Aadhaar

आधार को नागरिक केंद्रित बनाने के लिए आधार अधिनियम संशोधित हो: जस्टिस ओका

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अभय एस. ओका ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि आधार क़ानून में संशोधन किया जाना चाहिए, ताकि महत्वपूर्ण दस्तावेज़ से वंचित लोगों को राहत दी जा सके. शिक्षित वर्ग के बीच क़ानूनी साक्षरता की कमी पर खेद व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि लोग चुपचाप अन्याय सहते हैं, क्योंकि वे समाधान का लाभ नहीं उठा पाते हैं.

उत्तर प्रदेश: गांव गए फ़कीरों से अभद्रता का वीडियो सामने आया, युवक ने उन्हें ‘जिहादी-आतंकी’ कहा

उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले का मामला. पुलिस ने बताया कि तीन फ़कीरों से अभद्रता के मामले में एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि इस तथ्य की भी जानकारी की जा रही है कि ये तीनों फ़कीर कौन लोग थे और किस कारण से उस ग्रामसभा में गए थे.

खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पहचान के लिए आधार कार्ड एकमात्र आधार नहींः बॉम्बे हाईकोर्ट

ठाणे के आदिवासी इलाकों के लोगों ने अदालत के समक्ष शिकायत की थी कि प्रशासन ने उन्हें खाद्यान्न देने से इनकार कर दिया है क्योंकि उनके आधार कार्ड आरसीएमएस पोर्टल से जुड़े हुए नहीं हैं. कोर्ट ने एनएफएसए के तहत राशन कार्ड की वैधता बताते हुए कहा कि आधार को अनिवार्य रूप से लागू करना आठ फरवरी 2017 को जारी केंद्र की अधिसूचना का स्पष्ट उल्लंघन है.

केंद्र ने यूआईडीएआई को लिखा पत्र, वोटर कार्ड को आधार से जोड़ने की अनुमति मांगी

अगर आधार बनाने वाली एजेंसी यूआईडीएआई इस पर सहमति जता देती है तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और आधार अधिनियम, 2016 में संशोधन के बिना ही वोटर कार्ड के साथ आधार को लिंक करने का रास्ता साफ़ हो जाएगा.

2019 में सेंसर से पास होने के बावजूद रिलीज़ नहीं हुई फिल्म ‘आधार’, अब यूआईडीएआई ने संशोधन बताए

फिल्म के निर्देशक सुमन घोष ने बताया कि आधार नंबर जारी करने वाली सरकारी एजेंसी यूआईडीएआई के अधिकारियों ने जनवरी में फिल्म दिखाने को कहा था. इसे पांच फरवरी को ही रिलीज़ होना था, लेकिन एक सप्ताह पहले ही अचानक इसे रोक दिया गया. केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने फिल्म को 2019 में हरी झंडी दे दी थी. 

दिल्ली पुलिस ने आधार डेटा की बिक्री संबंधी रिपोर्ट पर ‘द ट्रिब्यून’ के ख़िलाफ़ केस बंद किया

तीन जनवरी 2018 को द ट्रिब्यून अख़बार में प्रकाशित पत्रकार रचना खेड़ा की रिपोर्ट में बताया गया था कि पेटीएम के ज़रिये सिर्फ़ 500 रुपये का भुगतान करने पर दस मिनट के भीतर एक एजेंट ने उन्हें लॉग-इन आईडी और पासवर्ड दिया, जिससे फोटो, फोन नंबर और ईमेल सहित किसी भी आधार नंबर की पूरी जानकारी ली जा सकती थी.

सुप्रीम कोर्ट ने आधार फ़ैसले की समीक्षा की याचिकाएं ख़ारिज कीं, जस्टिस चंद्रचूड़ ने असहमति जताई

सितंबर 2018 में केंद्र सरकार की आधार योजना को लेकर दिए अपने फ़ैसले की समीक्षा के अनुरोध वाली याचिकाओं को बहुमत से ख़ारिज करते हुए पीठ ने कहा कि इसकी ज़रूरत नहीं है.

झारखंड ने एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया, एनपीआर को 2010 की तरह लागू करने की मांग

इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद राज्य की विधानसभा को कोरोना वायरस के मद्देनजर अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित कर दिया गया है.

राज्यसभा में सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का प्रस्ताव रखा. (फोटो: आरएसटीवी/पीटीआई)

एनपीआर में कोई दस्तावेज़ नहीं मांगा जाएगा, किसी को ‘संदिग्ध’ नहीं माना जाएगा: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सभा में कहा, ‘एनपीआर के लिए कोई दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे. अगर किसी के पास कोई जानकारी नहीं है तो उसे साझा करने की जरूरत नहीं है.’

एक्सक्लूसिव: एनपीआर पर जनता को गुमराह करती मोदी सरकार

वीडियो: द वायर द्वारा प्राप्त किए गए आधिकारिक दस्तावेज़ों से खुलासा होता है कि किस तरह केंद्र की मोदी सरकार काफी पहले से एनपीआर में आधार को ‘अनिवार्य’ करने का न सिर्फ़ मन बना चुकी थी, बल्कि करीब 60 करोड़ आधार नंबर को एनपीआर से जोड़ने का काम भी पूरा हो चुका है.

प्रधानमंत्री कार्यालय ने ख़ुद कहा था कि एनपीआर के साथ आधार ज़रूर जोड़ा जाना चाहिए

विशेष रिपोर्ट: द वायर द्वारा प्राप्त किए गए आधिकारिक दस्तावेज़ों से पता चलता है कि 15 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तत्कालीन प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी, जिसमें आधार जारी करने, एनपीआर डेटाबेस के साथ आधार नंबर को जोड़ने और समय-समय पर एनपीआर में आधार नंबर अपडेट करने को लेकर चर्चा की गई थी.

गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2019 में एनपीआर के लिए आधार नंबर अनिवार्य करने का किया था प्रस्ताव

द वायर एक्सक्लूसिव: दस्तावेज़ों से पता चलता है कि केंद्र सरकार ने एनपीआर में अनिवार्य रूप से आधार इकट्ठा करने के लिए आधार क़ानून या नागरिकता क़ानून में भी संशोधन करने का प्रस्ताव रखा था.

तक़रीबन 60 करोड़ आधार नंबर पहले ही एनपीआर से जोड़े जा चुके हैं

द वायर एक्सक्लूसिव: गृह मंत्रालय आश्वासन दे रहा है कि जिन लोगों के पास आधार नंबर नहीं है उन्हें एनपीआर अपडेट करने के दौरान ऐसे दस्तावेज़ देने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा. हालांकि प्राप्त किए आधिकारिक दस्तावेज़ सरकार के इन आश्वासनों पर सवालिया निशान खड़े करते हैं.

सोशल मीडिया दुरुपयोग पर नियम बनाने के लिए केंद्र ने तीन महीने का और समय मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी पिछली सुनवाई में कहा था कि केंद्र इस संबंध में तीन हफ्ते के भीतर दिशानिर्देश जारी करे.