अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर भारतीय सामानों पर लगाए गए 25% टैरिफ को घटाकर 18% करने का ऐलान इस शर्त पर किया है कि भारत रूस से कच्चे तेल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात बंद करेगा और अमेरिका से ऊर्जा उत्पादों की खरीद बढ़ाएगा. ट्रंप का यह आदेश भारत के लिए कई रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिम पैदा करता है.
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शेख़ हसीना के दिल्ली से दिए बयान पर बांग्लादेश नाराज़, भारत पर कूटनीतिक मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाया
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने दिल्ली में आयोजित शेख़ हसीना के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर ‘हैरानी’ ज़ाहिर करते हुए कहा कि यह न सिर्फ़ कूटनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन है, बल्कि ‘बांग्लादेश के लोगों और सरकार का खुला अपमान’ भी है, जो भविष्य में चुनी हुई किसी भी सरकार की भारत के साथ संबंध संचालित करने की क्षमता को ‘गंभीर रूप से प्रभावित’ कर सकता है.
कोरापुट ज़िला प्रशासन ने बीते शुक्रवार गणतंत्र दिवस के अवसर पर मांस, चिकन, मछली, अंडे और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध का आदेश दिया था. इसकी आलोचना के बाद रविवार को जारी एक नए आदेश में कहा गया कि यह निर्देश ज़िला स्तरीय गणतंत्र दिवस तैयारी समिति के सुझाव पर जारी किया गया था, जिसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है.
स्मृति शेष: जिस पीढ़ी ने ट्रांजिस्टर रेडियो पर राजनीति को समझना सीखा, उसके लिए मार्क टली सिर्फ़ संवाददाता नहीं थे. वह उलझन में साथी थे, एक ऐसे देश के लिए दिशासूचक, जो स्वयं को समझने की कोशिश कर रहा था.
इस ‘गणतंत्र’ के बंदियों को सुप्रीम कोर्ट के कथनानुसार व संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार कभी हासिल होगा? ‘जेल अपवाद है व ज़मानत नियम,’ यह धरातल पर फलीभूत कभी होगा या जेलों के यातनागृह में बंदियों को पीसकर भ्रष्ट अधिकारियों के पौ-बारह होते रहेंगे? स्वतंत्र पत्रकार और पटना की बेऊर जेल में विचाराधीन बंदी रूपेश कुमार सिंह का लेख.
'यह कितना बड़ा झूठ है कि कोई राज्य दंगे के कारण अंतरराष्ट्रीय ख्याति पाए, लेकिन झांकी सजाए लघु उद्योगों की. दंगे से अच्छा गृह-उद्योग तो इस देश में दूसरा है नहीं.' गणतंत्र दिवस पर पढ़िए हरिशंकर परसाई को.
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि अल्पसंख्यक समुदाय के पात्र मतदाताओं के ख़िलाफ़ शिकायतें दर्ज करने के लिए फॉर्म-7 का दुरुपयोग किया जा रहा है. वहीं, सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा का कहना है कि नोटिस केवल ‘मिया’ यानी बांग्लादेश मूल के मुस्लिम प्रवासियों को भेजे जा रहे हैं, न कि किसी भी आदिवासी, हिंदू या असमिया मुस्लिम समुदाय को.
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