भारतीय लोकतंत्र को अब 'नारी वंदन' से आगे बढ़ना होगा. वंदन में हमेशा एक ऊंच-नीच छिपी रहती है. कोई ऊपर है, कोई नीचे, कोई हाथ जोड़ रहा है, कोई पूजित है. लोकतंत्र का संबंध वंदन से नहीं, सहभागिता से है.