Bhima Koregaon

रोना विल्सन.

एल्गार परिषद: एनआईए ने कार्यकर्ता रोना विल्सन के कंप्यूटर को हैक करने से इनकार किया

भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार सामाजिक कार्यकर्ता रोना विल्सन के कंप्यूटर से मिले पत्रों के आधार पर विल्सन समेत पंद्रह कार्यकर्ताओं पर विभिन्न गंभीर आरोप लगाए गए थे. इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणों की जांच करने वाले अमेरिकी फर्म आर्सेनल कंसल्टिंग का कहना है कि इन्हें एक साइबर हमले में विल्सन के लैपटॉप में डाला गया था.

अक्टूबर 2020 में सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा रांची में स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन. (फोटो: पीटीआई)

2,500 से अधिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों ने की स्टेन स्वामी को ज़मानत देने की अपील

एल्गार परिषद मामले में अक्टूबर 2020 में हिरासत में लिए गए 84 वर्षीय स्टेन स्वामी पार्किंसन समेत कई बीमारियों से पीड़ित हैं. मेडिकल आधार पर उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज होने के विरोध में जारी बयान में कहा गया है कि वे उन हज़ारों विचाराधीन क़ैदियों के प्रतीक हैं जो सालों से यूएपीए के फ़र्ज़ी आरोपों में जेल में हैं.

फादर स्टेन स्वामी. (फाइल फोटो: पीटीआई)

एल्गार परिषद मामला: अदालत का स्टेन स्वामी को ज़मानत देने से इनकार

एनआईए जज ने मेडिकल आधार पर भी 84 वर्षीय आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी की ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी, जबकि वे पार्किंसन समेत कई अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं.

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भीमा कोरेगांव: क्या रोना विल्सन के कंप्यूटर में प्लांट किए गए थे उन्हें आरोपी ठहराने वाले पत्र

वीडियो: भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में आरोपियों के वकील ने दावा किया है कि आरोपियों में से एक रोना विल्सन के लैपटॉप से बरामद कथित साजिश के मेल खुद उन्होंने नहीं लिखे थे बल्कि इन्‍हें प्लांट करवाया गया था. क्या है यह पूरा मामला, बता रहे हैं मुकुल सिंह चौहान.

रोना विल्सन. (फोटो: यूट्यूब/पिक्साबे)

रोना विल्सन के लैपटॉप में प्लांट किए गए थे ‘आपराधिक’ पत्र: यूएस डिजिटल फॉरेंसिक फर्म

एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार सामाजिक कार्यकर्ता रोना विल्सन के कंप्यूटर से मिले पत्रों के आधार पर विल्सन समेत पंद्रह कार्यकर्ताओं पर विभिन्न गंभीर आरोप लगाए गए थे. अब मामले के इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणों की जांच करने वाले अमेरिकी फर्म का कहना है कि इन्हें एक साइबर हमले में विल्सन के लैपटॉप में डाला गया था.

गौतम नवलखा (फोटो: यूट्यूब)

एलगार परिषदः बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवलखा की डिफॉल्ट ज़मानत याचिका ख़ारिज की

एनआईए अदालत ने जुलाई 2020 में एलगार परिषद मामले में आरोपी गौतम नवलखा की डिफॉल्ट ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी थी, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी.

फादर स्टेन स्वामी. (फोटो: पीटीआई)

एनआईए ने स्टेन स्वामी की ज़मानत याचिका का विरोध किया, दो संगठनों को माओवादी बताया

विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त 83 वर्ष के फादर स्टेन स्वामी को एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार किया गया था. उनकी ज़मानत का विरोध करते हुए जिस पीसीयूएल को ‘माओवादी’ बताया गया, उसकी स्थापना समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण ने की थी और भाजपा के रविशंकर प्रसाद और अरुण जेटली इससे जुड़े रहे हैं.

(फोटो साभारः फेसबुक)

महाराष्ट्रः पुणे में एल्गार परिषद के कार्यक्रम का आयोजन 30 जनवरी को होगा

यह कार्यक्रम शुरुआत में 31 दिसंबर 2020 को होना था, लेकिन पुलिस द्वारा मंजूरी नहीं दिए जाने के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था. 2017 में भीमा-कोरेगांव युद्ध के 200 साल पूरे होने के मौके पर एल्गार परिषद कार्यक्रम का आयोजन 31 दिसंबर को पुणे के शनिवारवाड़ा में किया गया था. इसके अगले दिन यहां हिंसा भड़क उठी थी.

