उत्तराखंड के कोटद्वार में मुस्लिम बुज़ुर्ग के समर्थन में हिंदुत्ववादी भीड़ के सामने खड़े होने वाले ‘मोहम्मद’ दीपक के जिम में उक्त घटना के बाद 135 सदस्यों ने आना छोड़ दिया. दीपक का कहना है कि, ‘शहर का आधा हिस्सा मेरे साथ है, लेकिन अच्छे कामों पर लोग ताली नहीं बजाते. ईमानदारी की क़ीमत चुकानी पड़ती है.’
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हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में कश्मीरी शॉल विक्रेताओं पर हमलों के बाद एफआईआर दर्ज की गई हैं. जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने उत्तर भारत में कश्मीरी व्यापारियों के खिलाफ बढ़ते उत्पीड़न और हिंसा पर चिंता जताते हुए इसे आतंक का माहौल बताया है.
महाराष्ट्र के नागपुर में सीएसआई चर्च के एक मलयाली पादरी, उनके परिवार और अन्य लोगों को ज़बरन धार्मांतरण के आरोप में 29 दिसंबर की रात प्रार्थना सभा के दौरान गिरफ्तार किया गया. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि यह संघ परिवार द्वारा अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर ध्रुवीकरण बढ़ाने के चिंताजनक पैटर्न का हिस्सा है.
चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत सुनवाई नोटिस मिलने के बाद मतदाताओं की मौतों के संदर्भ में सीईसी ज्ञानेश कुमार और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल के ख़िलाफ़ दर्ज पुलिस शिकायतों को आयोग के अधिकारियों को डराने-धमकाने की कोशिश बताया और कहा कि सीईसी के ख़िलाफ़ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती, क़ानून इस पर स्पष्ट है.
बीते दिनों उन्नाव बलात्कार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सर्वाइवर को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर के ज़मानत के आदेश पर रोक लगा दी है. उधर, पीड़ित महिला का कहना है कि अगर कोर्ट की कार्यवाही हिंदी में हो, तो वे अपना केस खुद लड़कर दुनिया के सामने सारी सच्चाई स्पष्टता के साथ रख देंगी.
मध्य प्रदेश के इंदौर में नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए दूषित पानी के सेवन से 2,000 से अधिक लोग बीमार पड़ गए हैं और कम से कम दस लोगों की जान गई है. नगर निगम कमिश्नर का कहना है कि मुख्य सप्लाई लाइन के ऊपर बने शौचालय के ड्रेनेज से बड़ा रिसाव हुआ था, जिसे अब ठीक कर दिया गया है. घटना को लेकर एक अधिकारी को नौकरी से बर्ख़ास्त और दो अन्य को निलंबित कर दिया गया है.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली मामले में उसके 20 नवंबर के फैसले पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब पर्यावरण से जुड़े अन्य अत्यंत महत्वपूर्ण और तात्कालिक मुद्दे हैं, जिन पर शीर्ष अदालत को अरावली मामले की तरह ही स्वतः संज्ञान लेकर हस्तक्षेप करना चाहिए.
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