पश्चिम बंगाल के हालिया विधानसभा चुनाव में जो हुआ, उसे लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. कई प्रेक्षक इस सवाल पर देश के 'बंट' जाने की बात करते हुए इसे लोकंतत्र और प्रभुत्व की लड़ाई बता रहे हैं, तो वहीं कुछ इसे सत्ता विरोधी लहर कह रहे हैं. साम, दाम दंड, भेद के इर्द-गिर्द तमाम तर्क दिए जा रहे हैं. ऐसे में यूपी के एक गांव के लोगों ने इस पर क्या कहा इस लेख में पढ़ें...
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पुस्तक समीक्षा: आदिवासी स्त्रियों के जीवन को केंद्र में रखते हुए उनके संघर्ष को सामने रखती जसिंता केरकेट्टा की किताब ‘औरत का घर’ नारीवादी दृष्टि से लिखित एक महत्वपूर्ण कहानी संग्रह है. उनकी कहानियां केवल व्यक्तिगत पीड़ा का बयान नहीं हैं, बल्कि वे आदिवासी समुदाय के व्यापक सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ, हाशियाकरण, विस्थापन और संरचनात्मक हिंसा को भी उजागर करती हैं.
कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: आज के दुर्व्याख्या और विस्मृति के दौर में भी कुछ बुद्धिजीवी ऐसे हैं जो प्रमाणित तथ्यों और संदर्भों के साथ दुर्व्याख्या को प्रश्नांकित कर रहे हैं. वे स्मृति का आग्रह कर रहे हैं. इसमें जोखिम है, देर-सबेर हो सकता है कि उन पर हमले हो जाएं. पर ये बुद्धिजीवी रक्तबीज हैं: उन्हें हटा या नष्ट या हाशिये पर भी डाल दिया जाए तो नए युवा बुद्धिजीवी पैदा होंगे जो उनके बौद्धिक सत्याग्रह को आगे ले जाएंगे.
ईडी ने पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा को गिरफ़्तार कर लिया है. आम आदमी पार्टी ने इसे केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर की गई राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, क्योंकि पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.
राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ जघन्य अपराधों में दोषी क़ैदियों को पैरोल दिए जाने की मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि आयोग जल्द ही केंद्र सरकार को अपनी सिफ़ारिशें सौंपेगा, जिनमें महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ यौन अपराधों में दोषियों के लिए पैरोल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है.
केंद्र सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को दूरसंचार अधिनियम के तहत 'राज्य सरकार की शक्तियों का प्रयोग करने और कार्यों का निर्वहन करने' का निर्देश दिया गया है. जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के 2019 में लागू होने के बाद से यह दूसरी बार है जब केंद्र सरकार ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए निर्वाचित सरकार की शक्तियों को सीमित किया है.
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी ‘एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के शिक्षण परिसरों में 14,488 छात्रों ने आत्महत्या की. यह संख्या भारत में दर्ज कुल 1,70,746 आत्महत्याओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
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