पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि ग़ाज़ियाबाद पुलिस उन्हें और उनके परिजनों को परेशान कर रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस देर रात उनके घर पहुंची, जबकि उनके ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों और दर्ज एफआईआर की पूरी जानकारी उन्हें ठीक से नहीं दी जा रही है. उपाध्याय उन शुरुआती पत्रकारों में शामिल थे, जिन्होंने अयोध्या राम मंदिर में भ्रष्टाचार और चढ़ावा चोरी के आरोपों को सामने लाया था.
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'हर घर तिरंगा' अभियान को संघ द्वारा नियंत्रित सरकारों और उसके परिवार की मजबूरी या अपने लोकतंत्र का चमत्कार मानते हुए भी याद रखना चाहिए कि उसके नेता तिरंगे को विद्वेष भड़काने के लिए भी इस्तेमाल करते रहे हैं.
अफ़ग़ान दूतावास इस साल 17 अगस्त को तालिबान के पांचवें ‘विक्ट्री डे’ समारोह की मेज़बानी करने जा रहा है. ख़बरों के अनुसार इस कार्यक्रम को न सिर्फ़ भारत सरकार का समर्थन हासिल है, बल्कि इसमें सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने की भी संभावना है. मालूम हो कि यह दिन 2021 में अमेरिका और नाटो की सेनाओं की अफ़ग़ानिस्तान से वापसी के बाद तालिबान के काबुल पर दोबारा क़ब्ज़े की याद में मनाया जाता है.
तेलंगाना में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान समयसीमा तक 74 लाख गणना प्रपत्र जमा नहीं हो सके हैं, जिससे इन मतदाताओं के संशोधित मतदाता सूची से बाहर होने का खतरा पैदा हो गया है. चुनाव आयोग ने तेलंगाना सरकार की ओर से करीब दो सप्ताह पहले शुरू किए गए एफआरसी को राशन कार्ड के समान बताते हुए एसआईआर के तहत इसे मान्य दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.
जेएनयू की प्रोफेसर एमेरिटा ज़ोया हसन को दिल्ली के सरदार पटेल विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान छात्रों को बहुलतावाद पर संबोधित करना था. वीएचपी सदस्यों के विरोध के बाद सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उनका संबोधन रद्द कर दिया गया.
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की ओर से नालसार लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों का अधिवक्ता के तौर पर पंजीकरण रोकने के निर्देश पर कड़ी नाराज़गी जताई है. भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का पूरा अधिकार है. बीसीआई बेवजह इस मामले में दख़ल दे रहा है.
किसी स्त्री की अस्मिता पर हमला होता है तो वह किसी राष्ट्र की हार या जीत नहीं, पूरी मनुष्यता की हार होती है. इसलिए विभाजन की स्त्रियों को याद करना केवल अतीत को याद करना नहीं है. यह वर्तमान से सवाल करना है. यह पूछना कि क्या हमने सीखा है कि किसी स्त्री का शरीर किसी समुदाय की संपत्ति नहीं, उसका अपना अस्तित्व है? क्या हमने समझा कि हिंसा का बदला किसी निर्दोष से नहीं लिया जा सकता?
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