मेटा ने भारत में इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित विज्ञापनों की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उसने अपने विभिन्न प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट से निपटने के लिए कई उपाय किए हैं, जिसके चलते पिछले एक साल में भारत में ऐसे 1,60,000 से ज़्यादा विज्ञापनदाताओं के अकाउंट हटाए गए हैं. कंपनी ने जोड़ा है कि यह कहना पूरी तरह ग़लत है कि वह जानबूझकर और सोच-समझकर ऐसे विज्ञापन दिखाती है.
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर दावा किया गया है कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ताजमहल मूल रूप से 'तेजो महालय' नामक भगवान शिव का एक मंदिर था. याचिका में अदालत से एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की है, जो ताजमहल का निरीक्षण करे. फ़िलहाल अदालत ने दावों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी न करते हुए इस बारे में केंद्र सरकार और एएसआई से जवाब मांगा है.
गुजरात में मोरबी ज़िले के जेटपार गांव में किसान पिछले 20 दिनों से अडानी समूह की बिजली ट्रांसमिशन परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ आमरण अनशन कर रहे हैं. इस बीच सरकार ने मुआवज़ा राशि बढ़ाने की घोषणा की है, लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि उन्हें मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित प्रस्ताव चाहिए. साथ ही वे अपनी ज़मीनों के बदले बाज़ार भाव का दोगुना नहीं, चार गुना मुआवज़ा देने की मांग कर रहे हैं.
दक्षिणी राजस्थान की महिलाओं के लिए नरेगा सिर्फ़ रोज़गार नहीं, बल्कि सशक्तिकरण का माध्यम रहा है. अब वीबी-जी राम जी को लेकर उनका सवाल है कि क्या ये उन्हें नरेगा जैसे अवसर दे पाएगा?
कर्नाटक एसआईआर: विरोध में एनडीए, कांग्रेस बोली- हिम्मत है तो प्रक्रिया को ‘ग़लत व अलोकतांत्रिक’ कहें
कर्नाटक में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भाजपा और जेडीएस ने अपना विरोध दर्ज करवाते हुए प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाया है. कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस विरोध को भाजपा और एनडीए का दोहरा रवैया बताया है. यह पहली बार जब भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन एसआईआर का खुलकर विरोध कर रहा है.
हिंसाग्रस्त मणिपुर के उखरुल ज़िले में नोंगशोंग कोंग गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में असम राइफल्स के दो जवानों की मौत हो गई. मणिपुर सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि दोषियों को जल्द ही सज़ा दिलाई जाएगी.
ई-20 ईंधन पर मोदी सरकार की प्रेस वार्ता के बावजूद कई अहम सवालों का जवाब अब भी मौजूद नहीं है. पुराने वाहनों की सुरक्षा, कम माइलेज के बावजूद समान क़ीमत, कृषि सब्सिडी और भूजल की लागत, भंडारण से जुड़े जोखिम, नीति आयोग की हटाई गई रिपोर्ट और उपभोक्ताओं को मुआवज़े जैसे मुद्दों पर सरकार ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया है.
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