द वायर का इंस्टाग्राम अकाउंट मोदी सरकार पर व्यंग्यात्मक कार्टून को लेकर भारत में सोमवार शाम क़रीब दो घंटे तक ब्लॉक रहा. मंत्रालय ने ज़िम्मेदारी इनकार किया, जबकि मेटा द्वारा ‘ग़लती’ की बात सामने आई. बिना पूर्व सूचना की गई इस कार्रवाई ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल सेंसरशिप पर सवाल खड़े किए हैं.
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राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने मध्य प्रदेश के बाघ आवास क्षेत्रों में तीन परियोजनाओं के कोर क्षेत्र में भूमिगत जल पाइपलाइन तथा बरना बांध से संबंधित ढांचागत निर्माण कार्यों को मंज़ूरी दी है. साथ ही, उत्तराखंड के राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के कोर क्षेत्र में रोपवे परियोजना को भी स्वीकृति दी गई है. मध्य प्रदेश के फेन वन्यजीव अभयारण्य के ईको-सेंसिटिव ज़ोन में दो बाक्साइट खनन परियोजनाओं को भी मंज़ूरी की सिफ़ारिश की है.
नेल्ली के पीड़ितों का दर्द हमें याद दिलाता है कि जो लोग बड़े पैमाने पर हिंसा झेल चुके हैं, उनमें से कई लोग अब भी इंसाफ़ का इंतज़ार कर रहे हैं. लेकिन सरकार ने आज तक किसी को भी इस हद तक बेसहारा नहीं छोड़ा है, जैसा इन लोगों के साथ हुआ है.
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्थापना दिवस के प्रचार पर क़रीब 6 करोड़ 90 लाख रुपये ख़र्च किए, जबकि राज्य के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों का वार्षिक फंड लगभग 64 प्रतिशत घटा दिया गया है. स्कूलों के सामने बिजली बिल चुकाने समेत बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक क़रार दिए जाने के बाद इलेक्टोरल ट्रस्ट के ज़रिये राजनीतिक दलों को मिलने वाला कॉरपोरेट चंदा साल 2024-25 में तीन गुना बढ़कर 3,811 करोड़ रुपये पहुंच गया है. नौ इलेक्टोरल ट्रस्टों ने मिलकर कुल 3,811.37 करोड़ रुपये का चंदा दिया है, जिसमें से केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को 3,112.50 करोड़ रुपये मिले, जो कुल राशि का करीब 82% है.
केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने राज्य के कुछ निजी स्कूलों द्वारा कैंपस में क्रिसमस समारोह रोकने की ख़बरों पर चिंता जताई और चेतावनी दी कि राज्य सरकार ‘उत्तर भारत की तरह धर्म और आस्था पर आधारित बंटवारे वाले मॉडल’ को बर्दाश्त नहीं करेगी.
ग्रेट निकोबार मेगा परियोजना से आदिवासी भूमि, वन अधिकार और विशेष रूप से कमज़ोर शॉम्पेन जनजाति पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर आदिवासी परिषद ने एक बार फिर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है. परिषद का कहना है कि उनकी पुरानी आपत्तियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.
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