अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर भारतीय सामानों पर लगाए गए 25% टैरिफ को घटाकर 18% करने का ऐलान इस शर्त पर किया है कि भारत रूस से कच्चे तेल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात बंद करेगा और अमेरिका से ऊर्जा उत्पादों की खरीद बढ़ाएगा. ट्रंप का यह आदेश भारत के लिए कई रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिम पैदा करता है.
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पिछले तीन वर्षों से लोकपाल की वार्षिक रिपोर्ट संसद के पटल पर नहीं रखी गई हैं. वर्तमान लोकपाल के लगातार निवेदन के बावजूद राष्ट्रपति ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया. अंततः वार्षिक रिपोर्ट को डाक से भेजा गया, और शीतकालीन सत्र के पहले ही राष्ट्रपति कार्यालय ने इसे स्वीकार भी किया. लेकिन फिर भी यह संसद में पेश नहीं की गई. क्या पारदर्शिता की कमी, भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ बनी यह संस्था ही अब जवाबदेही तलाश रही है?
मई 2023 में मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा के चरम के दौरान अपहरण कर सामूहिक बलात्कार की शिकार बनाई गई मणिपुर की एक कुकी महिला की बीते दिनों बीमारी के कारण मौत हो गई. आरोप है कि हिंसा के दौरान लगी चोटों के कारण उनकी बीमारी और गंभीर हो गई थी. घटना के समय पीड़िता की उम्र 18 वर्ष थी.
पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय मछुआरों की रिहाई में देरी के बीच गुजरात के एक मछुआरे की 16 जनवरी को मौत हो गई. उसकी सज़ा 2022 में पूरी हो चुकी थी. एक्टिविस्ट और पत्रकार जतिन देसाई ने इसे मानवीय संकट बताते हुए भारत-पाक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत को शामिल होने का आमंत्रण मिला है. गाज़ा शांति पहल के तौर पर शुरू हुई यह योजना अब एक नए अंतरराष्ट्रीय ढांचे का रूप लेती दिख रही है, जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि इस पहल में शामिल होना भारत की संप्रभुता, उसकी स्वतंत्र विदेश नीति और वैश्विक कूटनीतिक संतुलन को किस तरह प्रभावित करेगा.
महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में मार्कर पेन की स्याही मिटने के विवाद के बाद राज्य चुनाव आयोग ने अब आगामी स्थानीय चुनावों के लिए बोतलों वाली पारंपरिक स्याही इस्तेमाल करने का फैसला किया है. विपक्षी दलों द्वारा धांधली की आशंका जताने और जांच की मांग के बाद प्रशासन ने मैसूर पेंट्स को स्याही की लाखों बोतलों का ऑर्डर दिया है.
यूजीसी द्वारा संसदीय समिति और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों से पता चला है कि देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों में पिछले पांच वर्षों में 118.4% की वृद्धि हुई है. इस संबंध में दर्ज की गई घटनाओं की संख्या 2019-20 में 173 से बढ़कर 2023-24 में 378 हो गई.
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