ऐसे समय में जब भारत को आर्थिक, वैज्ञानिक, सामाजिक और नैतिक रूप से आगे बढ़ने पर चर्चा करनी चाहिए, यह दुखद है कि एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी 'बदले' की भाषा बोल रहा है. एनएसए की भूमिका वास्तविक ख़तरों के ख़िलाफ़ देश को एकजुट करने की होनी चाहिए, न कि ऐतिहासिक घावों को कुरेदकर समाज को बांटने की.