नीट-यूजी: भाजपा की आपत्ति के बाद डॉक्टरों के संगठन को संसदीय समिति की बैठक में भाग लेने से रोका गया

नीट-यूजी पेपर लीक के बाद से यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को भंग करने की मांग कर रहा है. सोमवार को इसे संसदीय स्थायी समिति के सामने अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी गई, क्योंकि भाजपा सांसदों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर यूडीएफ का रुख़ पहले से ही जगजाहिर है और उसे एक निष्पक्ष गवाह नहीं माना जा सकता.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) पेपर लीक के बाद से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने की मांग करने वाले यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) को सोमवार (1 जून) को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति के सामने अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी गई. यह निर्णय भाजपा सांसदों के विरोध के बाद लिया गया.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने नीट-यूजी और एनटीए के कार्यकलापों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई थी. समिति ने ‘पेन-एंड-पेपर परीक्षा’ और ‘कंप्यूटर-आधारित परीक्षा’ के गुण-दोषों पर भी विचार किया.

ज्ञात हो कि नीट-यूजी परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोपों के बाद एनटीए जांच और आलोचना के घेरे में है. एनटीए द्वारा तीन मई को आयोजित की गई नीट 2026 की परीक्षा पेपर लीक के दावों के बाद रद्द कर दी गई थी, जिसके बाद अब यह परीक्षा दोबारा 21 जून को होगी.

नीट-यूजी भारत की एकमात्र एकीकृत मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जो देशभर में स्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश तय करती है. साल 2024 में भी यह परीक्षा पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स देने में अनियमितताओं के आरोपों में घिरी रही थी, जिसके बाद हज़ारों अभ्यर्थियों को असामान्य रूप से अधिक नंबर मिलने पर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, आधिकारिक सूचना के अनुसार, बैठक के लिए आमंत्रित गवाहों की सूची में यूडीएफ के प्रतिनिधियों के नाम शामिल थे. लेकिन जब उन्हें बुलाया जाने वाला था, तब भाजपा के राज्यसभा सांसद भीम सिंह ने आपत्ति जताई.

अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि, उनका तर्क था कि इस मुद्दे पर यूडीएफ का रुख पहले से ही जगजाहिर है और इसलिए उसे एक निष्पक्ष गवाह नहीं माना जा सकता.

यूडीएफ ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है, जिसमें एनटीए की जगह एक ऐसी स्वतंत्र परीक्षा संस्था लाने की मांग की गई है, जिस पर संसद की सीधी निगरानी हो, जिसमें पेपर लीक रोकने के मज़बूत तंत्र हों और जिसका व्यापक ऑडिट किया जाए.

भाजपा के अन्य सदस्यों ने भी भीम सिंह के रुख का समर्थन किया और कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए. कुछ सदस्यों ने ऐसी चर्चाओं के समय को लेकर भी सवाल उठाए. इसके बाद प्रतीक्षा कर रहे यूडीएफ प्रतिनिधियों को सिंह ने सूचित किया कि वे चर्चा का हिस्सा नहीं बन सकते.

यूडीएफ के अध्यक्ष लक्ष्य मित्तल ने पत्रकारों को बताया कि इस संस्था ने अपने प्रतिनिधियों के नाम और मांगों का एक ज्ञापन एक हफ़्ता पहले ही जमा कर दिया था.

डॉ. मित्तल ने कहा, ‘एनटीए को भंग कर देना चाहिए और नई परीक्षा संस्था बनाई जानी चाहिए. ऐसी संस्था संसद के प्रति जवाबदेह होनी चाहिए. वर्तमान में एनटीए न तो जवाबदेह है और न ही उसके पास पर्याप्त ऑडिट व्यवस्था है.’

सिंह ने बैठक के विवरण साझा करने से इनकार करते हुए कहा कि संसदीय नियमों के अनुसार रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत होने से पहले चर्चाओं का खुलासा नहीं किया जा सकता. हालांकि प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस की उस मांग को दोहराया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘धर्मेंद्र प्रधान की नाकामियों से प्रधानमंत्री इतने नाराज़ हैं कि उन्होंने सारी जिम्मेदारियां खुद संभाल ली हैं.’

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी. सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बैठक के संबंध में लिखे एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया है कि नरेंद्र मोदी खुद नीट की पुनर्परीक्षा की निगरानी कर रहे हैं.

रमेश ने कहा कि छात्रों के हित में यह आशा की जानी चाहिए कि परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित हो, लेकिन किसी भी विवेकशील व्यक्ति के लिए ‘प्रधानमंत्री और उनकी व्यवस्था (सिस्टम)’ पर विश्वास करना कठिन है.

उन्होंने कहा, ‘इसी ‘सिस्टम’ ने 2024 के नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच को बिगाड़ दिया था. यही ‘सिस्टम’ अब भी यह स्वीकार करने से इनकार कर रहा है कि नीट-यूजी 2026 का प्रश्नपत्र लीक हुआ था, जबकि सच्चाई सबके सामने है. इस ‘सिस्टम’ ने न केवल उच्च शिक्षा की परीक्षाओं के संचालन को बर्बाद किया है, बल्कि सीबीएसई की परीक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित किया है.’