Jammu Kashmir Administration

कश्मीर: सुरक्षा बलों ने महबूबा मुफ़्ती से छिपाया कि उनका नया घर ‘असुरक्षित’ है

पीडीपी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती 2005 से जिस घर में रह रही थीं, वह उनसे ख़ाली करा लिया गया था, जिसके बाद वे बीते 28 नवंबर को श्रीनगर से कुछ दूरी पर बने अपनी बहन के घर शिफ्ट हो गईं. इससे पहले पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने दो बार इस घर की सुरक्षा समीक्षा की, लेकिन इन रिपोर्ट में आए निष्कर्षों से मुफ़्ती को अवगत नहीं कराया गया.

जम्मू कश्मीर: सैन्य शिविर के पास दो नागरिक मृत पाए गए, लोगों ने सेना पर हत्या का आरोप लगाया

जम्मू कश्मीर के राजौरी स्थित एक सैन्य शिविर के पास की घटना. शिविर के गेट के पास शुक्रवार सुबह गोलियों से छलनी दो नागरिकों के शव मिले थे. स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन पर सेना के एक जवान ने गोलियां चलाई हैं, जबकि सेना ने आरोपों को ख़ारिज करते हुए इसे आतंकवादी कृत्य बताया है. पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.

जम्मू: कश्मीर में काम करने से भयभीत आरक्षित श्रेणी के कर्मचारियों का प्रदर्शन छह महीने से जारी

जम्मू कश्मीर की 2006 की अंतर जिला भर्ती नीति के तहत जम्मू संभाग में अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को कश्मीर में इसी श्रेणी के लिए आरक्षित पदों के लिए आवेदन की अनुमति दी थी. बीते कुछ समय में आरक्षित श्रेणी के कर्मचारियों पर हुए टारगेटेड हमलों के बाद जून में जम्मू लौटे ये कर्मचारी तबसे घाटी से अपने तबादले की मांग कर रहे हैं.

जम्मू कश्मीर: निजी डेटाबेस क़ानून लाने को विपक्ष ने ‘निगरानी की रणनीति’ बताया

आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार, केंद्रशासित प्रदेश के प्रत्येक परिवार को सरकारी सेवाओं के वितरण में सुधार के लिए ‘जम्मू कश्मीर परिवार पहचान पत्र’ नामक एक यूनिक अल्फान्यूमेरिक कोड प्रदान किया जाएगा. यह हरियाणा के ‘परिवार पहचान अधिनियम 2021’ की तर्ज पर लागू होगा.

जम्मू कश्मीर: पांच सरकारी कर्मचारियों को ‘सुरक्षा के लिए ख़तरा’ बताकर नौकरी से बर्ख़ास्त किया

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बारामूला सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के एक प्रबंधक, ग्रामीण विकास विभाग में ग्रामीण स्तर के कार्यकर्ता सैयद इफ़्तिख़ार अंद्राबी, पुलिस की सहायक शाखा के एक आरक्षक तनवीर सलीम डार, जल शक्ति विभाग के एक अर्दली इरशाद अहमद ख़ान और बिजली विकास विभाग में सहायक लाइनमैन एबी मोमिन पीर को बर्ख़ास्त करने के आदेश जारी किए हैं.

जम्मू कश्मीर प्रशासन द्वारा शहरी डिपार्टमेंटल स्टोर में बीयर बिक्री को मंज़ूरी देने पर विवाद

शहरी क्षेत्रों में बीयर और रेडी-टू-ड्रिंक पेय बेचने के लिए विभिन्न डिपार्टमेंटल स्टोर को अधिकृत करने के जम्मू कश्मीर प्रशासन के फैसले का ज़िक्र करते हुए पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि यह मुसलमानों की भावनाएं आहत करने के लिए किया गया है. भाजपा और कांग्रेस ने भी इस क़दम की आलोचना की है.

गृह मंत्री कश्मीर में हालात सामान्य होने का ढोल पीटते घूम रहे हैं, मैं नजरबंद हूं: महबूबा मुफ़्ती

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि एक शादी में पट्टन जाना चाहती थीं, इसलिए उन्हें नज़रबंद किया गया. उन्होंने जोड़ा कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री के मौलिक अधिकारों को इतनी आसानी से निलंबित किया जा सकता है, तो आम लोगों की पीड़ा के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता. पुलिस के उनके दावे का खंडन पर उन्होंने कहा कि पुलिस झूठ बोल रही है.

भाजपा राजनीतिक उद्देश्य के लिए कश्मीरी पंडितों की पीड़ा को इस्तेमाल कर रही है: महबूबा मुफ़्ती

कश्मीरी प्रवासी कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश आज ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहां पर लोगों के पास न तो कोई अधिकार है और न ही उनकी शिकायतों को उठाने के लिए कोई मंच.

