उत्तर प्रदेश में जारी एसआईआर अभियान की तारीखों को एक बार फिर एक महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. अब 6 मार्च तक आपत्तियां और दावे दर्ज किए जा सकेंगे और अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को प्रकाशित की जाएगी. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा का कहना है कि अभी तक बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा मतदाता सूची से बाहर हैं.
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सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू कामगारों के न्यूनतम वेतन पर राज्यों से विचार का आग्रह किया, लेकिन निर्देश देने से इनकार कर दिया. सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की ट्रेड यूनियनों और न्यूनतम मजदूरी पर टिप्पणियों ने अर्थशास्त्रियों, श्रमिक संगठनों और नागरिक अधिकार समूहों में तीखी असहमति और बहस को जन्म दिया है.
‘बुलडोज़र जस्टिस’ पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ध्वस्तीकरण को सज़ा के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि सज़ा देने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है, न कि कार्यपालिका के पास. अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से सवाल किया है कि क्या किसी अपराध के घटित होने के तुरंत बाद किसी इमारत को गिराना, कार्यपालिका के विवेकाधिकार का ‘छलपूर्ण प्रयोग’ नहीं है.
मुंबई पुलिस की अनुमति न मिलने का हवाला देते हुए मुंबई के काला घोड़ा आर्ट्स फ़ेस्टिवल ने आनंद तेलतुम्बड़े की पुस्तक पर होने वाली चर्चा रद्द कर दी है. आयोजकों के इस फैसले पर लेखकों और वक्ताओं ने नाराज़गी जताई है. तेलतुम्बड़े ने इसे बेतुका हस्तक्षेप कहा है.
पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की सेंसर की गई किताब में एक फोन कॉल के ज़िक्र को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. किताब के अनुसार, इस कॉल में भारत-चीन सीमा पर अत्यधिक तनाव के दौर में सेना को दिए गए राजनीतिक निर्देश महज़ ‘जो उचित समझो, वो करो’ थे. हालांकि इसके अलावा भी किताब ऐसे कई सवाल उठाती है, जिनके जवाब दिए जाना ज़रूरी है.
सोमवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लोकसभा में पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब का हवाला देने से रोक दिया गया था. 4 फरवरी को उन्होंने सदन के बाहर किताब की प्रति दिखाते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री सदन में आएंगे तो वे यह किताब उन्हें सौंप देंगे.
केंद्र सरकार ने संसद में देश भर में कचरा बीनने वालों की गणना से जुड़े आंकड़े जारी किए. इनके अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर कुल कचरा बीनने वालों में 84.5% अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग समुदायों से हैं, जबकि 10.7% सामान्य श्रेणी के समुदायों से हैं.
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