उत्तर प्रदेश में जारी एसआईआर अभियान की तारीखों को एक बार फिर एक महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. अब 6 मार्च तक आपत्तियां और दावे दर्ज किए जा सकेंगे और अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को प्रकाशित की जाएगी. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा का कहना है कि अभी तक बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा मतदाता सूची से बाहर हैं.
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पर्यटक वीज़ा पर भारत आए दो ब्रिटिश नागरिकों को राजस्थान के अजमेर में सार्वजनिक स्थानों पर इज़रायल के खिलाफ़ फ़िलिस्तीन के समर्थन वाले स्टिकर चिपकाने के बाद भारत छोड़ने को कहा गया है. पुलिस के मुताबिक, दोनों ने पर्यटक वीज़ा पर रहते हुए राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लिया, जो की वीज़ा शर्तों का उल्लंघन है.
मणिपुर में विधायक दल के नेता चुने गए वरिष्ठ भाजपा नेता युमनाम खेमचंद, जो बीरेन सिंह की कैबिनेट में विधानसभा अध्यक्ष और मंत्री रह चुके हैं, मेईतेई समुदाय से आते हैं, जबकि संभावित उपमुख्यमंत्री मानी जा रही नेमचा किपगेन कुकी समुदाय से हैं.
नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा कि ‘अभूतपूर्व’ स्थिति में उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोका गया. उन्होंने कहा कि यह ‘संसद के इतिहास में पहली बार’ हुआ है और यह ‘लोकतंत्र पर एक धब्बा’ है. गांधी ने पत्र में आरोप लगाया कि सरकार के कहने पर अध्यक्ष को उन्हें बोलने से रोका.
1784 में भीषण अकाल के वक़्त अवध सूबे के नवाब आसफुद्दौला की हुकूमत ने लोगों को रोज़गार उपलब्ध कराने के लिए जो क़दम उठाए, उनके तहत मनरेगा की ही तर्ज पर उनसे काम लेकर मेहनताना कहें या मजदूरी दी जाती थी. इसने उस दुस्सह अकाल के दौरान जहां बड़ी संख्या में लोगों को भूखे मरने से बचाया, वहीं उनके आत्मसम्मान सम्मान की भी रक्षा की.
गणतंत्र दिवस पर उत्तर प्रदेश के बागपत के बड़ौत नगर पालिका परिसर में भाजपा नेता और राज्यमंत्री केपी मलिक ने एक ‘संविधान पार्क’ का उद्घाटन किया था. हालांकि वहां लगी संविधान की प्रस्तावना की प्रतिकृति से समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द गायब हैं. प्रशासन इसे मूल प्रस्तावना बता रहा है, लेकिन विशेषज्ञ और स्थानीय लोग इसे संविधान की भावना के ख़िलाफ़ मानते हुए बदलाव की मांग कर रहे हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो ईसाई निकायों- ‘मारानाथा फुल गोस्पेल मिनिस्ट्रीज’ और ‘एमैनुअल ग्रेस चैरिटेबल ट्रस्ट’ की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया कि उत्तर प्रदेश में निजी परिसर में धार्मिक प्रार्थना आयोजित करने के लिए किसी तरह की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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