अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा राशि की कथित चोरी के सामने आने के बाद बीते 6 जुलाई को विश्व हिंदू परिषद के नेता चंपत राय ने श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. अब उन्होंने एक नोट जारी कर कहा है कि वह इस मामले में मौन रहेंगे और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद उनके ऊपर लगाए जा रहे आरोपों पर जवाब देंगे.
राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी पर एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट में 40 दिनों में 70 बार नकदी चोरी होने, छह लोगों पर एफआईआर की सिफ़ारिश और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलताओं का उल्लेख है. लेकिन गबन की कुल राशि, शीर्ष स्तर की जवाबदेही और वर्षों से चली आ रही संस्थागत कमियों पर रिपोर्ट कई अहम सवाल अनुत्तरित छोड़ देती है.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने एक बयान जारी कर चढ़ावा चोरी के आरोपों पर कहा कि मंदिर की हुंडी में जमा होने वाले चढ़ावे की गिनती से उनका कभी कोई संबंध नहीं रहा. उन्होंने अपनी भूमिका को लेकर सफ़ाई देते हुए यह भी जोड़ा कि ट्रस्ट के सभी ख़र्च सीधे बैंक के माध्यम से किए जाते हैं और वे बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं.
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं और चढ़ावे की राशि को लेकर उठे सवालों के बीच निर्मोही अखाड़े के अध्यक्ष महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि दान की राशि को गुप्त रखने के बजाय उसकी रसीद देना और समाज के सामने उसका हिसाब रखना ज़रूरी है. उन्होंने जोड़ा कि रामलला के नाम पर आने वाले धन के मामले में पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए, यदि किसी ने ग़लती की है तो उसे क़ानून के दायरे में लाना चाहिए.
विश्व हिंदू परिषद ने यूपी पुलिस और विशेष जांच दल को पत्र लिखकर राम मंदिर में चढ़ावा राशि के कथित गबन की जांच में समाजवादी पार्टी के महासचिव और सांसद राम गोपाल यादव, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, सांसद संजय सिंह और कांग्रेस नेता एवं लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान दर्ज करने का आग्रह किया है.
चढ़ावा चोरी के प्रसंग में उपज आए ज्ञानीजन बताते हैं कि उनके शास्त्र में चोरी को चोरी की तरह न कर पाने और हेराफेरी या सीनाज़ोरी पर उतर आने वाले चोरों को कतई ‘कलाकार’ नहीं माना जाता. तब माना जाता है, जब वे देखते-देखते अपने शिकार की आंखों से काजल निकाल लें और आंखवाले को भनक तक न लगे. कहते हैं कि चढ़ावा चोरों ने भी कुछ ऐसा ही चमत्कार करने की सोची थी, मगर विफल रह गए.
कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: मोहन भागवत ने राम मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा वाले दिन को भारत का असली स्वतंत्रता दिवस बताया था. तब समझ में नहीं आया, पर अब आ रहा है कि उनका आशय प्रबंधक-चौकीदार रामभक्तों को चोरी आदि करने की स्वतंत्रता से था. ज़ाहिर है यह स्वतंत्रता की अधिक समावेशी अवधारणा है: जिस स्वतंत्रता में चोरी करने की स्वतंत्रता शामिल न हो वह अधूरी स्वतंत्रता ही मानी जाएगी!
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों के बाद चुप्पी तोड़ते हुए पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आधिकारिक बयान जारी किया है. संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा जारी एक बयान में चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और धन की हेराफेरी के मामले में गहन जांच कराने और दोषियों को कड़ी सज़ा देने की मांग की गई है.
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गबन के मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की दो दिन की पुलिस हिरासत की मांग की है. पुलिस अब एसबीआई के दो कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है, जो मंदिर के तय बैंक अकाउंट में कैश जमा करने से पहले चढ़ावे की गिनती की नियमित निगरानी करते थे. जांच के घेरे में श्याम साधनालय योग केंद्र भी आया है जहां ‘राम राज्य कोष’ नाम की एक दानपेटी मिली है.
मंगलवार सुबह कांंग्रेस प्रतिनिधिमंडल को नज़रबंद किए जाने बाद उन्हें देर रात पुलिस सुरक्षा में हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में पूजा-अर्चना करने की अनुमति दे दी गई. इस बीच कांग्रेस ने मंदिर से जुड़े अलग-अलग ट्रस्ट के लोगों, जिनमें चंपत राय और नृपेंद्र मिश्रा भी शामिल हैं - की गिरफ़्तारी की मांग की है. साथ ही योगी आदित्यनाथ सरकार और आरएसएस पर श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ का आरोप लगाया है.
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के आरोपों के बीच कांग्रेस का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार (30 जून) को अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन के लिए जाने वाला था. अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने अयोध्या के एक होटल में पुलिस द्वारा उन्हें नज़रबंद करने का आरोप लगाया है.
लाल दास का महत्व केवल उनकी हत्या में नहीं है. उनका महत्व इस बात में है कि वे एक वैकल्पिक सोच का प्रतिनिधित्व करते थे. वे मानते थे कि धार्मिक आस्था के साथ जवाबदेही भी जरूरी है. आज जब अयोध्या फिर से जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़े सवालों के बीच चर्चा में है, तब लाल दास की कहानी हमें याद दिलाती है कि ऐसे सवाल नए नहीं हैं.
बीते दो हफ़्तों से ज़्यादा समय से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर के फंड में गड़बड़ी और मंदिर परिसर से कीमती चढ़ावे की चोरी के आरोपों के चलते सुर्ख़ियों में है. इस संबंध में अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में 16 जून से 18 जून के बीच फंड के ग़लत इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए तीन शिकायतें दर्ज की गई हैं. हालांकि, अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है.
अयोध्या के चढ़ावे के गबन मामले में कई प्रतिप्रश्न अभी तक अनुत्तरित हैं. यह कि अगर कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आई तो ट्रस्ट ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से जांच के लिए एसआईटी क्यों गठित करवाई? ऐसी एसआईटी, जिसके सदस्यों की ही निष्पक्षता पर गंभीर संदेह हैं. विरोधी तो कह रहे हैं कि इस एसआईटी जांच के पीछे ट्रस्ट की मंशा सच सामने लाने की नहीं, सीबीआई या ईडी की जांच से बचने की है.
अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोपों ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. विपक्षी दल ट्रस्ट, भाजपा और केंद्र सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं. एसआईटी जांच के बीच विनय कटियार समेत कई हिंदुत्ववादी नेताओं के बयान भी बहस का केंद्र बन गए हैं.