राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी पर एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट में 40 दिनों में 70 बार नकदी चोरी होने, छह लोगों पर एफआईआर की सिफ़ारिश और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलताओं का उल्लेख है. लेकिन गबन की कुल राशि, शीर्ष स्तर की जवाबदेही और वर्षों से चली आ रही संस्थागत कमियों पर रिपोर्ट कई अहम सवाल अनुत्तरित छोड़ देती है.
ई-20 ईंधन पर मोदी सरकार की प्रेस वार्ता के बावजूद कई अहम सवालों का जवाब अब भी मौजूद नहीं है. पुराने वाहनों की सुरक्षा, कम माइलेज के बावजूद समान क़ीमत, कृषि सब्सिडी और भूजल की लागत, भंडारण से जुड़े जोखिम, नीति आयोग की हटाई गई रिपोर्ट और उपभोक्ताओं को मुआवज़े जैसे मुद्दों पर सरकार ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया है.
चढ़ावा चोरी के प्रसंग में उपज आए ज्ञानीजन बताते हैं कि उनके शास्त्र में चोरी को चोरी की तरह न कर पाने और हेराफेरी या सीनाज़ोरी पर उतर आने वाले चोरों को कतई ‘कलाकार’ नहीं माना जाता. तब माना जाता है, जब वे देखते-देखते अपने शिकार की आंखों से काजल निकाल लें और आंखवाले को भनक तक न लगे. कहते हैं कि चढ़ावा चोरों ने भी कुछ ऐसा ही चमत्कार करने की सोची थी, मगर विफल रह गए.
कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: मोहन भागवत ने राम मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा वाले दिन को भारत का असली स्वतंत्रता दिवस बताया था. तब समझ में नहीं आया, पर अब आ रहा है कि उनका आशय प्रबंधक-चौकीदार रामभक्तों को चोरी आदि करने की स्वतंत्रता से था. ज़ाहिर है यह स्वतंत्रता की अधिक समावेशी अवधारणा है: जिस स्वतंत्रता में चोरी करने की स्वतंत्रता शामिल न हो वह अधूरी स्वतंत्रता ही मानी जाएगी!
इतिहास लेखन सिखाता है कि इतिहास कभी बंद ग्रंथ नहीं होता. वह अतीत और वर्तमान, प्रमाण और व्याख्या, स्मृति और अर्थ के बीच चलने वाला निरंतर संवाद है. जब यह संवाद एकालाप में बदल जाता है, तब इतिहास भी क्षीण होता है और समाज भी. सिनेमा अतीत को प्रकाशित कर सकता है, बशर्ते वह विनम्रता के साथ स्वयं को अंतिम सत्य नहीं, बल्कि एक बड़े और जटिल संवाद का सहभागी माने.
भारत की जेलों में जान गंवाने वाले बंदियों की मौत की श्रेणी अक्सर 'स्वाभाविक या प्राकृतिक मौत' के रूप में दर्ज होती है, जबकि मुमकिन है कि समय से और सही इलाज न मिलने से भी ऐसी मौतें हुई हों, जो स्वाभाविक नहीं हैं. जब तक हिरासत में होने वाली मौतों की रूटीन तरीके से जांच नहीं होगी और उन्हें कठोर एवं स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा से नहीं गुज़रना पड़ेगा, तब तक लंबी बीमारी में समुचित इलाज का इंतज़ार करते क़ैदी
अभिनेता अजय देवगन की नई फिल्म 'चौहान' के ट्रेलर में पैलेट गन को सीमित नुकसान वाला बताया गया है, जिसे लेकर इसकी आलोचना हो रही है. कश्मीर में पैलेट गन पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने राज्य की हिंसा झेली है और अब बॉलीवुड उनके दर्द का मज़ाक उड़ा रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2010-16 के बीच जम्मू-कश्मीर में लगभग 10,000 लोग पैलेट गन से घायल हुए, कई अपाहिज और कई ने आंखों की रोशनी गंवा दी.
