Inequality

बजट 2022: वित्त मंत्री के चौथे बजट में जनता को क्या मिलेगा

विशेषज्ञों का मानना ​​​​है कि 2020 में महामारी के प्रकोप के बाद आर्थिक व्यवधान के बाद अपर्याप्त राहत पर बढ़ती सार्वजनिक आलोचना के बीच वित्त मंत्री किफायती आवास और उर्वरक के लिए उच्च सब्सिडी के अलावा सड़कों और रेलवे पर अधिक ख़र्च की घोषणा करेंगी.

बजट से पहले कार्यकर्ताओं ने कहा- सामाजिक सुरक्षा उपायों पर ख़र्च बढ़ाने की ज़रूरत

प्रगतिशील नागरिक समाज संगठनों, सामाजिक आंदोलनों, शिक्षाविदों और अन्य विशेषज्ञों के एक मंच जन सरोकार ने आगामी केंद्रीय बजट से पहले नरेगा, खाद्य सुरक्षा, पेंशन, कृषि, बैंकिंग और वित्त, जेंडर, पर्यावरण जैसे क्षेत्रों को लेकर अपनी अपेक्षाएं और मांगें जारी की हैं.

भारत विश्व के सर्वाधिक असमान देशों में, शीर्ष एक प्रतिशत के पास है राष्ट्रीय आय का 22 फीसदी

विश्व असमानता रिपोर्ट 2022 के मुताबिक़, भारत की शीर्ष 10 फीसदी आबादी के पास कुल राष्ट्रीय आय का 57 फीसदी हिस्सा है, जबकि नीचे से 50 फीसदी आबादी की इसमें हिस्सेदारी मात्र 13 फीसदी है.

न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सत्यनिष्ठा की सभी स्तरों पर रक्षा करना अत्यंत आवश्यक: एनवी रमना

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने राष्ट्रीय क़ानूनी सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि हम एक कल्याणकारी राज्य का हिस्सा हैं, उसके बावजूद लाभ इच्छित स्तर पर लाभान्वितों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. सम्मानजनक जीवन जीने की लोगों की आकांक्षाओं को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इनमें से ग़रीबी एक मुख्य चुनौती है.

ई-कॉमर्स से महामारी के दौरान उपजी असमानता, छोटे व्यापारियों के अधिकार प्रभावित हुए: एनएचआरसी

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा ने कहा है कि ई-कॉमर्स ने कोविड-19 के दौरान छोटे विक्रेताओं के अधिकारों को प्रभावित करने वाली असमानता उत्पन्न की है. उनके अधिकारों को संरक्षित करने की आवश्यकता है.

ग़रीब देशों की महिलाओं को यौन संबंधों से इनकार करने का भी अधिकार नहीं: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं के लिए अपने शरीर पर अधिकारहीनता की स्थिति कोरोना वायरस महामारी के कारण और भी ज़्यादा बदतर हुई है. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने एक रिपोर्ट जारी कर कहा है कि महामारी के कारण पिछले वर्ष लिंग आधारित हिंसा में बढ़ोतरी देखी गई और कई देशों में यौन हिंसा को युद्ध की क्रूर युक्ति एवं राजनीतिक दमन के तौर पर इस्तेमाल किया गया.

वैश्विक लैंगिक भेद रिपोर्ट में भारत का 156 देशों में 140वां स्थान, 28 पायदान फिसला

वैश्विक लैंगिक भेद अनुपात रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया में केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान इस सूची में भारत से नीचे हैं. भारत के पड़ोसी मुल्कों में से बांग्लादेश इस सूची में 65, नेपाल 106, पाकिस्तान 153, अफगानिस्तान 156, भूटान 130 और श्रीलंका 116वें स्थान पर हैं.

आरक्षण गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं, वंचितों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का तरीका है

बढ़ती सामाजिक असमानता के दौर में देश की शीर्ष अदालत का आरक्षण पर सवाल उठाना निराशाजनक है और यह वंचित तबके का न्यायपालिका में भरोसा कम करता है.

