एक आरटीआई के जवाब से पता चला है कि ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के पास बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है. उच्चायोग ने जो आंकड़े दिए हैं, वे एक ग़ैर-सरकारी संगठन से लिए गए हैं, जिससे भारत सरकार की निगरानी और दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं.
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लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा द कारवां मैगज़ीन की रिपोर्ट और पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला देने पर भारी हंगामा हुआ. सरकार और लोकसभा अध्यक्ष ने इसे संसदीय नियमों का उल्लंघन बताया, वहीं राहुल गांधी ने सवाल उठाया, ‘इसमें ऐसा क्या है जिससे आप लोग इतना डर रहे हैं?’
पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक एक्स अकाउंट से जारी एक पोस्ट में कहा गया कि सरकार ने पाकिस्तान टीम को टूर्नामेंट के लिए श्रीलंका जाने की अनुमति दे दी है, लेकिन 15 फरवरी को पाकिस्तानी क्रिकेट टीम भारत के ख़िलाफ़ निर्धारित मैच में मैदान पर नहीं उतरेगी. इसके बाद आईसीसी ने चेतावनी दी कि ‘चुनिंदा भागीदारी प्रतियोगिताओं की भावना को कमज़ोर करती है’ और इसके ‘दीर्घकालिक प्रभाव’ हो सकते हैं.
उत्तराखंड के कोटद्वार में बीते दिनों एक मुस्लिम दुकानदार को हिंदुत्व समर्थकों द्वारा दुकान का नाम बदलने के लिए परेशान किया जा रहा था, जब दीपक कुमार नाम के एक शख़्स ने उनका विरोध किया. इसके बाद बड़ी संख्या में दक्षिणपंथी संगठनों के लोग दीपक के जिम पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे. अब पुलिस ने दीपक के ख़िलाफ़ ही एफआईआर दर्ज की है.
सरकार की कुल आय में आयकर (व्यक्तिगत कर) की हिस्सेदारी 21% है, जो कॉरपोरेट कर (18%) से अधिक है. दस्तावेज़ के मुताबिक, 2026-27 के लिए कॉरपोरेट टैक्स का बजट अनुमान 12,31,000 करोड़ रुपये है, जबकि आयकर से प्राप्ति का अनुमान 14,66,000 करोड़ रुपये रखा गया है.
सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने असम सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा के ‘मिया मुस्लिमों’ – यानी बांग्ला भाषी मुसलमानों – पर की गई विवादास्पद टिप्पणियों के लिए दिल्ली के हौज़ खास थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. इसके जवाब में शर्मा ने मंदर के ख़िलाफ़ सौ केस दर्ज कराने की बात कही है. इस पर मंदर ने कहा कि इन धमकियों का उनके काम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. वह बुलंदी से काम करेंगे.
केंद्रीय बजट 2026-27 के दस्तावेज़ों से पता चला है कि पिछले वित्त वर्ष में केंद्र सरकार ने सामाजिक क्षेत्र में वादे के मुताबिक़ धनराशि ख़र्च नहीं की है. इससे पहले सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के लिए अपर्याप्त धनराशि आवंटित न करने को लेकर व्यापक आलोचना देखने को मिली थी.
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