अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर भारतीय सामानों पर लगाए गए 25% टैरिफ को घटाकर 18% करने का ऐलान इस शर्त पर किया है कि भारत रूस से कच्चे तेल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात बंद करेगा और अमेरिका से ऊर्जा उत्पादों की खरीद बढ़ाएगा. ट्रंप का यह आदेश भारत के लिए कई रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिम पैदा करता है.
वीडियो
→नेपाल की अधूरी क्रांति?
→सभी ख़बरें
एसआईआर पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से सवाल किया कि उनके एसआईआर आदेश में यह स्पष्ट रूप से नहीं लिखा था कि यह पूरी कवायद अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए भी थी. जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि आयोग ने एसआईआर के लिए कारण के रूप में केवल 'बार-बार प्रवास' को सूचीबद्ध किया है, न कि अवैध सीमा पार आवागमन को.
प्रतिबंधित अवामी लीग के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक दुर्लभ सार्वजनिक उपस्थिति में भारत में निर्वासन में रह रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को ‘हत्यारी फासीवादी’ क़रार देते हुए पिछले साल की घटनाओं की संयुक्त राष्ट्र से जांच कराने की मांग की है.
ग्रेट निकोबार ट्राइबल काउंसिल ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने 'ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट' के लिए उनसे पैतृक ज़मीन छोड़ने को कहा है. आदिवासियों का कहना है कि बिना उनकी सहमति ‘सरेंडर सर्टिफिकेट’ पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि वे वर्षों से अपने मूल गांवों में लौटने की मांग कर रहे हैं.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एल्गार परिषद केस में गिरफ़्तार किए गए सांस्कृतिक कलाकार तथा कार्यकर्ता सागर गोरखे और रमेश गायचोर को ज़मानत दे दी. दोनों 2020 से मुंबई के तलोजा जेल में बंद हैं. इस रिहाई के आदेश के बाद अब गिरफ़्तार किए गए 16 लोगों में से केवल मानवाधिकार कार्यकर्ता सुरेंद्र गाडलिंग ही जेल में हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रयागराज के एक एक्टिविस्ट के परिवार के घर को गिरा दिया, जिन्होंने बिना किसी जुर्म के 21 महीने जेल में बिताए. जब वे पुलिस हिरासत में अस्पताल में थे, तब बुलडोज़र से उनका वो घर तोड़ा गया, जो असल में उनकी पत्नी के नाम पर था.
जब विश्वविद्यालयों को राजनीति से मुक्त करने की मांग तेज़ है, तब सुभाष चंद्र बोस की विरासत एक असहज सवाल खड़ा करती है. बोस छात्रों को बदलाव का अग्रदूत मानते थे. यह लेख बताता है कि छात्र राजनीति का उनका पक्ष आज भी क्यों प्रासंगिक और ज़रूरी है.
संपर्क करें