हैदरपोरा मुठभेड़ में मारे गए तीसरे नागरिक का शव क़ब्र से निकालने की याचिका कोर्ट ने ख़ारिज की

नवंबर 2021 में श्रीनगर के हैदरपोरा में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए चार लोगों में से एक आमिर लतीफ़ माग्रे भी थे. मुठभेड़ की प्रमाणिकता को लेकर जनाक्रोश के कुछ दिन बाद जम्मू कश्मीर प्रशासन ने दो मृतकों के शव उनके परिजनों को सौंपे थे, जिसके बाद माग्रे के परिवार ने भी उनका शव सौंपे जाने की मांग की थी.

जम्मू कश्मीर: ‘ऋग्वेद में मांसाहार खाने की बात लिखी है’ कहने पर सरकारी अधिकारी निलंबित

राजौरी ज़िले में सहायक आयुक्त स्तर के एक अधिकारी ने सहकर्मियों के साथ खाना खाते हुए पूछा था कि जब ऋग्वेद में मांसाहार की अनुमति दी गई है तो वो इससे असहमत क्यों हैं. इसे लेकर एक सहकर्मी ने उनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाई. ज़िला प्रशासन का कहना है कि इस बयान से क़ानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती थी.

New Delhi: Telecom Minister Manoj Sinha addresses a press conference regarding the achievements of his ministry in the four years of NDA government, in New Delhi on Tuesday, June 12, 2018. (PTI Photo/Shahbaz Khan) (PTI6_12_2018_000053B)

जम्मू कश्मीर सरकार ने हिज़्बुल प्रमुख के बेटे सहित चार कर्मचारियों को बर्ख़ास्त किया

बर्ख़ास्त कर्मचारियों में जम्मू कश्मीर प्रशासनिक सेवा की अधिकारी असबाह-उल-अर्ज़मंद ख़ान भी शामिल हैं, जो टेरर फंडिंग मामले में जेल में बंद फ़ारूक़ अहमद डार की पत्नी हैं. चारों कर्मचारियों को संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (सी) के तहत बर्ख़ास्त किया गया है, जिसमें सरकार को बिना किसी जांच के अपने कर्मचारी को निष्कासित करने की शक्ति प्राप्त है.

हैदरपोरा एनकांउटर में मृत तीसरे नागरिक के शव निकालने की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने बीते 27 मई को अधिकारियों से मोहम्मद लतीफ़ माग्रे की मौजूदगी में हैदरपोरा एनकाउंटर में मृत उनके बेटे आमिर के अवशेषों को निकालने का आदेश दिया था. हालांकि छह जून को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस पर रोक लगा दी थी. आमिर उन चार लोगों में से एक थे, जो नवंबर 2021 को श्रीनगर के हैदरपोरा में एनकाउंटर में मारे गए थे. इनमें से दो लोगों के शव विरोध के बाद उनके परिजनों को उसी समय सौंप दिए गए थे.

कश्मीरी पंडित कर्मचारियों का घाटी से स्थानांतरित किए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी

कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने घाटी से स्थानांतरित किए जाने की मांग को लेकर बुधवार को जम्मू में राहत और पुनर्वास आयुक्त के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. कर्मचारियों ने कहा कि हमारे ख़ून, बच्चों को अनाथ होने और पत्नियों को विधवा करने की कीमत पर हमारा पुनर्वास न करें. एकमात्र समाधान घाटी के बाहर कहीं भी स्थानांतरित करना है.

सरकार ने मांग न मानी तो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील करेंगे: कश्मीरी पंडित

कश्मीर घाटी में आतंकवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों समेत अल्पसंख्यक समुदाय के ग़ैर-मुस्लिमों को निशाना बनाकर की जा रहीं हत्याओं के विरोध में लगातार प्रदर्शन किया जा रहा है. प्रधानमंत्री पैकेज के तहत भर्ती किए गए कर्मचारी घाटी से कहीं और बसाए जाने की मांग कर रहे हैं.

कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने घाटी से बाहर स्थानांतरित करने की मांग दोहराई

ऑल माइग्रेंट्स एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन कश्मीर के बैनर तले सैकड़ों महिला एवं पुरुष कर्मचारी जम्मू स्थित प्रेस क्लब के बाहर जमा हुए. उन्होंने तख्तियां पकड़ी हुई थीं जिन पर लिखा था, ‘हमारे ख़ून की कीमत पर हमारा पुनर्वास न करें. हमारे बच्चे अनाथ हो रहे हैं. हमारी पत्नियां विधवा हो रही हैं. और सिर्फ एक ही समाधन है, घाटी के बाहर कहीं भी स्थानांतरण.’