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पंजाब: 18 सालों में 6 ज़िलों के नौ हज़ार किसानों ने आत्महत्या की, 88 फीसदी क़र्ज़ में थे- अध्ययन

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संगरूर, बठिंडा, लुधियाना, मनसा, मोगा और बरनाला ज़िलों के सभी गांवों में घर-घर जाकर किया गया सर्वे बताता है कि साल 2000 से 2018 के बीच आत्महत्या करने वालों में सीमांत और छोटे किसानों की संख्या अधिक है. इनमें से 75 फीसदी किसान 35 वर्ष से कम उम्र के थे.

कैग ने गुजरात के बढ़ते क़र्ज़ को लेकर चेताया, बिहार के अस्पतालों की दशा दयनीय बताई

गुजरात, बिहार, महाराष्ट्र, केरल, पश्चिम बंगाल और ओडिशा राज्यों से संबंधित इन कैग रिपोर्ट्स को हाल ही में संबंधित विधानसभाओं में पेश किया गया, जिनमें राज्यों की आर्थिक हालत और अन्य परियोजनाओं पर हुए काम और उनकी स्थिति पर जानकारियां दी गई हैं.

देश में 2019 में पचास प्रतिशत से अधिक कृषक परिवार क़र्ज़ में दबे: सर्वे

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने जनवरी-दिसंबर 2019 के दौरान देश के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारिक भूमि और पशुधन के अलावा कृषि परिवारों की स्थिति का आकलन किया. इसके अनुसार 2019 में कृषक परिवारों पर प्रति परिवार औसतन 74,121 रुपये क़र्ज़ था. सर्वे के मुताबिक़, कुल क़र्ज़ में 57.5 % कृषि उद्देश्य से लिए गए.

उत्तर प्रदेश: कथित तौर पर आर्थिक तंगी से परेशान किसान ने ट्रेन से कटकर जान दी

उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले के बदौसा क्षेत्र का मामला है. परिजनों ने बताया कि चार साल पहले उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड से एक लाख रुपये क़र्ज़ लिया था, जिसे वापस नहीं कर पाए थे. दो ​बेटियों की शादी तय हो गई थी और घर में आर्थिक तंगी थी.

उत्तर प्रदेश: फ़सल नष्ट होने से कथित तौर पर परेशान किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या की

उत्तर प्रदेश के महोबा ज़िले का मामला. अधिकारियों ने परिजनों के हवाले से बताया कि किसान पर साहूकारों का तीन लाख रुपये क़र्ज़ भी था.

उत्तर प्रदेश: क़र्ज़ और आर्थिक तंगी से कथित तौर पर परेशान मज़दूर और किसान ने जान दी

उत्तर प्रदेश हमीरपुर ज़िले के एक गांव में 50 वर्षीय मज़दूर ने पेड़ से फांसी लगा ली. वहीं, बांदा ज़िले के मटौंध क्षेत्र में आर्थिक तंगी से परेशान एक किसान ने अपने घर में कथित रूप से फांसी लगा ली है.

उत्तर प्रदेश: कथित तौर पर आर्थिक तंगी से परेशान किसान ने फांसी लगाई

उत्तर प्रदेश के फ़तेहपुर ज़िले का मामला. परिजनों के मुताबिक किसान पर बैंक का 70 हजार रुपये क़र्ज़ था और वह आर्थिक तंगी से परेशान थे.

मध्य प्रदेश: बिजली बिल जमा न करने पर हुई कुर्की से क्षुब्ध किसान ने आत्महत्या की

छतरपुर ज़िले के 35 वर्षीय मुनेंद्र द्वारा बिजली का बिल भुगतान न करने पर विभाग ने उनकी आटा चक्की और मोटरसाइकिल ज़ब्त कर ली थी. मुनेंद्र ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि उनके मरने के बाद उनका शरीर शासन को दे दिया जाए ताकि उनके अंग बेचकर शासन का कर्ज़ चुक सके.

उत्तर प्रदेश: कथित आर्थिक संकट के चलते बांदा और हमीरपुर ज़िले में छह लोगों ने आत्महत्या की

उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले में कथित रूप से आर्थिक तंगी के चलते दो प्रवासी मज़दूर समेत पांच लोगों ने फ़ांसी लगाकर आत्महत्या की. वहीं हमीरपुर ज़िले में कर्ज़ वापस न कर पाने से परेशान एक किसान के ख़ुदकुशी करने का मामला सामने आया है.

उत्तर प्रदेश: बैंककर्मियों की कुर्की की कथित धमकी से परेशान किसान ने नहर में जान दी

मामला एटा ज़िले का है. मृतक किसान के भाई ने आरोप लगाया कि बैंककर्मियों ने घर आकर कुर्की की धमकी दी थी. किसान ने चार लाख रुपये का क़र्ज़ लिया था. बांदा जिले में भी एक किसान की आत्महत्या का मामला सामने आया है. उन पर ढाई लाख रुपये का क़र्ज़ था.

महाराष्ट्र: साहूकार के कथित उत्पीड़न के बाद क़र्ज़ में डूबे किसान ने आत्महत्या की

मामला महाराष्ट्र के बीड ज़िले का है. पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से मिले एक सुसाइड नोट में किसान ने साहूकार पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है, जिसके बाद साहूकार को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

उत्तर प्रदेश: कथित रूप से क़र्ज़ से परेशान किसान ने फांसी लगाकर जान दी

मामला हमीरपुर ज़िले का है. पुलिस के अनुसार मृतक किसान की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. संभव है कि उन्होंने क़र्ज़ और आर्थिक तंगी के चलते आत्महत्या की है.

कैफ़े कॉफ़ी डे ने अप्रैल से जून के बीच 280 रेस्तरां बंद किए

कैफ़े कॉफ़ी डे ने एक बयान में कहा कि कम मार्जिन की वजह से निर्यात कारोबार फिलहाल ठप पड़ा है. पूंजी की ज़रूरतों, मुनाफ़े, भविष्य के ख़र्चे इत्यादि को देखते हुए कंपनी ने अपने क़रीब 280 रेस्तरां बंद कर दिए हैं.

क्या मोदी सरकार का आख़िरी बजट वास्तव में भारत की तरक्की की कहानी बयां करता है?

3000 करोड़ रुपये की मूर्ति, 1 लाख करोड़ रुपये की बुलेट ट्रेन उस देश की सबसे पहली ज़रूरतें हैं, जहां छह करोड़ बच्चे कुपोषित हैं, शिक्षकों के दस लाख पद ख़ाली हैं, सवा तीन लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं और 20 करोड़ लोग रोज़ भूखे सोते हैं.

हमें राजनीतिक आज़ादी तो मिल गई, लेकिन सामाजिक और आर्थिक आज़ादी कब मिलेगी?

आज़ादी के 71 साल: सरकार यह महसूस नहीं करती है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा पर किया गया सरकारी ख़र्च वास्तव में बट्टे-खाते का ख़र्च नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए किया गया निवेश है.