कौशांबी ज़िले के एक गांव में तीन मुस्लिम महिलाओं को 'गोमांस' पकाने के संदेह में उनकी रसोई से गिरफ़्तार किया गया है. हालांकि, जिस मीट को 'गोमांस' बताते हुए पुलिस ने कार्रवाई की, उसके बारे में आधिकारिक तौर पुष्टि नहीं हुई है कि बरामद मांस किस पशु का था. महिलाओं के परिवार का आरोप है कि पुरानी रंज़िश के चलते एक ग्रामीण ने उन्हें साज़िश के तहत फंसाया है.
सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गेनाइज्ड हेट की नई रिपोर्ट- ‘प्रॉफिटिंग फ्रॉम हेट म्यूजिक’ संगीत के सहारे पल रहे नफ़रत के कारोबार के बारे में बताती है कि ऐसे गानों में भाजपा और संघ का वही नैरेटिव नज़र आता है, जिसमें मुसलमानों को ‘जिहादी’ और ‘देशद्रोही’ जैसे नामों से संबोधित किया जाता है. जिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ये सब उपलब्ध है, वे इसके ख़िलाफ़ कोई क़दम न उठाते हुए घृणा से हो रही इस कमाई को वैधता दे रहे हैं.
एसआईआर का एक साल: अवैध प्रवासियों की कोई संख्या नहीं, नागरिकों के हक़ों पर रोक, हर राज्य में अलग नियम
मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू होने के सालभर बाद भी निर्वाचन आयोग ने नहीं बताया है कि 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुई इस कवायद में मतदाता सूचियों में कितने कथित 'विदेशी अवैध प्रवासी' पाए गए. इस प्रक्रिया में 5 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए. वहीं, आयोग ने बिना कोई स्पष्ट कारण बताए अलग-अलग राज्यों में एसआईआर के लिए अलग तरीके अपनाए.
संघ परिवार न हिंदू नैतिकता को मानने को तैयार हैं, न संवैधानिक नैतिकता को और अगर कोई भारतीय नैतिकता है तो उसे वह सर्वाधिक दरकिनार करता है. इसीलिए ख़ुद को समस्त हिंदुओं का रहनुमा और संरक्षक बताने के बावजूद वह 'उसके' भव्य और दिव्य राम मंदिर की दानराशि की ईमानदारी से रखवाली नहीं कर पाया.
कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: अगर आप संविधान सभा की याद करें, तो स्पष्ट है कि उसमें सबसे अधिक सदस्य हिंदू थे. हिंदू समाज ने ही मुख्यतः लोकतंत्र को स्वीकार और भारत की धार्मिक-सांस्कृतिक-भाषायी बहुलता का एहतराम किया था. क्या अब उसका हिंदुत्व से प्रेरित-प्रभावित बड़ा हिस्सा लोकतंत्र को तजकर भारतीय राष्ट्र को हिंदू राष्ट्र में बदलना चाह रहा है?
मिदनापुर ज़िले का तामलुक पहली नज़र में बंगाल के किसी भी अन्य आम शहर जैसा लगता है, मगर इतिहास बताता है कि लगभग 2500 वर्ष पूर्व तामलुक की जगह पर बंगाल की खाड़ी पर स्थित था ताम्रलिप्त नामक पोत-नगर, जिसने उस युग में उत्तर तथा पूर्वी भारत के वाणिज्यिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक जीवन में अत्यंत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. बंगनामा की अड़तालीसवीं क़िस्त.
अंतरराष्ट्रीय इतिहासकार, संवैधानिक विशेषज्ञ और वैश्विक संस्थाएं नेहरू को 15 अगस्त, 1947 से ही भारत का पूर्ण रूप से वैध प्रधानमंत्री मानती हैं. इसी दौरान नेहरू ने संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया, कई वैश्विक संधियां कीं और 1952 से पहले ही दुनिया में भारत की विदेश नीति की मजबूत नींव रखी. काश, इन सबके आलोक में ये भक्त समझ पाते कि नेहरू के 1947 से 1952 तक के कार्यकाल को नकारना या उसकी हेठी करना देश के बुनियादी
संयुक्त राष्ट्र के एक जांच आयोग द्वारा जारी 94 पेज के रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के शुरुआती दो सालों में गाज़ा में कम से कम 20,179 बच्चे मारे गए और 44,143 घायल हुए, जो कुल मौतों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है. आयोग ने कहा कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है, क्योंकि माना जा रहा है कि हज़ारों बच्चे अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं.