अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे पर कि भारत ने रूसी कच्चे तेल का आयात पूरी तरह रोकने पर सहमति जताई है, उठे सवालों के जवाब में विदेश और वाणिज्य मंत्रियों के बयान इस धारणा को और मज़बूत करते हैं कि सरकार अपनी स्थिति साफ़ करने से बच रही है. दोनों मंत्रालयों के एक-दूसरे पर ज़िम्मेदारी डालने के बीच, किसी स्पष्ट इनकार का न होना अब मूक सहमति जैसा दिखने लगा है.
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मानवता के इतिहास में तमाम करुण कहानियां अनकही रही गई हैं. इरोम शर्मिला का अपनी मुसलसल हार के लिए जनता को धन्यवाद देना वैसी ही एक अनकही कहानी है.
भारत की सियासत में जब तक अलग से मुसलमानों की बात होती रहेगी तब तक हिंदुत्व ज़िंदा रहेगा.
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा में राजनाथ सिंह, उमा भारती, मनोज सिन्हा, केशव मौर्या, योगी आदित्यनाथ समेत तमाम नामों पर चर्चा चल रही है.
उत्तर प्रदेश में चुनाव पूर्व सपा और कांग्रेस में गठबंधन हुआ, जिसका नुकसान दोनों को हुआ. दरअसल, यह गठबंधन ही ग़लत था.
भले ही जनता ने मोदी को विधानसभा में प्रचंड बहुमत दे दिया है लेकिन लोकसभा की तरह उसे यहां भी निराश होना पड़ेगा. वजह साफ है कि न तो मोदी के पास कोई बड़ी दृष्टि है और न ही उनके पास स्थितियों को समझने का धैर्य.
हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा ऐसे माहौल में समाज में सांप्रदायिक भय खड़ा करता है. हिंसा का भय 1984 के चुनाव में राजीव गांधी के रणनीतिकारों ने भी खड़ा किया था. तब राजीव गांधी ने भी जीत का कीर्तिमान बनाया था. यह कीर्तिमान अब मोदी-शाह ने बनाया है.
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