इज़रायल और अमेरिका ने ईरान हमला कर दिया है. तेहरान के कई इलाकों में विस्फोट हुए हैं और संचार सेवाएं बाधित हो रही हैं. ईरान ने कड़े जवाब की चेतावनी दी है, जबकि इज़रायल में आपातकाल घोषित कर हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया है.
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सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की उस विवादित पाठ्यपुस्तक- जिसमें 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' से जुड़ा अध्याय शामिल था - को हटाने का निर्देश देते हुए एनसीईआरटी के निदेशक और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया. साथ ही पूछा कि उनके ख़िलाफ़ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए.
शहरी भारत में स्वच्छता सेवाओं के निजीकरण के साथ सफाई कर्मचारी जातिवाद, मज़दूरी में कटौती, और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार न मिलने से भी जूझ रहे हैं. स्वच्छता कर्मियों को पूरी तरह ठेके पर भर्ती करने का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है. स्थायी नियुक्तियां घट रही हैं और वाल्मीकि समुदाय के कामगारों को अधिकतर अस्थायी भूमिकाओं तक ही सीमित किया जा रहा है.
पंचकुला में एक भूखंड के कथित अवैध पुनर्आवंटन के मामले में भूपिंदर हुड्डा और नेशनल हेराल्ड के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के ख़िलाफ़ आपराधिक आरोपों को रद्द करते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से उनके ख़िलाफ़ प्रथमदृष्टया केस भी नहीं बनता है और उनके ख़िलाफ़ आगे बढ़ने का कोई आधार नहीं है.
भाजपा ने सुनील देवधर ने 16 फरवरी को एक कार्यक्रम में कहा था कि कुछ चर्च अपने स्कूल में छात्रों के प्रवेश के लिए शर्तें लगाई हैं - जिसमें चर्च में अनिवार्य रूप से आना, ईसाई धर्म अपनाना और बाइबिल का परीक्षा पास करना शामिल है. साथ ही यह भी आरोप लगाया कि सरकार चर्च का साथ देती है और स्वदेशी धर्म (नियाम तिनराई) को मानने वालों को तब तक अस्पताल, सड़क, स्कूल और बिजली नहीं देती जब तक वे
विश्व सभ्यता में आज शक्तिशाली-बाहुबली अत्याचारियों और शासकों, तानाशाहों, नृशंस अमीरों, प्रबल टैक्नोक्रेट का वर्चस्व है. पर इसी समय में कविता आज भी बहुत सारे जलावतन हुए लोगों और कवियों की मातृभूमि है- बेघरबार हुओं का आख़िरी घर है. रज़ा फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया जा रहा अंतरराष्ट्रीय कविता समारोह ‘संसार’ इन्हीं कविताओं को बचाए रखने का प्रयास है.
23 फरवरी को एनसीईआरटी द्वारा जारी कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका के सामने 'भ्रष्टाचार' और 'बड़ी संख्या में लंबित मामलों' को प्रमुख चुनौतियों के रूप में उल्लेख किया गया है. इसे लेकर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि न्यायपालिका की छवि को बदनाम या कमतर करने की किसी को अनुमति नहीं दी जाएगी और इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी.
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