National Commission for Protection of Child Rights

हर्ष मंदर (फोटो साभारः फ्लिकर)

हर्ष मंदर से जुड़े आश्रय गृहों पर एनसीपीसीआर के आरोप दिल्ली बाल अधिकार आयोग द्वारा ख़ारिज

इस साल जनवरी में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर से जुड़े बच्चों के दो आश्रय गृहों को लेकर बुनियादी ढांचे, वित्त पोषण और संचालन लाइसेंस में अनियमितताओं की सूचना दी थी. साथ ही यहां यौन शोषण की संभावना को भी व्यक्त किया था. दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे मामले में दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बताया है कि एनसीपीसीआर के आरोपों में सबूतों और योग्यता की कमी है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

बिहारः बच्चों को सीएए-एनआरसी के बारे में पढ़ाने पर दो स्वयंसेवी समूहों पर राजद्रोह का मामला दर्ज

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद दो स्वयंसेवी संस्थाओं के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है. एनसीपीसीआर ने कहा कि उन्होंने निरीक्षण के दौरान कुछ छात्रों के होमवर्क रजिस्टर देखें, जिनसे पता चला कि उन्हें ग़लत तरीके से सीएए और एनआरसी के बारे में बताया गया है.

(फोटो साभार: फेसबुक)

बाल संरक्षण आयोग ने नेटफ्लिक्स से ‘बॉम्बे बेगम्स’ की स्ट्रीमिंग रोकने के लिए कहा

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास शिकायत आई थी कि नेटफ्लिक्स पर प्रसारित वेब सीरीज बॉम्बे बेगम्स में दिखाया गया है कि नाबालिगों का यौन गतिविधि और मादक पदार्थों के सेवन में संलिप्त होना आम बात है.

हर्ष मंदर (फोटो साभारः फ्लिकर)

दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर के दो एनजीओ के ख़िलाफ़ केस दर्ज

राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग की शिकायत पर ‘उम्मीद अमन घर’ और ‘खुशी रेनबॉ होम’ इन एनजीओ में कथित नियमों के उल्लंघनों के लिए मामला दर्ज किया है. ये एनजीओ पूर्व आईएएस अधिकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर द्वारा संचालित हैं.

एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो (फोटो साभारः ट्विटर)

मध्य प्रदेशः एनसीपीसीआर ने सागर के डीएम पर धर्म परिवर्तन की जानकारी दबाने का आरोप लगाया

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एक ईसाई संगठन द्वारा चलाए जा रहे बच्चों के छात्रावास में कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के मामले पर जानकारी मांगी थी, जिसका जवाब न मिलने पर उसने मध्य प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर सागर ज़िले के ज़िलाधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने को कहा है.

Deoria: A view of the shelter home from where twenty-four girls were rescued after allegation of sexual exploitation of the inmates came to light, prompting the Uttar Pradesh government to swing into a damage control mode by removing the district magistrate and ordering a high-level probe, in Deoria on Monday, Aug 6, 2018. (PTI Photo) (Story no. DEL23)(PTI8_6_2018_000256B)

क़रीब 40 प्रतिशत बाल गृहों में बच्चों को प्रताड़ना से बचाने की व्यवस्था नहीं: रिपोर्ट

साल 2018 में उत्तर प्रदेश के देवरिया और बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्थित बाल गृहों में यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद सरकार ने देश के सभी बाल गृहों की सामाजिक ऑडिट करने का आदेश दिया था. ऑडिट किए गए 7,163 बाल गृहों में से 1,504 में अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है, जबकि 434 के शौचालयों और स्नानगृह में निजता की व्यवस्था नहीं है.

