नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा नियम (फेमा) के कथित उल्लंघन के मामले में वैश्विक खनन समूह वेदांता से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की है. ईडी के अधिकारियों ने 2 जून को पत्रकारों को इसकी सूचना दी.
पीटीआई के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) से जुड़े एक मामले में वेदांता के दिल्ली, राजस्थान और अन्य स्थानों पर स्थित परिसरों की तलाशी ली गई.
वेदांता के एक प्रवक्ता ने कहा कि समूह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है और मांगी गई सभी जानकारियां उपलब्ध करा रहा है. प्रवक्ता के हवाले से कहा गया, ‘कंपनी सभी लागू कानूनों और नियमों के अनुपालन के लिए प्रतिबद्ध है. चूंकि मामला फिलहाल नियामकीय प्रक्रिया के तहत है, इसलिए इस समय हम इस पर और कोई टिप्पणी करने में असमर्थ हैं.’
अडानी समूह से वेदांता का विवाद
उल्लेखनीय है कि बीते कुछ महीनों से वेदांता और अडानी समूह के बीच चल रहा विवाद सुर्खियों में था.
इसकी शुरुआत मार्च के अंत में वेदांता के प्रमुख अनिल अग्रवाल के सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट से हुई थी. उन्होंने कहा था कि वेदांता को लिखित रूप से पुष्टि मिली थी कि उसने जयप्रकाश (जेपी) समूह की एक संपत्ति के अधिग्रहण के लिए बोली जीत ली है. हालांकि बाद में यह फैसला पलट दिया गया. अग्रवाल ने अपनी पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन संकेत दिया था कि यह संपत्ति अंततः अडानी समूह को दे दी गई.
अनिल अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि बोली प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और इसे ‘व्यावसायिक साजिश’ बताया था.
इस पोस्ट के कुछ ही समय बाद वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और जेपी समूह की परिसंपत्तियों के लिए अडानी समूह द्वारा प्रस्तुत दिवालिया समाधान योजना (रिजॉल्यूशन प्लान) पर रोक लगाने की मांग की.
सुप्रीम कोर्ट ने 6 अप्रैल को अडानी एंटरप्राइजेज के रिजॉल्यूशन प्लान के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस दिवाला प्रक्रिया से जुड़ा मामला पहले से ही 10 अप्रैल को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है. ऐसे में इस चरण पर हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बनता.
वहीं, राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने 4 मई को अडानी एंटरप्राइजेज़ के चयन को चुनौती देने वाली वेदांता लिमिटेड की अपीलों को खारिज कर दिया था.
सुनवाई के दौरान एनसीएलएटी के अध्यक्ष जस्टिस अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुन मित्रा ने कहा कि वेदांता द्वारा दायर अपीलों में कोई दम नहीं है.
इस फैसले के बाद अडानी के लिए करीब 14,500 करोड़ रुपये के कर्ज़ में डूबी जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड का अधिग्रहण करने का रास्ता साफ हो गया था.