कोविड-19 महामारी के बाद लैंगिक समानता पर ध्यान दे दुनिया: संयुक्त राष्ट्र महिला निकाय

एक रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के प्रबंधक ने कहा कि कोविड-19 महामारी से सबसे ज़्यादा और बुरी तरह महिलाएं ही प्रभावित हुई हैं, फिर भी महामारी का मुक़ाबला करने से संबंधित निर्णय प्रक्रिया से महिलाओं को ही व्यवस्थागत तरीके से बाहर रखा जा रहा है.

दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस से पूछा, किसी भी थाने में महिला प्रभारी क्यों नहीं

दिल्ली महिला आयोग ने मीडिया में आई ख़बरों के आधार पर राष्ट्रीय राजधानी के 178 थानों में से एक भी जगह महिला प्रभारी न होने की बात पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. आयोग ने कहा कि पुलिस बल में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के नियम हैं, इसके बावजूद उनकी भागीदारी कम है.

बलात्कार हर देश में होते हैं पर सिर्फ हमारे यहां पीड़िता को इसका दोष दिया जाता है: निर्मला बनर्जी

साक्षात्कार: महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ते अपराधों, सीमित किए जा रहे अधिकारों के बीच उनसे संबंधित मुद्दों पर बात करने की ज़रूरत और बढ़ गई है. देश में महिलाओं की वर्तमान परिस्थितियों को लेकर बीते पांच दशकों से महिला आंदोलनों का हिस्सा रहीं वरिष्ठ अर्थशास्त्री निर्मला बनर्जी से सृष्टि श्रीवास्तव की बातचीत.

शैक्षणिक संसाधनों में ग़ैर बराबरी: शिक्षा या शिक्षा का भ्रम

शिक्षा में साधनों की असमानता का एक पक्ष यह भी है कि जिन अकादमिक या बौद्धिक चिंताओं पर हम महानगरीय शिक्षा संस्थानों में बहस होते देखते हैं, वे राज्यों के शिक्षा संस्थानों की नहीं हैं. राज्यों के कॉलेजों के लिए अकादमिक स्वतंत्रता का प्रश्न ही बेमानी है क्योंकि अकादमिक शब्द ही उनके लिए अजनबी है.

असमानता दूर करने में सरकारों की विफलता की कीमत चुका रही है दुनिया: ऑक्सफैम

विश्व आर्थिक मंच की दावोस एजेंडा शिखर बैठक में ऑक्सफैम इंटरनेशनल की कार्यकारी निदेशक गैब्रिएला बुचर ने कहा कि महामारी की आर्थिक मार से उबरने में अरबों लोगों को एक दशक से अधिक का समय लग सकता है, जबकि मार्च 2020 के बाद से सबसे शीर्ष पर सिर्फ़ 10 अरबपतियों का धन आसमान छू लिया है.

महामारी से न सिर्फ़ लाखों जानें गईं, बल्कि असमानता और सामाजिक विघटन भी बढ़ रहा: विश्व आर्थिक मंच

विश्व आर्थिक मंच ने अपनी एक रिपोर्ट में अगले दशक पर असर के संदर्भ में संक्रामक बीमारियों को सबसे बड़ा जोख़िम बताया. रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया को 2020 में महामारी के कारण हो सकने वाली तबाही को देख लेने के बाद दीर्घकालिक ख़तरों के लिए तैयार होने की ज़रूरत है.

गांधी को हिंदू देशभक्त बताना उन्हें ओछा करना है…

गांधी हिंदू थे, गीता, उपनिषद, वेद आदि के लिए भी उनके मन में ऊंचा स्थान था, पर उनका साफ कहना था कि अगर ये पवित्र ग्रंथ अस्पृश्यता का समर्थन करते हों, तो वे उन्हें भी ठुकरा देंगे. गांधी का एक जीवन दर्शन था जिसकी कसौटी पर महान से महान व्यक्ति, ग्रंथ या विचार को कसा ही जाना था.