हिंसाग्रस्त मणिपुर में कुकी-ज़ो-बहुल चूड़ाचांदपुर ज़िले की सीमा से लगे फौगाकचाओ थाने के पास एक सुनसान घर में धमाके हुए. जिस घर में धमाके हुए, उसके मालिक मई 2023 में हिंसा शुरू होने के बाद से राहत शिविर में रह रहे हैं. मेईतेई और कुकी संगठनों ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे शांति प्रक्रिया के लिए गंभीर ख़तरा बताया है.
त्रिपुरा के 24 वर्षीय एमबीए छात्र एंजेल चकमा की उत्तराखंड के देहरादून में 26 दिसंबर को हुई मौत के बाद त्रिपुरा में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. आरोप है कि नस्लीय गालियों को लेकर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी. पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में नस्लीय टिप्पणी के सबूत नहीं मिले हैं, जिस पर मृतक के परिजनों ने कड़ी आपत्ति जताई है.
असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग के खेरेनी क्षेत्र में मंगलवार को भड़की ताज़ा हिंसा में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए. इसके चलते कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग दोनों ज़िलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं.
असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग ज़िले में बेदख़ली की मांग से जुड़े विरोध प्रदर्शन हिंसक हो उठे. प्रदर्शनकारियों ने कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य और भाजपा नेता के पुश्तैनी घर में आग लगा दी और पथराव किया. इसमें तीन प्रदर्शनकारी और कुछ सुरक्षाकर्मी घायल हो गए. तनाव के बीच निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है.
ईडी ने बुधवार को मणिपुर के इंफाल में कई स्थानों पर समन्वित छापेमारी की, जिसमें स्वघोषित 'मणिपुर स्टेट काउंसिल' के नेताओं और उनसे जुड़ी कंपनियों से संबंधित संपत्तियों को निशाना बनाया गया. इसी बीच मंगलवार रात ख़बरों में दावा किया गया कि बिष्णुपुर में संदिग्ध आतंकवादियों ने गोलीबारी की है. हालांकि, किसी के घायल होने की ख़बर नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि 2023 की जातीय हिंसा में मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की भूमिका की ओर इशारा करने वाली लीक हुई पूरी ऑडियो क्लिप को फॉरेंसिक जांच के लिए क्यों भेजा गया. इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा लीक हुई पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के कथित ऑडियो टेप की जांच के तरीके पर कड़ी नाराजगी जताई थी.
कुकी-ज़ो संगठनों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मणिपुर के दो दिवसीय दौरे के कार्यक्रम से चूड़ाचांदपुर और कांगपोकपी ज़िलों को हटाए जाने पर नाराज़गी जताई. संगठनों ने कहा कि राष्ट्रपति के दौरे ने आंतरिक रूप से विस्थापित कुकी-ज़ो लोगों की ‘दुख और दुर्दशा’ को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर भारत विरोधी पोस्ट करने के आरोप में गिरफ़्तार किए गए असम के एक कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर को ज़मानत दे दी. साथ ही कोर्ट ने कहा कि उन्हें दी गई राहत नौकरी पर उनकी बहाली का आधार नहीं बननी चाहिए.
अरुणाचल प्रदेश के मंत्री ओजिंग तासिंग ने पंचायत चुनाव के प्रचार के दौरान दावा किया कि जिन सीटों पर भाजपा हारेगी, वहां कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा. मंत्री के इस बयान को लेकर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताते हुए राज्य चुनाव आयोग में तासिंग के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया है.
असम की तेज़पुर यूनिवर्सिटी के छात्र, शिक्षक और ग़ैर-शैक्षणिक स्टाफ वाइस चांसलर शंभू नाथ सिंह पर भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग को लेकर पिछले 75 दिनों से ज़ोरदार विरोध कर रहे थे. अब गुरुवार को वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य डॉ. ध्रुब कुमार भट्टाचार्य को कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया गया है.
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू द्वारा अपने परिजनों को सरकारी ठेके दिए जाने की स्वतंत्र जांच की मांग की जनहित याचिका को लेकर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे से बताया है कि खांडू के परिवार से जुड़ी चार कंपनियों को 2012-2023 के बीच तवांग में 383 करोड़ रुपये के 146 सरकारी ठेके मिले. इनमें 59 ठेके बिना टेंडर दिए गए थे.
भाजपा नेता और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के ख़िलाफ़ अपने परिवार के सदस्यों को सरकारी मदद देने के आरोपों पर स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अद्भुत संयोग है कि एक राज्य में बड़ी संख्या में परिजनों को ठेके दिए जाते हैं. अगर ऐसा है तो यह बहुत गंभीर मुद्दा है.
असम के नागांव जिले में अधिकारियों ने शनिवार को 795 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए बेदख़ली अभियान शुरू किया. बताया गया है कि यहां लगभग 1,500 परिवार- जिनमें से सभी बांग्ला भाषी मुस्लिम थे, सालों से रह रहे थे.
असम मंत्रिमंडल ने राज्य के छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी है, जिसके बाद राज्य के कई आदिवासी संगठन और छात्र इसके ख़िलाफ़ उतरे हैं और सरकार से यह फैसला वापस लेने की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि यह स्थानीय आदिवासी समुदायों के हितों को कमज़ोर करता है.
'मणिपुर टेप्स' को लेकर कुकी ऑर्गनाइज़ेशन फॉर ह्यूमन राइट्स (कोहूर) ने एक हलफनामे में आरोप लगाया है कि मणिपुर पुलिस ने 48 मिनट 46 सेकेंड की पूरी रिकॉर्डिंग के बजाय बहुत ज़्यादा काट-छांट किए गए ऑडियो क्लिप फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे, जिससे टेप्स के असली होने का फॉरेंसिक वेरिफिकेशन रुक गया.