नई दिल्ली: केरल पुलिस ने गुरुवार (26 मार्च) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और एक यूज़र अकाउंट के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिस पर आरोप है कि उसने एक एआई-जेनरेटेड वीडियो प्रसारित किया, जिसमें कथित तौर पर प्रधानमंत्री और भारत के चुनाव आयोग को भ्रामक और मानहानिकारक तरीके से दिखाया गया है.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई आधिकारिक चैनलों, जिसमें भारत का चुनाव आयोग भी शामिल है, के ज़रिए मिली एक शिकायत के जवाब में की गई है.
यह मामला बुधवार देर रात तिरुवनंतपुरम के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक्स हैंडल लक्ष्मी एन राजू (@valiant_Raju) और अन्य के खिलाफ दर्ज किया गया, जिनमें एक्स भी शामिल है.
एनडीटीवी के अनुसार, एफआईआर में कहा गया है कि वीडियो ‘समाज में दंगे भड़काने के इरादे से’ पोस्ट किया गया था. इसमें यह भी कहा गया है कि अधिकारियों के निर्देश के बावजूद एक्स ने इस सामग्री को हटाने के बजाय इसे प्रसारित होने दिया.
25 मार्च की तारीख वाली यह पोस्ट अभी भी एक्स पर उसी यूज़र अकाउंट पर उपलब्ध दिखाई दे रहा है. खबरों के अनुसार, पुलिस ने कहा कि इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को ‘भ्रामक और मानहानिकारक तरीके’ से प्रस्तुत किया गया है.
एनडीटीवी के अनुसार, एफआईआर में कहा गया है कि यह सामग्री जनता को गुमराह कर सकती है और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकती है. इसमें आगे आरोप लगाया गया है कि वीडियो ‘दंगे भड़काने’ के इरादे से साझा किया गया था. पुलिस ने कहा कि कार्रवाई शुरू होने के समय तक वीडियो हटाया नहीं गया था और 26 मार्च की शाम तक यह ऑनलाइन मौजूद प्रतीत हो रहा था.
1 मिनट 17 सेकेंड के इस वीडियो में मार्च 2019 के चुनाव आयोग के एक पत्र से जुड़ा राजनीतिक विवाद दिखाया गया है, जिसमें आयोग की आधिकारिक मुहर की जगह भाजपा की केरल इकाई की मुहर लगी थी. माकपा ने हाल ही में इस पत्र से संबंधित एक हलफनामा साझा किया था, जिसे आयोग ने राजनीतिक दलों को भेजा था.
चुनाव आयोग ने इस मुद्दे को ‘लिपिकीय त्रुटि’ बताया था, जिसे बाद में सुधार लिया गया, और कहा था कि जिम्मेदार अधिकारी को निलंबित कर दिया गया.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले विवाद – चुनाव आयोग के दस्तावेज़ पर भाजपा की मुहर – पर प्रतिक्रिया देते हुए केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने गुरुवार को कहा कि यह मामला ‘अविश्वसनीय’ है और इसे किसी एक अधिकारी की गलती नहीं माना जा सकता.
एक्स और यूज़र के खिलाफ पुलिस मामलों पर मुख्यमंत्री ने गुरुवार को कहा कि ‘आलोचना की अनुमति न देना लोकतांत्रिक व्यवस्था में सही नहीं है.’ उनका इशारा चुनाव आयोग की ओर था, जिसके कहने पर यह मामला दर्ज किया गया बताया जाता है.
उन्होंने आगे कहा, ‘पुलिस को कार्रवाई करने का निर्देश देना आलोचना को रोकने की एक कोशिश है. यह आलोचना के प्रति असहिष्णुता को दर्शाता है. क्या चुनाव आयोग ऐसा व्यवहार कर सकता है? उसे ऐसे फैसलों से खुद को अलग रखना चाहिए.’
विजयन ने आगे कहा कि केरल में पुलिस अब उनके नियंत्रण में नहीं है और यह कार्रवाई चुनाव आयोग के निर्देश पर की गई है.
चुनाव आयोग ने मंगलवार (24 मार्च) को कहा था कि उसने पुलिस को निर्देश दिया है कि 2019 के पत्र से जुड़ी भ्रामक खबरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया जाए.
गुरुवार को दर्ज इस मामले में एक्स और यूज़र के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें शांति भंग करने के इरादे से अपमान, जालसाजी, सार्वजनिक उपद्रव फैलाने वाले बयान, साझा इरादा और चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास शामिल हैं. इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C, जो पहचान की चोरी से संबंधित है, भी लगाई गई है.
पुलिस ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और नियमों के तहत संबंधित प्रावधानों के अनुसार मध्यस्थ प्लेटफॉर्म को कानूनी नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें सामग्री को शीघ्र हटाने की मांग की गई है. एनडीटीवी के अनुसार, साइबर ऑपरेशंस विंग ने मॉडल आचार संहिता के अनुरूप आगे प्रसार को रोकने के लिए भी कदम उठाए.
विभिन्न राज्यों में पुलिस द्वारा एआई-जेनरेटेड या परिवर्तित वीडियो को लेकर कार्रवाई के कई मामले सामने आए हैं.
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, पहले भी ऐसे मामलों में गिरफ्तारियां हुई हैं, जहां एआई-जेनरेटेड क्लिप को संवेदनशील या भ्रामक माना गया. केरल में कोच्चि पुलिस ने हाल ही में डिजिटल रूप से बदले गए कंटेंट को साझा करने को लेकर चेतावनी भी जारी की थी, खासकर आगामी चुनावों के संदर्भ में.
इस मामले या टेकडाउन नोटिस पर प्रतिक्रिया को लेकर एक्स की ओर से अभी तक कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है.