सामाजिक कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज. (फोटो साभार: releasesudhabharadwaj.net)

हज़ारों बेटियों को उजड़ने से बचाने वाली सुधा को बेटी से दूर क़ैद में कैसा लगता होगा…

यूं तो बेटियां मांओं से बहुत जुड़ी होती ही हैं, मगर सुधा भारद्वाज की बेटी होना कोई आसान नहीं. बिना किसी अपराध के ढाई साल से ऊपर हुए मां जेल में है और बाहर मायशा अलग लड़ाई लड़ रही है.

फादर स्टेन स्वामी. (फाइल फोटो: पीटीआई)

भारत मानवाधिकारों के समर्थकों को उचित सुरक्षा नही देताः संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि

मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि मैरी लॉलर एक ऑनलाइन कार्यक्रम में एल्गार परिषद मामले में हुई 83 वर्षीय स्टेन स्वामी की गिरफ़्तारी पर चिंता जताते हुए कहा कि देश मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति जवाबदेह है.

हर्षाली पोतदार (फोटो साभार: फेसबुक/@harshali.potdar)

महाराष्ट्र: फेसबुक पोस्ट शेयर करने पर सामाजिक कार्यकर्ता गिरफ़्तार, कुछ घंटों में हुई रिहाई

मुंबई की सामाजिक कार्यकर्ता हर्षाली पोतदार का नाम एल्गार परिषद मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर दर्ज है. उन्होंने बताया कि सोमवार को उन्हें कथित तौर पर एक फेसबुक पोस्ट साझा करने के आरोप में पुलिस ने ग़ैर क़ानूनी तरीके से हिरासत में लिया था.

सिंघु बॉर्डर पर नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे 70 साल के संतोख सिंह को आंसू गैस के शेल से चोट लगने के बाद टांके लगाए गए थे. (फोटो: रॉयटर्स)

प्रतिरोध की लौ जलाए रखने वाला नागरिक ही ‘इंडियन ऑफ द ईयर’ है

चाहे शाहीन बाग़ हो या दिल्ली की विभिन्न सीमाओं की सड़कें, भारतीय नागरिक अपनी अस्मिता और अधिकारों के लिए खड़े हो रहे हैं.

भीमा-कोरेगांव में बना विजय स्तंभ. भीमा-कोरेगांव की लड़ाई में पेशवा बाजीराव द्वितीय पर ईस्ट इंडिया कंपनी ने जीत दर्ज की थी. इसकी याद में कंपनी ने विजय स्तंभ का निर्माण कराया था, जो दलितों का प्रतीक बन गया. कुछ विचारक और चिंतक इस लड़ाई को पिछड़ी जातियों के उस समय की उच्च जातियों पर जीत के रूप में देखते हैं. हर साल 1 जनवरी को हजारों दलित लोग श्रद्धाजंलि देने यहां आते हैं. (फोटो साभार: विकीपीडिया)

भीमा-कोरेगांव: निषेधाज्ञा लागू, वर्षगांठ पर युद्ध स्मारक के नज़दीक बाहरियों के जाने पर रोक

हर साल एक जनवरी को दलित वर्ष 1818 की जंग की वर्षगांठ मनाते हैं, जिसमें ईस्ट इंडिया कंपनी के जवानों ने दलित सैनिकों के साथ मिलकर पुणे के पेशवा की सेना को पराजित किया था. पुणे के पेरने गांव में भीमा-कोरेगांव की जंग की स्मृति में ‘जय स्तंभ’ बना है, वर्षगांठ पर यहां स्मृति कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है.

10 दिसंबर को किसान आंदोलन में गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रति समर्थन जाहिर करते प्रदर्शनकारी. (फोटो: अजॉय आशीर्वाद महाप्रशस्त/द वायर)

‘फूट डालो और राज करो’ को मानने वालों के लिए आदिवासी किसान नहीं हैं

एक ओर कॉरपोरेट्स सभी आर्थिक क्षेत्रों और राज्यों की सीमाओं में अपना काम फैलाने के लिए स्वतंत्र हैंं, वहीं देश भर के किसानों के कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ साथ आ जाने पर भाजपा उनके आंदोलन में फूट डालने का प्रयास कर रही है.

कबीर कला मंच के कार्यकर्ता सागर गोरखे और रमेस गाइचोर

एनआईए ने कबीर कला मंच के लोगों की गिरफ़्तारी के लिए दिया भाजपा-मोदी पर लिखे पैरोडी गीतों का हवाला

एल्गार परिषद मामले में एनआईए ने इन पैरोडी गीतों के अलावा साल 2011 और 2012 के कुछ साक्ष्यों के आधार पर दावा किया है कि संगठन के कार्यकर्ता फ़रार नक्सली नेता मिलिंद तेलतुम्बड़े के संपर्क में थे.