निहत्थे और ‘ख़तरनाक’ युवाओं का नया कॉकरोच लोकतंत्र

क्या सभी लोगों को हर समय मूर्ख बनाया जा सकता है? क्या करोड़ों की आबादी वाले इस देश के लोग हमेशा मुर्दा बने रहेंगे? ऐसा नहीं हो सकता. कॉकरोच एक नई शुरुआत करते हुए निकल पड़े हैं.

दिल्ली: हिरासत में लिए गए छात्रों की मदद के लिए पहुंचे वकील का पुलिस पर मारपीट का आरोप

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के एक वकील ने दक्षिण-पूर्व ज़िले के पुलिस उपायुक्त को भेजी शिकायत में आरोप लगाया है कि 23-24 जुलाई की दरम्यानी रात जब वे जंतर-मंतर जाने के दौरान हिरासत में लिए गए छात्रों की मदद के लिए निजामुद्दीन थाने पहुंचे, तो पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और अवैध तरीके से हिरासत में रखा. पुलिस ने यह कहते हुए कि उन्हें हिरासत में लेना ग़ैर-क़ानूनी नहीं था, मारपीट के आरोप से इनकार किया है.

कॉकरोचों का गणतंत्र: दिल्ली की सड़कों पर युवाओं का वसंत

पेपर लीक में श्रम, आयु, विश्वास और सामाजिक गतिशीलता की संभावना चुराई जाती है. जिस युवक ने तीन वर्ष पढ़ाई की, वह तीन वर्ष ग़रीब भी हुआ, तीन वर्ष अधिक आश्रित हुआ और तीन वर्ष अधिक अपमानित हुआ. वह राज्य से अपने चुराए हुए वर्षों का हिसाब मांग रहा है. वे सरकार से सवाल पूछ रहा है कि हमारे जीवन के जो वर्ष तुमने अपनी अक्षमता, भ्रष्टाचार और उदासीनता में नष्ट किए, उन्हें कौन लौटाएगा?

छात्र आंदोलन: प्रधानमंत्री ने वही वादा दोहराया, जो वे बीते तीन सालों में चार बार कर चुके हैं

जंतर-मंतर पर बीते एक महीने से जारी युवाओं के प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुरुवार को इस मामले पर बयान दिया. हालांकि इसमें युवाओं के विरोध प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग या छात्रों पर पुलिस की बर्बरता का कोई ज़िक्र नहीं किया गया. इसके साथ ही सख़्त कार्रवाई का उनका वादा भी कोई नई बात नहीं है.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: कैसे हुआ गड़बड़ियों का ख़ुलासा, कैसे सवालों के घेरे में आए शीर्ष प्रबंधन से जुड़े लोग

राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों को बिना किसी पारदर्शिता के चुन लिया गया और लोकसभा में इसकी घोषणा फरवरी 2020 में की गई. ऐसे में किसी भी गड़बड़ी के लिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व किसी और को दोषी कैसे ठहरा सकता है?

संसद मार्च में घायल व्यक्ति को पैलेट गन जैसे हथियार से चोट लगने का दावा, दिल्ली पुलिस का इनकार

सोमवार को 'संसद मार्च' के दौरान घायल 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी की लेडी हार्डिंग अस्पताल में सर्जरी हुई है. उनके दोस्त ने दावा किया कि उन्हें आरएएफ के जवान द्वारा चलाए गए पैलेट गन जैसे हथियार से चोट लगी. दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों को भ्रामक बताते हुए ख़ारिज किया है.

क्या अहिंसा और सत्याग्रह वाले आंदोलन मोदी सरकार के सामने टिक सकते हैं?

नरेंद्र मोदी सरकार का अब तक का रिकॉर्ड गवाह है कि वह किसी भी असहमति या आंदोलन से संवाद में तब तक यक़ीन नहीं करती, जब तक पानी सिर से ऊपर न जाने लगे. तब तक अड़ियल व अहंकारी रवैया अपनाए रखकर वह स्थितियों को और जटिल बनाती रहती है. सोमवार को भाजपा के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं से जो बातचीत हुई है, उसे इसी रूप में देखा जा सकता है.

‘यह जनसैलाब और छात्रों का आक्रोश सरकार की उदासीनता की देन है’

ग्राउंड रिपोर्ट: दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स और सीआरपीएफ की भारी तैनाती के बीच संसद मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए हैं. एक छात्रा का कहना था कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था की हाल की नाकामियों का ज़िम्मा लेना होगा. शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा भले कुछ बड़ा बदलाव न करे, लेकिन जवाबदेही तो तय होगी. हम युवा यही चाहते हैं.

चोरी का भूगोल: चोरी करने में अब किसी को शर्म नहीं आती

कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: हबीब तनवीर के प्रसिद्ध नाटक ‘चरणदास चोर’ में एक उक्ति है ‘एक चोर ने रंग जमाया सच बोलके.’ हमारे समय में बहुत सारे बड़े चोर रंग जमा रहे हैं, झूठ बोलकर. वह समय जा चुका जिसमें चरणदास जैसा अकिंचन चोर सच बोलकर रंग जमा सकता था. अब तो असली रंग झूठ से ही आता है.

सोनम वांगचुक को हटाकर शिक्षा व्यवस्था में बदइंतज़ामी के सवाल से छुटकारा नहीं पा सकती भाजपा

सरकार ने अपने इस एक कदम से ख़ुद को उन लोगों की निगाह में हमेशा के लिए गिरा लिया है जो अब तक उसे समय देने को तैयार थे. उनके सामने यह सवाल तो रहेगा ही कि सोनम वांगचुक कोई सरकार का इस्तीफ़ा तो नहीं मांग रहे थे. वे एक निकम्मे शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने की बात कर रहे थे. उस पर विचार करना तो दूर, उसकी मांग करने वाले वांगचुक के साथ ही ज़ुल्म किया गया.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: आरएसएस-विहिप की खींचतान में बंटी अयोध्या

अयोध्या और दिल्ली में साधु-संतों व अन्य लोगों के साथ हुई विस्तृत बातचीत से पता चलता है कि चंपत राय को अपनी शक्ति और प्रभाव का आधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी निकटता से मिलता था. यही वजह है कि अब शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग तेज़ होती जा रही है.

फिल्म पर प्रतिबंध के बाद पहली बार बोले हनी त्रेहन- ‘सतलुज’ को बहने से नहीं रोका जा सकता

साक्षात्कार: 'सतलुज' फिल्म को ओटीटी से हटाए जाने के बाद पहली बार बात करते हुए फिल्मकार हनी त्रेहन ने कहा कि 'सतलुज' पर रोक लग सकती है पर जसवंत सिंह खालरा को ख़त्म नहीं किया जा सकता. त्रेहन जोड़ते हैं कि 'सतलुज' पंजाब के ज़ख्मों पर मलहम की तरह है, लेकिन इसे बैन किया गया क्योंकि यह फूट डालो और राज करो की राजनीति को बढ़ावा नहीं देती.

अयोध्या: चढ़ावा चोरी से आगे सवाल और भी हैं…

राम मंदिर में जिस तरह का भ्रष्टाचार हुआ है, उसको कोई भी नाम क्यों न दिया जाए, वह अपराध की श्रेणी में ही आएगा,और चूंकि भ्रष्टाचार समेत सारे अपराध, वे किसी भी स्थान या किसी भी प्रकृति वाले संस्थान में क्यों न किए गए हों, राज्य के विरुद्ध किए गए माने जाते हैं, इसलिए ऐसा नहीं हो सकते कि उनके विरुद्ध सिर्फ वहीं आवाज़ उठाए, जिसने कभी कोई अपराध न किया हो.

तीजन बाई: स्त्री की अदम्यता का लोक-रूपक

कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: तीजन बाई की कला उस सर्जनात्मकता का साक्ष्य थी कि एक सजग स्त्री महाकाव्य के परिसर में और लोकव्यवहार के आयाम में कितना कुछ अप्रत्याशित तात्कालिकता और सुघर संयम से कर सकती थी. वे शास्त्र और लोक की लगभग रूढ़ हो गई दूरी और द्वैत को रौंद देती थीं.

बंगनामा: …जहां पान अब भी बरज में ही उपजता है

पश्चिम बंगाल में पान चबाना आम, स्वीकृत शग़ल है. पूर्व मेदिनीपुर ज़िला पश्चिम बंगाल में पान उत्पादन का सबसे बड़ा क्षेत्र है. यहां बांग्ला, मीठा, सांची, काली बांग्ला तथा सिमुराली बांग्ला जैसी अनेक लोकप्रिय किस्मों की खेती की जाती है. चार दशकों में पान की खेती में व्यापक परिवर्तन हुआ है मगर तामलुक के किसानों ने पान के बरज की मूल संरचना को नहीं त्यागा है.