द वायर का इंस्टाग्राम अकाउंट मोदी सरकार पर व्यंग्यात्मक कार्टून को लेकर भारत में सोमवार शाम क़रीब दो घंटे तक ब्लॉक रहा. मंत्रालय ने ज़िम्मेदारी इनकार किया, जबकि मेटा द्वारा ‘ग़लती’ की बात सामने आई. बिना पूर्व सूचना की गई इस कार्रवाई ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल सेंसरशिप पर सवाल खड़े किए हैं.
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बांग्लादेश में हाल के दिनों में हुई दो हिंदू व्यक्तियों की लिंचिंग के बाद भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ जारी हिंसा पर चिंता व्यक्त की गई थी. ढाका ने इसे ख़ारिज करते हुए कहा कि भारत की आलोचना तथ्यों से परे है.
सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को अरावली पहाड़ियों की परिभाषा के बारे में पर्यावरण मंत्रालय की जिन सिफ़ारिशों को मंज़ूरी दी थी उस पर अब रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने कहा कि परिभाषा से जुड़े 20 नवंबर के आदेश को फिलहाल स्थगित रखा जाए क्योंकि इसमें कई ऐसे मुद्दे हैं जिनकी और जांच की ज़रूरत है.
उन्नाव रेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी से निकाले गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सज़ा को निलंबित करते हुए उन्हें ज़मानत दे दी गई थी.
पुस्तक अंश: बलवंत कौर अपनी पुस्तक ‘स्मृति और दंश’ में लिखती हैं, '1992 में मस्जिद का ढांचा गिराते समय भी अतीत में हुए अन्याय और उत्पीड़न का कथानक रचकर न सिर्फ़ इस कृत्य को जायज़ ठहराया गया बल्कि धार्मिक विभाजन का विरोध कर पाकिस्तान न जाने का फ़ैसला लेने वाले और नये बन रहे लोकतंत्र में आस्था दिखाने वाले मुसलमानों को भी उसी अतीत के उत्पीड़न के तर्क के आधार पर प्रताड़ित किया गया. यहां तक कि 'समय-समय पर उन्हें
दिल्ली विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम निर्माण ज्ञान और हिंदुत्ववादी विचारधारा की रस्साकशी बन गया है. जेंडर, जाति, भेदभाव और विश्व इतिहास जैसे विषयों को हटाने का दबाव बढ़ रहा है. इससे अकादमिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की बौद्धिक गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. इसी विषय पर पढ़ें दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद का लेख.
प्रभात पटनायक की नई पुस्तक 'सोशलिज़्म एंड द इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन' के ज़रिए हर्ष मंदर भारत के उत्तर-औपनिवेशिक समाजवाद, नव-उदारवाद के संकट और नव-फ़ासीवाद के उभार का गहन विश्लेषण करते हैं. यह लेख संविधान में निहित समतावादी मूल्यों को पुनः हासिल करने की ज़रूरत पर ज़ोर देता है.
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