मोहम्मद ज़ुबैर. (फोटो साभार: ट्विटर/@zoo_bear)

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक को राहत, अदालत ने कहा कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करे पुलिस

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा ऑनलाइन बहस के दौरान एक नाबालिग बच्ची की ब्लर की हुई तस्वीर पोस्ट करने पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की शिकायत पर उनके ख़िलाफ़ आईटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

मोहम्मद ज़ुबैर. (फोटो साभार: ट्विटर/@zoo_bear)

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की शिकायत पर ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक के ख़िलाफ़ केस दर्ज

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने ट्विटर पर एक शख़्स के साथ हुई बहस में शख़्स की नाबालिग बेटी की ब्लर की हुई तस्वीर पोस्ट की थी. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की शिकायत पर इनके ख़िलाफ़ आईटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

लॉकडाउनः चाइल्ड पोर्नोग्राफी सर्च बढ़ने पर बाल आयोग ने गूगल, ट्विटर, व्हाट्सएप को नोटिस भेजा

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने आईसीपीएफ नामक संस्था की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए गूगल, व्हाट्सएप और ट्विटर को नोटिस भेजकर 30 अप्रैल तक जवाब मांगा है.

New Delhi: Protestors participate in a demonstration against Citizenship (Amendment) Act and NRC at  Shaheen Bagh in New Delhi, Friday, Jan. 10, 2020. The Delhi High Court today refused to entertain a plea seeking directions for removal of demonstrators in order to clear road blockages that are causing traffic congestions at the DND route. (PTI Photo/Vijay Verma) (PTI1_10_2020_000225B) *** Local Caption ***

शाहीन बाग के प्रदर्शन में मौजूद बच्चों की काउंसिलिंग की जाए: बाल संरक्षण आयोग

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दक्षिण पूर्वी दिल्ली के ज़िलाधिकारी को आदेश जारी कर कहा है कि संभव है कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे बच्चों को अफवाहों और ग़लत जानकारी के कारण मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा हो. आयोग के अनुसार, ज़रूरत पड़ी तो उनके माता-पिता को भी काउंसिलिंग के लिए भेजा जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

बाल आसरा घरों पर एनसीपीसीआर की रिपोर्ट ‘खौफनाक’, हम असहाय हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर हम कोई निर्देश देते हैं तो उसे ‘न्यायिक सक्रियतावाद’ करार दे दिया जाता है. यदि अधिकारियों ने ठीक से अपना काम किया होता तो बिहार में मुजफ्फरपुर जैसी घटनाएं नहीं होतीं.

(फोटो: रॉयटर्स)

सरकारी सर्वेक्षण में खुलासा, देशभर के बाल देखभाल केंद्रों से दो लाख से अधिक बच्चे गायब

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के 2016-17 के सर्वेक्षण में बाल देखभाल संस्थाओं में रहने वाले बच्चों की संख्या क़रीब 4.73 लाख थी जबकि इस साल मार्च में पेश सरकारी आंकड़ों में संख्या 2.61 लाख बताई गई है.

(फोटो: रॉयटर्स)​​​

बालिका आश्रय गृहों में युवतियों का बलात्कार और यौन शोषण कब रुकेगा: सुप्रीम कोर्ट

हाल ही में बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर और उत्तर प्रदेश के देवरिया के बालिका आश्रय गृहों में रहने वाली युवतियों के साथ बलात्कार और यौन शोषण के मामले सामने आए हैं.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ​आदित्यनाथ और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. (फोटो: पीटीआई)

यूपी-बिहार कर रहे हैं बाल आश्रय गृहों के सोशल ऑडिट करने का विरोध: बाल संरक्षण आयोग

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सभी राज्यों के बाल आश्रय गृहों के सोशल ऑडिट का आदेश दिया था. बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, केरल, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और दिल्ली भी सोशल ऑडिट का विरोध कर रहे हैं.

Jammu Kashmir MAP

जम्मू कश्मीर में भी लागू हो पॉक्सो एक्ट: राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग

आयोग का कहना है कि कठुआ गैंगरेप जैसे जघन्य मामलों में मृत्युदंड का प्रावधान करने कि लिए पॉक्सो क़ानून में संशोधन होना चाहिए.