पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि ग़ाज़ियाबाद पुलिस उन्हें और उनके परिजनों को परेशान कर रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस देर रात उनके घर पहुंची, जबकि उनके ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों और दर्ज एफआईआर की पूरी जानकारी उन्हें ठीक से नहीं दी जा रही है. उपाध्याय उन शुरुआती पत्रकारों में शामिल थे, जिन्होंने अयोध्या राम मंदिर में भ्रष्टाचार और चढ़ावा चोरी के आरोपों को सामने लाया था.
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खासी स्टूडेंट्स यूनियन ने 19 अगस्त को विभिन्न मांगों को लेकर शिलॉन्ग में बाइक रैली निकाली थी, रैली के दौरान शहर के कई हिस्सों में वाहनों को क्षतिग्रस्त किया गया, लोगों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और सरकारी संपत्तियों में तोड़फोड़ की गई. इस बीच, मेघालय हाईकोर्ट ने हिंसा में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ तुरंत कार्रवाई करने का आदेश दिया है.
तिरंगे से बलिदान की अनगिनत कहानियां जुड़ी हैं. सबके पास कोई कहानी है. पर स्वतंत्र भारत में तिरंगे की कुछ अलग कहानियां भी हैं. इनको भी न भूलें. न इनको नज़रअंदाज़ करें. ये डरावनी कहानियां हैं. ये उन बलिदान कथाओं को मुंह चिढ़ाती हैं. तिरंगे की ये नई कहानियां भी पढ़ें.
ईरान की आवाज़: तेहरान टाइम्स की पत्रकार सहर दादजू का यह लेख युद्ध की खबरों के पीछे छिपे मानवीय दर्द को सामने लाता है. वह बताता हैं कि लगातार हमलों के बीच पत्रकार होना कैसा अनुभव है और कैसे मौत के आंकड़ों के पीछे हर व्यक्ति किसी परिवार की पूरी दुनिया होता है. लेख में एक परिवार की कहानी के ज़रिये युद्ध की भयावहता को समझने की कोशिश की गई है.
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह प्रशासन ने निजी क्षेत्र की कंपनियों और संस्थाओं से ‘ग्रीन एआई या डेटा सेंटर वर्टिकल’ बनाने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मंगवाए थे. अब 'प्रशासनिक कारणों' का हवाला देते हुए इस प्रक्रिया को वापस ले लिया गया है.
एनसीईआरटी ने कक्षा 11 और 12 की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने के लिए एक नई टीम गठित की है. इस पैनल में आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पूर्व पदाधिकारी, आरएसएस से जुड़े संगठनों के सदस्य और भाजपा के लिए राजनीतिक सलाहकार के तौर पर काम कर चुके लोग शामिल हैं.
महाराष्ट्र लॉ सीईटी के पहले कैप राउंड में कई प्रमुख लॉ कॉलेजों के नाम सूची से गायब होने के कारण छात्रों को दाखिले के विकल्प सीमित होने और फॉर्म लॉक-अनलॉक होने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा. छात्रों के मुताबिक, बीसीआई की मंज़ूरी में देरी से यह स्थिति बनी. हालांकि, हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कॉलेज सूची में जोड़े गए और दाखिले की तारीखें बढ़ाई गईं.
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