द वायर का इंस्टाग्राम अकाउंट मोदी सरकार पर व्यंग्यात्मक कार्टून को लेकर भारत में सोमवार शाम क़रीब दो घंटे तक ब्लॉक रहा. मंत्रालय ने ज़िम्मेदारी इनकार किया, जबकि मेटा द्वारा ‘ग़लती’ की बात सामने आई. बिना पूर्व सूचना की गई इस कार्रवाई ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल सेंसरशिप पर सवाल खड़े किए हैं.
वीडियो
→नेपाल की अधूरी क्रांति?
→सभी ख़बरें
नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज़ इन इंडिया ने सरकार से अपील की कि ईसाइयों, उनके पूजा स्थलों और पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों पर हमला करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए. वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि क्रिसमस के समय ऐसी घटनाओं पर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह की चुप्पी बेहद चिंताजनक है.
'फ्री स्पीच कलेक्टिव' की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़े 40 हमलों में से 33 में पत्रकारों को निशाना बनाया गया. उत्पीड़न के 19 मामलों में से 14 पत्रकारों से जुड़े थे. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सर्वाधिक उल्लंघन गुजरात में दर्ज हुए, इसके बाद उत्तर प्रदेश और केरल रहे.
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस जनहित याचिका में हस्तक्षेप का विरोध किया, जिसमें एयर प्यूरीफायर को मेडिकल उपकरण की श्रेणी में रखकर उन पर लगने वाले जीएसटी को 18% से घटाकर 5% करने की मांग की गई है. केंद्र ने कहा कि अदालत द्वारा दिया गया कोई भी निर्देश विधायी क्षेत्र में दखल होगा और संविधान में निहित शक्तियों के पृथक्करण के मूल ढांचे का उल्लंघन करेगा.
मध्य प्रदेश के शिवपुरी की एक महिला ने नींद की गोलियां और कीटनाशक खाने के बाद गंभीर हालत में है. उन्होंने अप्रैल में स्थानीय भाजपा नेता और शिवपुरी नगर परिषद अध्यक्ष के बेटे के ख़िलाफ़ रेप का आरोप लगाया था. कथित तौर पर ज़हर खाने से पहले लिखे एक नोट में उन्होंने पिछले सात महीनों से मानसिक उत्पीड़न और धमकियां मिलने का ज़िक्र किया है.
उत्तराखंड के काशीपुर में 22 दिसंबर को एक कश्मीरी शॉल विक्रेता पर हिंदू दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने हमला किया था. मामले में बजरंग दल कार्यकर्ता और उसके साथियों को गिरफ़्तार किया गया है. इस घटना ने जम्मू-कश्मीर में व्यापक आक्रोश पैदा किया है. यह पिछले एक पखवाड़े में कश्मीरी शॉल विक्रेता को हिंदू दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं द्वारा निशाना बनाकर परेशान करने की दूसरी घटना है.
पीएमओ के 'क्राइसिस मैनेजर' कहे जाने वाले नरेंद्र मोदी के क़रीबी हिरेन जोशी को लेकर अटकलों का बाज़ार गरम है, कहीं उन्हें पद से हटाने की चर्चा है तो कहीं 'सट्टेबाज़ी घोटाले' में उनका नाम लिया जा रहा है. लेकिन वे हैं कौन और देश के सबसे महत्वपूर्ण कार्यालय की धुरी कैसे बने?
संपर्क करें

