मुद्दे स्वाहा

ग्राउंड रिपोर्ट: भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा ने मालेगांव बम धमाकों की आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ चुनाव मैदान में उतारा है.

Jabalpur: A shopkeeper poses with political parties' campaign materials ahead of Lok Sabha elections 2019, in Jabalpur, Wednesday, March 13, 2019. (PTI Photo) (PTI3_13_2019_000028B)

मध्य प्रदेश: क्यों आरक्षित सीटें प्रदेश में लोकसभा चुनावों के नतीजों के लिहाज़ से अहम हैं

मध्य प्रदेश की कुल 29 लोकसभा सीटों में से 10 अनसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित हैं. 2014 में भाजपा ने इन सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी. लेकिन इस बार उसकी हालत पतली है. इसलिए आरक्षित सीटों पर 75 फीसदी सांसदों के टिकट काट दिए हैं, जबकि अनारक्षित सीटों पर केवल 33 फीसदी ही टिकट काटे गए हैं.

केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश की मुरैना लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र सिंह तोमर. (फोटो साभार: फेसबुक)

मध्य प्रदेश: मोदी सरकार में मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को क्यों अपनी सीट बदलनी पड़ी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्रों में से एक केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मध्य प्रदेश की ग्वालियर लोकसभा सीट से सांसद हैं, लेकिन इस बार वे ग्वालियर के बजाय मुरैना संसदीय क्षेत्र से मैदान में हैं.