एक आरटीआई के जवाब से पता चला है कि ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के पास बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है. उच्चायोग ने जो आंकड़े दिए हैं, वे एक ग़ैर-सरकारी संगठन से लिए गए हैं, जिससे भारत सरकार की निगरानी और दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं.
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ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन का अनुमान है कि 2010 में 1.54 अरब (23 प्रतिशत) लोगों की तुलना में सदी के मध्य तक लगभग 3.8 अरब लोग, जो दुनिया की आबादी का लगभग 41 प्रतिशत है, ख़तरनाक गर्मी की स्थिति का सामना करेंगे. इस स्थिति में भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल होगा.
राजस्थान के राज्यपाल ने क़ानूनी और संवैधानिक चिंताओं का हवाला देते हुए पूर्व सरकारों द्वारा पारित 10 विधेयकों को पुनर्विचार के लिए राज्य विधानसभा को लौटा दिया है. इनमें से नौ विधेयक पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के दौरान पारित हुए थे. लौटाए गए विधेयकों में मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग से जुड़े विधेयक शामिल हैं.
लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी है कि वे सरकार की आलोचना कर सकते हैं और सरकार की कार्रवाई या निष्क्रियता के ख़िलाफ़ विरोध को न तो राष्ट्र विरोधी कहा जा सकता है और न ही राज्य विरोधी. उन्होंने जोड़ा कि वे शांतिपूर्ण मार्चों और प्रदर्शनों के माध्यम से अपनी असहमति व्यक्त कर सकते हैं.
जनगणना 2027 के दौरान पहली बार सरकारी अधिकारियों की मदद के लिए निजी तकनीकी कर्मियों को नियुक्त किया जाएगा. इसके साथ ही, आबादी से जुड़ा डेटा इकट्ठा करने और उसे संभालने के लिए मोबाइल ऐप का भी इस्तेमाल किया जाएगा. निजी तकनीकी कर्मियों की भर्ती केवल आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए की जाएगी और सभी भुगतान इन्हीं एजेंसियों के माध्यम से होंगे.
पीएम मोदी की घाना यात्रा: पहले सरकारी ख़र्च से इनकार के बाद मंत्रालय ने स्वीकारा- 4.69 करोड़ ख़र्चे गए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुलाई 2025 में की गई घाना यात्रा पर हुए ख़र्च को लेकर विदेश मंत्रालय ने 63 दिनों में अपना रुख़ बदल दिया. पहले ‘राजकीय अतिथि’ का हवाला देकर कोई पैसा ख़र्च होने से इनकार किया गया था, मगर फिर एक आरटीआई अपील के बाद मंत्रालय ने स्वीकार किया कि इस यात्रा पर 4.69 करोड़ रुपये ख़र्च हुआ था.
बीते कुछ समय में उत्तराखंड कश्मीरी शॉल विक्रेताओं पर हमलों का विशेष केंद्र बनकर उभरा है और हिमाचल प्रदेश में भी इसी तरह के हमले दर्ज किए गए हैं. ताज़ा मामला कुपवाड़ा ज़िले के निवासी दानिश गनई और उनके भाई तबिश राशिद पर हुए हमला का है, जिसमें राशिद को सिर पर गंभीर चोटें आई हैं.
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